{"_id":"64e789b8ae5952221e09ef15","slug":"four-villagers-had-given-martyrdom-on-this-day-in-charonwa-ballia-news-c-190-1-svns1006-2153-2023-08-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ballia News: चरौंवा में आज के ही दिन चार ग्रामीणों ने दी थी शहादत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ballia News: चरौंवा में आज के ही दिन चार ग्रामीणों ने दी थी शहादत
विज्ञापन
भीमपुरा/बेल्थरारोड। 1942 अगस्त क्रांति का असर जिले के कोने-कोने में रहा। इस आंदोलन में चरौंवा गांव के क्रांतिकारियों ने भी शहादत दी। 25 अगस्त को इस गांव के चार लोग अंग्रेजों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। इसमें एक महिला भी थी। आज भी इन शहीदों की याद में चरौंवा में शहीद मेला का आयोजन किया जाता है।
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अंग्रेज हुक्मरानों द्वारा प्रशासक नेदर सोल और मार्क्स स्मिथ के नेतृत्व में चार टुकड़यां जल मार्ग से बलिया पहुंची। इसका एक दस्ता कैप्टन मूर की देखरेख में चरौवा पहुंचा। कैप्टन ने गांव के रामलखन सिंह के यहां चौकीदार भेजकर क्रांतिकारियों को अंग्रेजों को सौंपने का संदेश भेजा। सरपंच के यहां पहुंच कर चौकीदार ने कैप्टन मूर का संदेश कहना शुरू किया था। इसी बीच सरपंच ने ऐसा करारा तमाचा जड़ा की चौकीदार का कान फट गया और खून निकलने लगा।
इसके बाद अंग्रेजी फौज ने पूरे गांव को घेरकर दमन करना शुरू कर दिया। इस बीच एक ग्रामीण क्रांतिकारी ने ललकारा कि गोरों के पास दो हाथ की मशीन है तो हमारे हाथ में छह फुट की लाठी है। यह सुनते ही ग्रामीण लाठी डंडा लेकर अंग्रेजों पर टूट पड़े। गोरों में खलबली मच गई। गांव की मकतुलिया मालिन ने कैप्टन मूर के सिर पर हांडी से हमला बोल दिया। कैप्टन मूर ने मकतुलिया को गोलियों से छलनी कर लाश घाघरा नदी में फेंकवा दिया। इसके बाद अंग्रेजों ने गांववालों पर गोलियां चलानी शुरू कर दी। कई स्थानों पर ग्रामीणों ने अंग्रेजों से मोर्चा लिया। क्रांतिकारियों और अंग्रेजों के बीच हुए संघर्ष में ग्रामीणों ने अंग्रेजों को जख्मी कर दिया। इसमें खर बियार, मंगला सिंह, शिवशंकर सिंह शहीद हो गए।
विज्ञापन
इस तरह चरौंवा गांव में चार क्रांतिकारी शहीद हो गए। गांव के कन्हैया सिंह, राधा किशुन सिंह, दशरथ सिंह, कपिल देव सिंह, बृजबिहारी सिंह, मृगराज सिंह, शंभू सिंह, श्रीराम तिवारी, कमला स्वर्णकार और हरिप्रसाद स्वर्णकार ने अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी, जिन्हें अंग्रेजों ने जेल में बंद कर दिया।
आजाद हिंद ट्रेन आने के बाद फूटी क्रांति की ज्वाला
भीमपुरा। चरौंवा गांव की घटना से 10 दिन पहले 14 अगस्त को इलाहाबाद से छात्र-छात्राओं की आजाद हिंद ट्रेन बेल्थरारोड आई। ट्रेन से आए क्रांतिकारी युवक-युवतियों ने बेल्थरारोड वासियों में जोश भर दिया। इससे क्रांति की ज्वाला फूट पड़ी।
आक्रोशित क्रांतिकारियों ने रेलवे स्टेशन और माल गोदाम फूंक डाले। बिजली और टेलीफोन का तार काटकर पूरी सरकारी व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया था। रेलवे लाइन उखाड़ते समय डीएवी इंटर कॉलेज के अध्यापक चंद्रदीप सिंह शहीद हो गए। शहीदों की स्मृति में 25 अगस्त को शहीद मेला और बलिदान दिवस का आयोजन किया जाता है, जहां लोग उन्हें याद करते हैं।
विज्ञापन
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अंग्रेज हुक्मरानों द्वारा प्रशासक नेदर सोल और मार्क्स स्मिथ के नेतृत्व में चार टुकड़यां जल मार्ग से बलिया पहुंची। इसका एक दस्ता कैप्टन मूर की देखरेख में चरौवा पहुंचा। कैप्टन ने गांव के रामलखन सिंह के यहां चौकीदार भेजकर क्रांतिकारियों को अंग्रेजों को सौंपने का संदेश भेजा। सरपंच के यहां पहुंच कर चौकीदार ने कैप्टन मूर का संदेश कहना शुरू किया था। इसी बीच सरपंच ने ऐसा करारा तमाचा जड़ा की चौकीदार का कान फट गया और खून निकलने लगा।
विज्ञापन
इसके बाद अंग्रेजी फौज ने पूरे गांव को घेरकर दमन करना शुरू कर दिया। इस बीच एक ग्रामीण क्रांतिकारी ने ललकारा कि गोरों के पास दो हाथ की मशीन है तो हमारे हाथ में छह फुट की लाठी है। यह सुनते ही ग्रामीण लाठी डंडा लेकर अंग्रेजों पर टूट पड़े। गोरों में खलबली मच गई। गांव की मकतुलिया मालिन ने कैप्टन मूर के सिर पर हांडी से हमला बोल दिया। कैप्टन मूर ने मकतुलिया को गोलियों से छलनी कर लाश घाघरा नदी में फेंकवा दिया। इसके बाद अंग्रेजों ने गांववालों पर गोलियां चलानी शुरू कर दी। कई स्थानों पर ग्रामीणों ने अंग्रेजों से मोर्चा लिया। क्रांतिकारियों और अंग्रेजों के बीच हुए संघर्ष में ग्रामीणों ने अंग्रेजों को जख्मी कर दिया। इसमें खर बियार, मंगला सिंह, शिवशंकर सिंह शहीद हो गए।
विज्ञापन
इस तरह चरौंवा गांव में चार क्रांतिकारी शहीद हो गए। गांव के कन्हैया सिंह, राधा किशुन सिंह, दशरथ सिंह, कपिल देव सिंह, बृजबिहारी सिंह, मृगराज सिंह, शंभू सिंह, श्रीराम तिवारी, कमला स्वर्णकार और हरिप्रसाद स्वर्णकार ने अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी, जिन्हें अंग्रेजों ने जेल में बंद कर दिया।
आजाद हिंद ट्रेन आने के बाद फूटी क्रांति की ज्वाला
भीमपुरा। चरौंवा गांव की घटना से 10 दिन पहले 14 अगस्त को इलाहाबाद से छात्र-छात्राओं की आजाद हिंद ट्रेन बेल्थरारोड आई। ट्रेन से आए क्रांतिकारी युवक-युवतियों ने बेल्थरारोड वासियों में जोश भर दिया। इससे क्रांति की ज्वाला फूट पड़ी।
आक्रोशित क्रांतिकारियों ने रेलवे स्टेशन और माल गोदाम फूंक डाले। बिजली और टेलीफोन का तार काटकर पूरी सरकारी व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया था। रेलवे लाइन उखाड़ते समय डीएवी इंटर कॉलेज के अध्यापक चंद्रदीप सिंह शहीद हो गए। शहीदों की स्मृति में 25 अगस्त को शहीद मेला और बलिदान दिवस का आयोजन किया जाता है, जहां लोग उन्हें याद करते हैं।