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गंगा उफान पर, लेकिन घाघरा स्थिर

Thu, 03 Aug 2017 11:41 PM IST
ballia
ballia Updated Thu, 03 Aug 2017 11:41 PM IST
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Ganga on the boom, but the waistline is stable
गंगा के जलस्‍तर में बढ़ाव होने पर तट पर लहराता पानी।  - फोटो : ballia
गंगा के जलस्तर में तीसरी बार उफान जारी है। विभागीय व जिला प्रशासन का उदासीनता का आलम यह है कि दूबेछपरा में चल रहा बाढ़ निरोधक कार्य सीमा अवधि 20 जुलाई के बाद भी आज तक पूरा नहीं हो की है। अधिकारियों का दौरा केवल खानापूर्ति तक ही सीमित रहे।  उधर, केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गुरूवार की शाम 4 बजे गंगा का जलस्तर 54.08 मीटर दर्ज किया गया। साथ ही प्रति एक सेमी का बढ़ाव बना हुआ है।
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 गंगा के जलस्तर में बढ़ाव देखते हुए तटवासी सतर्क हो उठे हैं। हालांकि घाघरा अभी बढ़ाव पर नहीं है। लेकिन गंगा में बढ़ोतरी देख घाघरा के तटवासी भी अपने आशियाने की तलाश में जुट गए हैं। अभी तक लोग जलस्तर स्थिर रहने पर निश्चिंत थे। लेकिन गंगा में बढ़ाव देख उनकी नींद उड़ गई हैँ। अब वह अपने आशियाने की तलाश में तो जुटे गए हैं जबकि मवेशियों के चारे पानी और उन्हें रखने के स्थान की तलाश भी उनके लिए परेशानी का सबब बनी है।
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बता दें कि दूबेछपरा, गोपालपुर, उदईछपरा को बचाने के लिए शासन से 29 करोड़ रुपये अवमुक्त हुए। जिसमें एक ठेकेदार को 21 करोड़ रुपये में 750 मीटर की दूरी तक लांचिंग पीचिंग बनाकर जीओ विधि का प्लेटफर्म बनाना था।
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जबकि आठ करोड़ में दूसरे ठेकेदार को एक स्पर व 1200 मीटर की दूरी तक बंधे के मरम्मत के साथ ही जीओ विधि के बैग व पत्थर बिछाने थे। जिसमें 21 करोड़ रुपये वाले ठेकेदार को गंगा की तलहठी में करीब 30 मीटर तक छ: लेयर ईसी बैग व जीओ बैग डालने थे।  जिसमें किसी ने आठ लेयर तो किसी ने पांच लेयर जीओ बैग डाले थे। गंगा का जलस्तर बढ़ गया औरे यह कार्य ठप हो गया।


निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों ने पानी बढ़ने के साथ ठेकेदारों के करनामें समझ नहीं पाये। यही नहीं मड पम्प से बालू नहीं निकालना था। बावजूद ठेकेदारों ने 16 मड पम्पों का इस खेल में प्रयोग किया। ताकि 29 करोड़ रुपये का जमकर बंदरबांट किया जा सके। जिलाधिकारी से लेकर उप्र शासन के सिंचाई विभाग के सचिव शम्भू नाथ ने मौके का निरीक्षण किया। लेकिन आज तक कोई कार्यवाई नहीं हुई। इसे लेकर लोग चिंतित हैं।
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