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Ballia News: मेडिकल वेस्ट युक्त कूड़े में लगाई आग
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बलिया। जिला अस्पताल परिसर के इमरजेंसी कक्ष के पास पिछले तीन दिनों से कूड़ा जल रहा है। कूड़े में मौजूद बाॅयो मेडिकल वेस्ट, प्लास्टिक की थैली जलने से निकल रहा धुआं वातावरण को जहरीला करने के साथ वार्डों में भर्ती मरीजों के लिए समस्या बन गया है।
स्पताल की साफ सफाई से निकलने वाले कचरे को सफाई कर्मी दूर फेंकने के बजाए अस्पताल परिसर में डंप कर देते हैं। नगरपालिका कूड़े में बाॅयो मेडिकल वेस्ट होने की बात कह कर उठान नहीं करवाती है। इमरजेंसी में काम करने वाले वाले लड़के मरीजों को इंजेक्शन लगाने के बाद सिरिंज व मरहम पट्टी बाल्टी में फेंकने की जगह खिड़की से पीछे फेंक देते हैं। इसे सफाईकर्मी कूड़े में डाल देते हैं। अधिक कचरा होने पर कर्मचारी चोरी छिपे रात में या छुट्टी वाले दिन आग लगा देते हैं। अस्पताल से मेडिकल बाॅयो वेस्ट उठाने के लिए गाजीपुर से दिन में गाड़ी आती है। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में मेडिकल वेस्ट खुले में जलाया जाता है। इस कचरे में ब्लड से सनी पट्टियां-कॉटन, खाली बोतलें, पॉलिथिन, सिरिंज सहित अन्य सामग्री होती हैं। कई सामग्री आग में नष्ट नहीं होती है। यही स्थिति रसायनों की भी होती है। कूड़े में मेडिकल वेस्ट जलाने से निकलने वाला धुआं सांस के जरिए फेफड़ों में जाकर कैंसर, टीबी, दमा और त्वचा रोग का कारण बन रहा है।
इमरजेंसी व मेडिकल वार्ड में 50 से ऊपर गंभीर मरीज भर्ती रहते हैं। सांस रोगियों के लिए यह धुआं खतरनाक हो गया है। इस बाबत सीएमएस डॉ. एके यादव ने कहा कि सफाईकर्मियों को कूड़े में बायो मेडिकल वेस्ट डालने से मना किया गया है। नगरपालिका की ओर से कंटेनर रखा गया है। कूड़े में आग लगाना गलत है, इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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स्पताल की साफ सफाई से निकलने वाले कचरे को सफाई कर्मी दूर फेंकने के बजाए अस्पताल परिसर में डंप कर देते हैं। नगरपालिका कूड़े में बाॅयो मेडिकल वेस्ट होने की बात कह कर उठान नहीं करवाती है। इमरजेंसी में काम करने वाले वाले लड़के मरीजों को इंजेक्शन लगाने के बाद सिरिंज व मरहम पट्टी बाल्टी में फेंकने की जगह खिड़की से पीछे फेंक देते हैं। इसे सफाईकर्मी कूड़े में डाल देते हैं। अधिक कचरा होने पर कर्मचारी चोरी छिपे रात में या छुट्टी वाले दिन आग लगा देते हैं। अस्पताल से मेडिकल बाॅयो वेस्ट उठाने के लिए गाजीपुर से दिन में गाड़ी आती है। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में मेडिकल वेस्ट खुले में जलाया जाता है। इस कचरे में ब्लड से सनी पट्टियां-कॉटन, खाली बोतलें, पॉलिथिन, सिरिंज सहित अन्य सामग्री होती हैं। कई सामग्री आग में नष्ट नहीं होती है। यही स्थिति रसायनों की भी होती है। कूड़े में मेडिकल वेस्ट जलाने से निकलने वाला धुआं सांस के जरिए फेफड़ों में जाकर कैंसर, टीबी, दमा और त्वचा रोग का कारण बन रहा है।
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इमरजेंसी व मेडिकल वार्ड में 50 से ऊपर गंभीर मरीज भर्ती रहते हैं। सांस रोगियों के लिए यह धुआं खतरनाक हो गया है। इस बाबत सीएमएस डॉ. एके यादव ने कहा कि सफाईकर्मियों को कूड़े में बायो मेडिकल वेस्ट डालने से मना किया गया है। नगरपालिका की ओर से कंटेनर रखा गया है। कूड़े में आग लगाना गलत है, इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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