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गंगा ने पार किया डेंजर लेवल, जियो बैग प्लेटफार्म भी बहा
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रामगड़ में गंगा के उफान के कारण ध्वस्त होता स्कूल
- फोटो : BALLIA
रामगढ़। गंगा का बढ़ रहा जलस्तर सोमवार की देर शाम खतरे के निशान को पार कर गया। मंगलवार की सुबह लाला बगीचा सोनरा टोला में कटान से बचाव के लिए जियो बैग से बना प्लेटफार्म गंगा में समा गया। केहरपुर में जियो बैग बह गए। सूचना पर एसडीएम दुष्यंत कुमार ने स्थिति का जायजा लिया और कटान रोकने के लिए हरसंभव प्रयास करने का निर्देश बाढ़ विभाग के अधिकारियों को दिया।
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 57.610 मीटर को पार करते मध्यम बाढ़ स्तर 58.615 मीटर के करीब पहुंच गया है। मंगलवार की शाम केंद्रीय जल आयोग गाय घाट पर 58.30 मीटर जलस्तर रिकार्ड किया गया। तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से जलस्तर में बढ़ाव दर्ज किया गया। खतरे के निशान को पार करते ही गंगा ने क्षेत्र में तबाही मचानी शुरू कर दी है। मंगलवार की सुबह लाला बगीचे सोनरा टोला में जियो बैग से बना प्लेटफार्म गंगा में समाहित हो गया जबकि केहरपुर में जियो बैग बह गए। एसडीएम बैरिया दुष्यंत कुमार ने मौके का जायजा लिया। गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखकर भयभीत केहरपुर के जयप्रकाश ओझा, बृजु ओझा, अनिल ओझा, पप्पू ओझा, त्रिभुवन ओझा, अशोक ओझा, शिवजी सिंह आदि सामानों को सुरक्षित ठौर पर पहुंचाने के प्रयास में हैं। सोनरा टोला गंगापुर में बहादुर बाबा के स्थान पर संकट मंडरा रहा है। केहरपुर में भी गंगा की लहरें हरेराम ब्रह्चारी महाराज के स्थान के पास पहुंच गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन व बाढ़ विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के कारण यह दिन देखना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि गंगा जलस्तर बढ़ता रहा तो कुछ घंटों में गंगा का जलस्तर मध्यम बाढ़ स्तर 58.615 मी. पार कर जाएगा।
डीएम और एसपी ने लिया बाढ़ प्रभावित गांवों का जायजा : रामगढ़। जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत और पुलिस अधीक्षक देवेंद्र नाथ दुबे ने मंगलवार की दोपहर बाढ़ प्रभावित सांसद आदर्श गांव केहरपुर का जायजा लिया। इस दौरान ग्रामीणों ने उन्हें अपनी परेशानी बताई। जिलाधिकारी ने हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। साथ ही बाढ़ विभाग के अधिकारियों को कटान को रोकने का निर्देश दिया। ग्रामीणों की मांग पर गांव में जनरेटर की व्यवस्था कराने का दिशा निर्देश एसडीएम बैरिया को दिया। गांव के जयप्रकाश ओझा, बिरजू ओझा, बबन ओझा, शिवजी सिंह, ग्राम प्रधान विजयकांत पांडेय ने जिलाधिकारी से कहा कि अगर इस गांव के लिए बना 29 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट पास हो गया होता तो शायद आज बाढ़ विभाग को आज हरे पेड़ों को काटकर गंगा की धारा को रोकने के लिए नहीं डालना पड़ता। यह भी शिकायत की कि बाढ़ विभाग ने फ्लड फाइटिंग के तहत करोड़ों रुपये का बंदरबाट किया है। इसकी वजह से गंगा के खतरे का निशान पार करते ही जियो बैग, बोल्डर को अपने पेटे में समाहित कर लेती है। जिलाधिकारी ने केहरपुर में बनी पानी टंकी व गांवों को बचाने के लिए बाढ़ विभाग के अधीक्षण अभियंता बीपी सिंह को निर्देश दिया। उधर, गंगा की लहरें दुबे छपरा में 29 करोड़ रुपये की लागत से बने रिंग बंधे से टकराने लगी है। इस मौके पर एसडीएम दुष्यन्त कुमार, बाढ़ विभगा के जेई मुन्ना यादव, जावेद अख्तर आदि रहे।
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बाढ़ के पानी से घिरने लगे दियरांचल के गांव : दयाछपरा। गंगा में उफान के चलते जगदेवा, आंशिक दया छपरा को लोगों की धड़कनें बढ़ने लगी हैं। गंगा का पानी सिंचाई विभाग के बंधा के तरफ से दियरांचल को घेरना शुरू कर दिया है। यह देख दीयर में परवल की खेती करने वाले किसान परवल को तोड़ कर बाजार ले जाने के प्रयास में लग गए हैं। उनका कहना है कि अगर इसी रफ्तार से जलस्तर बढ़ता रहा तो 24 घंटे में में पूरा दीयर डूब जाएगा। ऐसे में जो भी परवल टूट जाएगा उससे कुछ तो हासिल हो जाएगा। वहीं, गांव में पानी घुसने की आशंका को लेकर ग्रामीण अभी से ही जरूरी सामानों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के कवायद में लग गए हैं। छात्र नेता मैनेजर सिंह, अक्षयलाल पाव्ठव्क, प्रकाश मिश्र आदि का कहना है कि अभी गंगा का पानी वंशगोपाल छपरा से लगायत दुबेछपरा रिंग बंधे तक चारों तरफ से घेरना शुरू कर दिया है। पानी का दबाव पिछली बार तरह इस बार भी दुबेछपरा रिंग बंधे पर हुआ तो एनएच 31 के दक्षिण बसे प्रसाद छपरा, आलम राय के टोला, बुधन चक, पांडेयपुर, मुरली छपरा, रामपुर, हाता समेत कई गांव पानी में डूब जाएंगे।
भगवान टोला टीपुरा गांव घिरा, प्रधान ने लगाया नाव : जयप्रकाशनगर। विकास खंड मुरली छपरा क्षेत्र के कोड़रहा नौबरार ग्राम पंचायत का भगवान टोला टीपुरा गांव मंगलवार की सुबह बाढ़ के पानी से घिर गया। इससे लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। कोड़रहा नौबरार ग्राम पंचायत का भगवान टोला टीपुरा गांव गंगा नदी से कुछ ही दूरी पर बसा है जो नदी का पानी बढ़ते ही चपेट में आ जाता है और वहां के वाशिंदों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। गांव को सुरक्षित करने के लिए कोई कवायद नहीं की गई। गांव के पूर्व प्रधान जनार्दन यादव, बैजनाथ यादव, कल्लू बिंद, रमाकांत यादव, महावीर यादव, हृदया यादव, धर्मेंद्र यादव आदि ने बताया कि इस वर्ष भी गंगा नदी का ज्योंही जलस्तर बढ़ते ही सोमवार की शाम से बाढ़ के पानी ने दस्तक देना शुरू कर दिया और मंगलवार की सुबह पूरा बाढ़ के पानी से घिर गया। हालांकि ग्राम प्रधान रुबी सिंह की ओर से ग्रामीणों को आने-जाने के लिए एक नाव उपलब्ध कराया गया है।
कटान पीड़ितों को पट्टे की जमीन पर नहीं मिला कब्जा : बैरिया। तहसील क्षेत्र में घाघरा की कटान से बेघर हुए कई गांवों के पीड़ितों को ग्राम समाज की भूमि का आवंटन होने के बावजूद भी कब्जा दखल नहीं कराया गया है। इसको लेकर इंटक के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह के द्वारा राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष के यहां पत्र भेज कर कटान पीड़ितों को आवंटित पट्टे की जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए जिलाधिकारी व उप जिलाधिकारी निर्देशित करने की मांग की है। बता दें कि 2011 से 2017 तक के बीच घाघरा नदी की कटान से श्रीकांत पुर, नारायनागढ़, इब्राहिमाबाद उपरवार, इब्राहिमाबाद नौबरार ग्राम पंचायत के 327 परिवार बेघर हो गए थे। इसके लिए बैरिया तहसील प्रशासन द्वारा ग्राम समाज की भूमि पर प्रति परिवार तीन डिसमिल के हिसाब से पट्टा आवंटित किया गया। लेकिन अभी तक कटान पीड़ित उस पर कब्जा दाखिल नहीं हो पाए। इसके चलते कटान पीड़ित आज भी बेघर हैं सार्वजनिक स्थानों पर रह कर जीवन यापन कर रहे हैं।
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गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 57.610 मीटर को पार करते मध्यम बाढ़ स्तर 58.615 मीटर के करीब पहुंच गया है। मंगलवार की शाम केंद्रीय जल आयोग गाय घाट पर 58.30 मीटर जलस्तर रिकार्ड किया गया। तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से जलस्तर में बढ़ाव दर्ज किया गया। खतरे के निशान को पार करते ही गंगा ने क्षेत्र में तबाही मचानी शुरू कर दी है। मंगलवार की सुबह लाला बगीचे सोनरा टोला में जियो बैग से बना प्लेटफार्म गंगा में समाहित हो गया जबकि केहरपुर में जियो बैग बह गए। एसडीएम बैरिया दुष्यंत कुमार ने मौके का जायजा लिया। गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखकर भयभीत केहरपुर के जयप्रकाश ओझा, बृजु ओझा, अनिल ओझा, पप्पू ओझा, त्रिभुवन ओझा, अशोक ओझा, शिवजी सिंह आदि सामानों को सुरक्षित ठौर पर पहुंचाने के प्रयास में हैं। सोनरा टोला गंगापुर में बहादुर बाबा के स्थान पर संकट मंडरा रहा है। केहरपुर में भी गंगा की लहरें हरेराम ब्रह्चारी महाराज के स्थान के पास पहुंच गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन व बाढ़ विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के कारण यह दिन देखना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि गंगा जलस्तर बढ़ता रहा तो कुछ घंटों में गंगा का जलस्तर मध्यम बाढ़ स्तर 58.615 मी. पार कर जाएगा।
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डीएम और एसपी ने लिया बाढ़ प्रभावित गांवों का जायजा : रामगढ़। जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत और पुलिस अधीक्षक देवेंद्र नाथ दुबे ने मंगलवार की दोपहर बाढ़ प्रभावित सांसद आदर्श गांव केहरपुर का जायजा लिया। इस दौरान ग्रामीणों ने उन्हें अपनी परेशानी बताई। जिलाधिकारी ने हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। साथ ही बाढ़ विभाग के अधिकारियों को कटान को रोकने का निर्देश दिया। ग्रामीणों की मांग पर गांव में जनरेटर की व्यवस्था कराने का दिशा निर्देश एसडीएम बैरिया को दिया। गांव के जयप्रकाश ओझा, बिरजू ओझा, बबन ओझा, शिवजी सिंह, ग्राम प्रधान विजयकांत पांडेय ने जिलाधिकारी से कहा कि अगर इस गांव के लिए बना 29 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट पास हो गया होता तो शायद आज बाढ़ विभाग को आज हरे पेड़ों को काटकर गंगा की धारा को रोकने के लिए नहीं डालना पड़ता। यह भी शिकायत की कि बाढ़ विभाग ने फ्लड फाइटिंग के तहत करोड़ों रुपये का बंदरबाट किया है। इसकी वजह से गंगा के खतरे का निशान पार करते ही जियो बैग, बोल्डर को अपने पेटे में समाहित कर लेती है। जिलाधिकारी ने केहरपुर में बनी पानी टंकी व गांवों को बचाने के लिए बाढ़ विभाग के अधीक्षण अभियंता बीपी सिंह को निर्देश दिया। उधर, गंगा की लहरें दुबे छपरा में 29 करोड़ रुपये की लागत से बने रिंग बंधे से टकराने लगी है। इस मौके पर एसडीएम दुष्यन्त कुमार, बाढ़ विभगा के जेई मुन्ना यादव, जावेद अख्तर आदि रहे।
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बाढ़ के पानी से घिरने लगे दियरांचल के गांव : दयाछपरा। गंगा में उफान के चलते जगदेवा, आंशिक दया छपरा को लोगों की धड़कनें बढ़ने लगी हैं। गंगा का पानी सिंचाई विभाग के बंधा के तरफ से दियरांचल को घेरना शुरू कर दिया है। यह देख दीयर में परवल की खेती करने वाले किसान परवल को तोड़ कर बाजार ले जाने के प्रयास में लग गए हैं। उनका कहना है कि अगर इसी रफ्तार से जलस्तर बढ़ता रहा तो 24 घंटे में में पूरा दीयर डूब जाएगा। ऐसे में जो भी परवल टूट जाएगा उससे कुछ तो हासिल हो जाएगा। वहीं, गांव में पानी घुसने की आशंका को लेकर ग्रामीण अभी से ही जरूरी सामानों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के कवायद में लग गए हैं। छात्र नेता मैनेजर सिंह, अक्षयलाल पाव्ठव्क, प्रकाश मिश्र आदि का कहना है कि अभी गंगा का पानी वंशगोपाल छपरा से लगायत दुबेछपरा रिंग बंधे तक चारों तरफ से घेरना शुरू कर दिया है। पानी का दबाव पिछली बार तरह इस बार भी दुबेछपरा रिंग बंधे पर हुआ तो एनएच 31 के दक्षिण बसे प्रसाद छपरा, आलम राय के टोला, बुधन चक, पांडेयपुर, मुरली छपरा, रामपुर, हाता समेत कई गांव पानी में डूब जाएंगे।
भगवान टोला टीपुरा गांव घिरा, प्रधान ने लगाया नाव : जयप्रकाशनगर। विकास खंड मुरली छपरा क्षेत्र के कोड़रहा नौबरार ग्राम पंचायत का भगवान टोला टीपुरा गांव मंगलवार की सुबह बाढ़ के पानी से घिर गया। इससे लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। कोड़रहा नौबरार ग्राम पंचायत का भगवान टोला टीपुरा गांव गंगा नदी से कुछ ही दूरी पर बसा है जो नदी का पानी बढ़ते ही चपेट में आ जाता है और वहां के वाशिंदों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। गांव को सुरक्षित करने के लिए कोई कवायद नहीं की गई। गांव के पूर्व प्रधान जनार्दन यादव, बैजनाथ यादव, कल्लू बिंद, रमाकांत यादव, महावीर यादव, हृदया यादव, धर्मेंद्र यादव आदि ने बताया कि इस वर्ष भी गंगा नदी का ज्योंही जलस्तर बढ़ते ही सोमवार की शाम से बाढ़ के पानी ने दस्तक देना शुरू कर दिया और मंगलवार की सुबह पूरा बाढ़ के पानी से घिर गया। हालांकि ग्राम प्रधान रुबी सिंह की ओर से ग्रामीणों को आने-जाने के लिए एक नाव उपलब्ध कराया गया है।
कटान पीड़ितों को पट्टे की जमीन पर नहीं मिला कब्जा : बैरिया। तहसील क्षेत्र में घाघरा की कटान से बेघर हुए कई गांवों के पीड़ितों को ग्राम समाज की भूमि का आवंटन होने के बावजूद भी कब्जा दखल नहीं कराया गया है। इसको लेकर इंटक के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह के द्वारा राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष के यहां पत्र भेज कर कटान पीड़ितों को आवंटित पट्टे की जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए जिलाधिकारी व उप जिलाधिकारी निर्देशित करने की मांग की है। बता दें कि 2011 से 2017 तक के बीच घाघरा नदी की कटान से श्रीकांत पुर, नारायनागढ़, इब्राहिमाबाद उपरवार, इब्राहिमाबाद नौबरार ग्राम पंचायत के 327 परिवार बेघर हो गए थे। इसके लिए बैरिया तहसील प्रशासन द्वारा ग्राम समाज की भूमि पर प्रति परिवार तीन डिसमिल के हिसाब से पट्टा आवंटित किया गया। लेकिन अभी तक कटान पीड़ित उस पर कब्जा दाखिल नहीं हो पाए। इसके चलते कटान पीड़ित आज भी बेघर हैं सार्वजनिक स्थानों पर रह कर जीवन यापन कर रहे हैं।