नगरा । क्षेत्र के डिहवा गांव से 1876 में गिरमिटिया मजदूर के रूप में मारीशस गए गए भीखा की चौथी पीढ़ी के लोग शनिवार को अपने पूर्वजों की मातृभूमि डिहवां गांव पहुंचे। इस दौरान ग्रामीणों ने उनका गाजे-बाजे व फूल मालाओं से स्वागत किया। स्वागत से अभिभूत अलबर्ट बोले ने कहा कि पूर्वजों की धरती पर लाने का श्रेय उनकी स्वास्ति को है।
उन्होंने बताया कि एक एनजीओ के सहयोग से हमें अपने परिवार के साथ यहां आने का मौका मिला। दो दिन बाद क्रिसमस का त्योहार है। लोग एक दूसरे को गिफ्ट देते है। आज गिफ्ट के रूप में आप सबने जो हमें प्यार दिया है उसे आजीवन नहीं भूल सकता। उनकी पत्नी स्वास्ति ने भोजपुरी में बोलकर गांव के लोगों का दिल जीत लिया। कहा कि यहां आकर लग रहा है कि मैं यहीं की हूं। बताया कि हमारे पूर्वज डिहवां के थे। मैं मारीशस में रहती थी। उन्होंने गिरमिटिया फाउंडेशन को यहां पहुंचाने के लिए धन्यवाद दिया। बताया कि पहली बार नवंबर 2018 व दूसरी बार मार्च 2019 में मै डिहवां आ चुकी हूं। डिहवां पहुंचे अलबर्ट, स्वास्ति, गौतम अलबर्ट व जेनी संध्या ने गरीबों में कंबल वितरित किया। ग्राम प्रधान इंदू गुप्ता, आयोजक ओम प्रकाश गुप्ता ने सभी को अंगवस्त्रम से सम्मानित किया। इस मौके पर वृजभान चौहान , मुक्तेश्वर सिंह, जगन्नाथ सिंह, राकेश सिंह, लालबाबू यादव , वीरेंद्र चौहान, नयना सिंह , मनीषा सिंह, गुड्डू सिंह , गोपाल गुप्त , पारसनाथ पांडेय आदि मौजूद रहे। अंत में अप्रवासी भारतीय दंपति ने निर्माणाधीन हनुमान मंदिर का अवलोकन किया और लिट्टी चोखा का आनंद लिया। कार्यक्रम में गिरमिटिया फाउंडेशन के चेयरमैन दिलीप गिरि भी उपस्थित रहे।