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Ballia News: गंगा हुई स्थिर लेकिन 36 गांवों की 45 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित
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बलिया/ मझौवां। गंगा जलस्तर रविवार की शाम चार बजे गायघाट गेज पर स्थिर होने से तटवर्ती लोगों ने राहत की सांस ली। उधर, मझौंवा में सुघर छपरा, उदई छपरा, नौरंगा, भुआल छपरा, चक्की, उपाध्याय टोला से लगायत टेंगरही तक 36 गांवों की 45 हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित है।
मुख्य मार्ग या बंधों से गांवों में जाने वाले मार्गों पर घुटने भर पानी चढ़ गया है। शहर के बंदुआ बंधे से नीचे जाने वाले मार्ग पर घुटने तक पानी जलभराव हो गया है। वहीं, महावीर घाट गायत्री मार्ग तक जाने वाले मार्ग भी डूब गया है। मझौवां संवाददाता के अनुसार एनएच-31 के दक्षिण दिशा की ओर गायघाट से लेकर टेंगरही-बिड़ला बंधे तक लगभग 1500 एकड़ की फसल डूब गई है। गंगा का जलस्तर शनिवार को 58.615 मीटर को पार कर गया था। सबसे भयावह स्थिति सुघर छपरा गांव की है। बाढ़ पीड़ितों को शासन प्रशासन अथवा कोई भी जनप्रतिनिधि पूछनहार नहीं है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के मुताबिक रविवार की शाम चार बजे तक गंगा नदी का जलस्तर 59.120 मीटर रिकाॅर्ड किया गया। खतरे के निशान 57.615 मीटर से 1.5 मीटर ऊपर जलस्तर पहंुच गया है। गंगा नदी के पानी से तीन तरफ से घिरे गांवों के सड़क मार्ग पर पानी घुटने तक भर जाने से गांव वाले अपने दैनिक उपयोग के खाद्य सामग्री भी नहीं जुटा पा रहे है।
12 शैक्षिण संस्थानों में पठन-पाठन ठप, चौकी से कर्मचारी गायब : बाढ़ का गांवों में घुसने से 12 से ज्यादा स्कूलों को बंद कर दिया गया है। दूबे छपरा हनुमान मंदिर पर बाढ़ चौकी सिर्फ कागजों में चल रही है। कागजों में दो लेखपाल, एक कानूनगो और दो कांस्टेबल की ड्यूटी लगाई गई है। स्वास्थ्य टीम का कहीं अता-पता नहीं है।
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संपर्क मार्गों पर चढ़ा बाढ़ का पानी
मझौवां। राष्ट्रीय राजमार्ग-31 से सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर को जाने वाली संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में डूब गया है। कमर तक पानी को पार करते हुए अपना सुरक्षित ठिकाना तलाशने में लग गए है। उधर, नौरंगा भुआल छपरा गांव में बाढ़ का पानी पूरी तरह से फैल गया है। भुआल छपरा गांव से फेकू बाबा के स्थान तक जाने वाली सड़क पर पानी भर जाने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पलटप्रवाह से बढ़ी परेशानी : दयाछपरा। ग्राम पंचायत गोपालपुर के उदई छपरा में सुनील उपाध्याय के घर के सामने गंगा के पलटप्रवाह से पत्थर के बंधे पर दबाव बनाना शुरू हो गया है। इससे ग्रामीणों में भय व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि बोल्डर पानी के दबाव से कभी भी बह सकते हैं। संवाद
टोंस नदी का पानी चितेश्वर नगर और भीसापर में घुसा
चितबड़ागांव। टोंस नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने नगर पंचायत चितबड़ागांव और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। नगर पंचायत क्षेत्र को नगवा गाई, अख्तियारपुर, बीबीपुर, बढ़वलिया, टीकरी, मजूरपुर समेत कई गांवों से जोड़ने वाली मुख्य सड़क पानी में डूब गई है। क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मधो ब्रह्म बाबा का स्थान भी चारों ओर से पानी से घिर गया है। चितेश्वर नगर वार्ड में पानी प्रवेश कर गया है।
बाढ़ विभाग के एक्सईएन संजय कुमार मिश्र ने बताया कि जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए हर क्षेत्र में दौरा किया जा रहा है। नेशनल हाईवे-31 के डेंजर पॉइंट पर 24 घंटे जेई की ड्यूटी लगाई गई है। बचाव कार्य के लिए रोशनी, मिट्टी, रेत, बोल्डर, पार्कोंपाइन की व्यवस्था कर दी गई हैश्र फिलहाल कहीं, कोई खतरा नहीं है।
बैरिया के उपजिलाधिकारी आलोक प्रताप सिंह ने कहा कि दूबे छपरा में बाढ़ चौकी स्थापित कर दी गई हैं। लेखपाल को बाढ़ पीड़ितों की लिस्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। पीड़ितों के लिए राहत सामग्री और पशुओं के लिए चारे का बंदोबस्त किया जा रहा है।
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मुख्य मार्ग या बंधों से गांवों में जाने वाले मार्गों पर घुटने भर पानी चढ़ गया है। शहर के बंदुआ बंधे से नीचे जाने वाले मार्ग पर घुटने तक पानी जलभराव हो गया है। वहीं, महावीर घाट गायत्री मार्ग तक जाने वाले मार्ग भी डूब गया है। मझौवां संवाददाता के अनुसार एनएच-31 के दक्षिण दिशा की ओर गायघाट से लेकर टेंगरही-बिड़ला बंधे तक लगभग 1500 एकड़ की फसल डूब गई है। गंगा का जलस्तर शनिवार को 58.615 मीटर को पार कर गया था। सबसे भयावह स्थिति सुघर छपरा गांव की है। बाढ़ पीड़ितों को शासन प्रशासन अथवा कोई भी जनप्रतिनिधि पूछनहार नहीं है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के मुताबिक रविवार की शाम चार बजे तक गंगा नदी का जलस्तर 59.120 मीटर रिकाॅर्ड किया गया। खतरे के निशान 57.615 मीटर से 1.5 मीटर ऊपर जलस्तर पहंुच गया है। गंगा नदी के पानी से तीन तरफ से घिरे गांवों के सड़क मार्ग पर पानी घुटने तक भर जाने से गांव वाले अपने दैनिक उपयोग के खाद्य सामग्री भी नहीं जुटा पा रहे है।
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12 शैक्षिण संस्थानों में पठन-पाठन ठप, चौकी से कर्मचारी गायब : बाढ़ का गांवों में घुसने से 12 से ज्यादा स्कूलों को बंद कर दिया गया है। दूबे छपरा हनुमान मंदिर पर बाढ़ चौकी सिर्फ कागजों में चल रही है। कागजों में दो लेखपाल, एक कानूनगो और दो कांस्टेबल की ड्यूटी लगाई गई है। स्वास्थ्य टीम का कहीं अता-पता नहीं है।
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संपर्क मार्गों पर चढ़ा बाढ़ का पानी
मझौवां। राष्ट्रीय राजमार्ग-31 से सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर को जाने वाली संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में डूब गया है। कमर तक पानी को पार करते हुए अपना सुरक्षित ठिकाना तलाशने में लग गए है। उधर, नौरंगा भुआल छपरा गांव में बाढ़ का पानी पूरी तरह से फैल गया है। भुआल छपरा गांव से फेकू बाबा के स्थान तक जाने वाली सड़क पर पानी भर जाने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पलटप्रवाह से बढ़ी परेशानी : दयाछपरा। ग्राम पंचायत गोपालपुर के उदई छपरा में सुनील उपाध्याय के घर के सामने गंगा के पलटप्रवाह से पत्थर के बंधे पर दबाव बनाना शुरू हो गया है। इससे ग्रामीणों में भय व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि बोल्डर पानी के दबाव से कभी भी बह सकते हैं। संवाद
टोंस नदी का पानी चितेश्वर नगर और भीसापर में घुसा
चितबड़ागांव। टोंस नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने नगर पंचायत चितबड़ागांव और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। नगर पंचायत क्षेत्र को नगवा गाई, अख्तियारपुर, बीबीपुर, बढ़वलिया, टीकरी, मजूरपुर समेत कई गांवों से जोड़ने वाली मुख्य सड़क पानी में डूब गई है। क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मधो ब्रह्म बाबा का स्थान भी चारों ओर से पानी से घिर गया है। चितेश्वर नगर वार्ड में पानी प्रवेश कर गया है।
बाढ़ विभाग के एक्सईएन संजय कुमार मिश्र ने बताया कि जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए हर क्षेत्र में दौरा किया जा रहा है। नेशनल हाईवे-31 के डेंजर पॉइंट पर 24 घंटे जेई की ड्यूटी लगाई गई है। बचाव कार्य के लिए रोशनी, मिट्टी, रेत, बोल्डर, पार्कोंपाइन की व्यवस्था कर दी गई हैश्र फिलहाल कहीं, कोई खतरा नहीं है।
बैरिया के उपजिलाधिकारी आलोक प्रताप सिंह ने कहा कि दूबे छपरा में बाढ़ चौकी स्थापित कर दी गई हैं। लेखपाल को बाढ़ पीड़ितों की लिस्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। पीड़ितों के लिए राहत सामग्री और पशुओं के लिए चारे का बंदोबस्त किया जा रहा है।