{"_id":"5ef4d7628ebc3e430a0caf7b","slug":"ganga-s-water-level-increases-people-of-coastal-villages-are-scared-ballia-news-vns5322362175","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के लोगों की बढ़ी धुकधुकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के लोगों की बढ़ी धुकधुकी
विज्ञापन
रामगढ़। एक सप्ताह से गंगा का जलस्तर बढ़ता देख गंगापुर, सोनारटोला, चौबे छपरा, केहरपुर, दूबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा और नौरंगा के लोग सहम गए हैं। उन्हें डर है कि कहीं उनका आशियाना गंगा की कटान की भेंट न चढ़ जाए। इन गांवों के लोगों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर हर साल बड़े पैमाने पर सरकार खर्च करती है लेकिन एक भी गांव को इसका लाभ नहीं मिला। उधर, केंद्रीय जल आयोग गायघाट की मानें तो गंगा का जलस्तर बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे तक 51.55 मीटर रिकार्ड किया गया। आधा सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर बढ़ रहा है। अगले 24 घंटे तक नदी का जलस्तर बढ़ता ही रहेगा।
कटान से बचाव के लिए लगभग 30 करोड़ की लागत से पांच जगहों पर कटानरोधी कार्य चल रहा है लेकिन इन कार्यों में मानक की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इससे कटान प्रभावित गांव के लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। दुबे छपरा निवासी पंकज तिवारी का आरोप है कि बचाव कार्य के नाम पर जो पिलर बनाए व लगाए जा रहे हैं, उसमें घोर अनियमितता बरती जा रही है। यहां मिक्सर मशीन से नहीं, हाथ से ही जैसे तैसे सीमेंट, बालू और कंक्रीट मिलाकर तैयार किए जा रहे पिलर में मानक के मुताबिक सरिया भी नहीं लगाया जा रहा है। यही नहीं, प्लेटफार्म निर्माण में काम कम, खानापूर्ति ज्यादा हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा की सतह से यदि प्लेटफार्म नहीं बना तो वह लहरों से लड़ने में कारगर नहीं होगा।
-
तटवर्ती गांव के लोग खुद उजाड़ रहे अपने घर
रामगढ़। गंगा का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की नींद हराम हो गई है। कटान से होने वाली तबाही से पहले ही वे अपने मकान अपने ही हाथों से तोड़ रहे हैं ताकि ईंट और सामान आदि सुरक्षित किया जा सके। पिछले साल ही केहरपुर और चौबे छपरा समेत आधा दर्जन गांवों ने गंगा नदी की लहरों ने खूब तबाही मचाई थी। उदई छपरा गंगा नदी के मुहाने पर शिवजी सिंह, वासुदेव उपाध्याय, शतदेव सिंह व नरेश उपाध्याय आदि ने अपना आशियाना उजाड़कर सुरक्षित ठौर पर जाने की तैयारी में हैं। अवशेष बचे केहपुर के वाशिंदे परमात्मा नन्द ओझा, विजय ओझा, संतन ओझा, राकेश ओझा, त्रिभुवन ओझा, अश्विनी ओझा आदि मजदूरों को लगाकर घरों को तोड़ने में जुटे हैं। क्योंकि उन्हें विभाग द्वारा कराए जा रहे कटानरोधी कार्य पर भरोसा नहीं है।
विज्ञापन
-
विज्ञापन
कटान से बचाव के लिए लगभग 30 करोड़ की लागत से पांच जगहों पर कटानरोधी कार्य चल रहा है लेकिन इन कार्यों में मानक की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इससे कटान प्रभावित गांव के लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। दुबे छपरा निवासी पंकज तिवारी का आरोप है कि बचाव कार्य के नाम पर जो पिलर बनाए व लगाए जा रहे हैं, उसमें घोर अनियमितता बरती जा रही है। यहां मिक्सर मशीन से नहीं, हाथ से ही जैसे तैसे सीमेंट, बालू और कंक्रीट मिलाकर तैयार किए जा रहे पिलर में मानक के मुताबिक सरिया भी नहीं लगाया जा रहा है। यही नहीं, प्लेटफार्म निर्माण में काम कम, खानापूर्ति ज्यादा हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा की सतह से यदि प्लेटफार्म नहीं बना तो वह लहरों से लड़ने में कारगर नहीं होगा।
विज्ञापन
-
तटवर्ती गांव के लोग खुद उजाड़ रहे अपने घर
रामगढ़। गंगा का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की नींद हराम हो गई है। कटान से होने वाली तबाही से पहले ही वे अपने मकान अपने ही हाथों से तोड़ रहे हैं ताकि ईंट और सामान आदि सुरक्षित किया जा सके। पिछले साल ही केहरपुर और चौबे छपरा समेत आधा दर्जन गांवों ने गंगा नदी की लहरों ने खूब तबाही मचाई थी। उदई छपरा गंगा नदी के मुहाने पर शिवजी सिंह, वासुदेव उपाध्याय, शतदेव सिंह व नरेश उपाध्याय आदि ने अपना आशियाना उजाड़कर सुरक्षित ठौर पर जाने की तैयारी में हैं। अवशेष बचे केहपुर के वाशिंदे परमात्मा नन्द ओझा, विजय ओझा, संतन ओझा, राकेश ओझा, त्रिभुवन ओझा, अश्विनी ओझा आदि मजदूरों को लगाकर घरों को तोड़ने में जुटे हैं। क्योंकि उन्हें विभाग द्वारा कराए जा रहे कटानरोधी कार्य पर भरोसा नहीं है।
विज्ञापन
-