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गीत से जाति प्रथा पर किया प्रहार
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Mon, 23 Feb 2015 10:20 PM IST
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सुदिष्टपुरी स्नातकोत्तर महाविद्यालय का वार्षिकोत्सव और अंबेडकर अध्ययन केंद्र का उद्घाटन सोमवार को संपन्न हुआ। शुभारंभ मुख्य अतिथि यूपी एग्रो के चेयरमैन पं. तारकेश्वर मिश्रा ने अंबेडकर अध्ययन केंद्र का फीता काटकर किया। छात्र-छात्राओं ने देश भक्ती गीत गाए तो जाति प्रथा पर गीत से प्रहार किया।
मुख्य अतिथि ने कहा कि अंबेडकर दलित परिवार में पैदा हुए थे। उस समय दलित को कुएं और सार्वजनिक स्थानों का उपयोग वर्जित था। वहीं हाल एकलव्य का भी रहा, प्रतिभाशाली होने के बाद भी उनको उपेक्षित किया गया। कबीर दास ने इस तरह की परंपराओं को ढकोसला बताया।
अंबेडकर की ही देन है कि आज दलित परिवार देश की मुख्य धारा से जुड़ गया है। उन्होंने नौजवानों को जागरूक होना देश की प्रगति का प्रतीक बताया। वार्षिकोत्सव की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डा. अशोक कुमार पांडेय ने कहा कि अंबेडकर अध्ययन केंद्र खोलने का तात्पर्य इस पिछड़े क्षेत्र में आम लोगों के साथ ही दलितों और पिछड़ों ज्ञान में वृद्धि करना है।
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ताकि ज्ञान प्राप्त कर लोग अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ सकें। सतीशचंद्र महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अशोक उपाध्याय, कुंवर सिंह महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अंजनी सिंह ने भी अंबेडकर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। डा. सुधाकर तिवारी ने चंदन है, इस देश कीमाटी तपो भूमि हर ग्राम है..., हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा-बच्चा राम है...गाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
छात्राओं ने बाबूल प्यारे सफल संवारे, सुन रे मेरी मईया। बोझ नहीं मैं किसी के सिर का प्रस्तुत किया। अन्य छात्राआें ने कव्वाली और अजन्मी बेटी मारने का नाटक प्रस्तुत कर लोगों को शिक्षा देने का प्रयास किया। ग्राम प्रधान प्रेमशंकर सिंह, प्रधान विनोद सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य मिथलेश सिंह, प्रधानाचार्य उमाशंकर मिश्रा, डा. गोरख सिंह, निर्भय सिंह गहलौत, अरविंद सिंह सेंगर, शिवशंकर सिंह, पीयूष सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ. संतोष सिंह ने किया।
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मुख्य अतिथि ने कहा कि अंबेडकर दलित परिवार में पैदा हुए थे। उस समय दलित को कुएं और सार्वजनिक स्थानों का उपयोग वर्जित था। वहीं हाल एकलव्य का भी रहा, प्रतिभाशाली होने के बाद भी उनको उपेक्षित किया गया। कबीर दास ने इस तरह की परंपराओं को ढकोसला बताया।
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अंबेडकर की ही देन है कि आज दलित परिवार देश की मुख्य धारा से जुड़ गया है। उन्होंने नौजवानों को जागरूक होना देश की प्रगति का प्रतीक बताया। वार्षिकोत्सव की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डा. अशोक कुमार पांडेय ने कहा कि अंबेडकर अध्ययन केंद्र खोलने का तात्पर्य इस पिछड़े क्षेत्र में आम लोगों के साथ ही दलितों और पिछड़ों ज्ञान में वृद्धि करना है।
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ताकि ज्ञान प्राप्त कर लोग अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ सकें। सतीशचंद्र महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अशोक उपाध्याय, कुंवर सिंह महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अंजनी सिंह ने भी अंबेडकर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। डा. सुधाकर तिवारी ने चंदन है, इस देश कीमाटी तपो भूमि हर ग्राम है..., हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा-बच्चा राम है...गाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
छात्राओं ने बाबूल प्यारे सफल संवारे, सुन रे मेरी मईया। बोझ नहीं मैं किसी के सिर का प्रस्तुत किया। अन्य छात्राआें ने कव्वाली और अजन्मी बेटी मारने का नाटक प्रस्तुत कर लोगों को शिक्षा देने का प्रयास किया। ग्राम प्रधान प्रेमशंकर सिंह, प्रधान विनोद सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य मिथलेश सिंह, प्रधानाचार्य उमाशंकर मिश्रा, डा. गोरख सिंह, निर्भय सिंह गहलौत, अरविंद सिंह सेंगर, शिवशंकर सिंह, पीयूष सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ. संतोष सिंह ने किया।