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बाढ़ से आठ गांव घिरे, चार मकान नदी में समाहित, एक की मौत
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रामगढ़। गंगा के लाल निशान पार होते ही सड़क से दक्षिण तरफ बसे आठ गांव बाढ़ के पानी से घिर कर टापू में तब्दील हो गए हैं। वहीं बैरिया थाना क्षेत्र के सुथनथही आशीष वर्मा(18) की बाढ़ के पानी में डूबने से मौत हो गई। पानी से किसानों की खड़ी फसल भी डूब गई है। पशुओं के चारे पर भी संकट खड़े हो गए हैं। चौबे छपरा के कई घरों को गंगा में अपने पेटे में समाहित कर लिया। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर 58.52 मी. दर्ज किया और साथ ही दो सेमी प्रति घंटा का बढ़ाव बना हुआ है जो मीडियम फ्लड लेवल 58.615 को पार कर सकती है। उधर, गंगा की लहरों से कटान भी तेज हो गया है।
पिछले दिनों से लगातार बढ़ते गंगा के जलस्तर से बाढ़ का पानी अब गांवों पर कहर बरपाने लगा है। सड़क से दक्षिण की ओर से बसे चौबे छपरा, लाला बगीचा, गंगापुर, सुघर छपरा, केहरपुर, मझौवा, गरया, बादिलपुर आदि गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिर गए हैं। बाढ़ से घिरे गांव के लोगों में प्रशासनिक तैयारियों को लेकर काफी आक्रोश है। गंगा की उफनती लहरों ने अवशेष बचे चौबे छपरा में भी कहर बरपाना शुरु कर दिया है। गांव के अशोक चौबे, नर्वदेश्वर चौबे, नन्द जी यादव, लल्लू यादव के मकान गंगा में समाहित हो गए। इस गांव का अब अस्तित्व मिटने के कगार पर पहुंच गया है। गांव के लोग कटान को रोकने के लिए हरे पेड़ों व बांस बल्लियों केे सहारे लहरों का वेग रोकने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन स्थिति भयानक बनी हुई है। प्रशासनिक अधिकारी भी बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा ले रहे हैं लेकिन कटान रोकने को लेकर की गई कवायद नाकाफी साबित हो रही है।
सोनरा टोला गंगापुर के कटान पीडि़तों में बुधवार की सुबह उस समय अफरातफरी मच गई जब गंगा की धार बस्ती के समीप पहुंच कर कहर बरपाने लगी। कटान पीडि़तों ने इसकी सूचना बाढ़ विभाग के अधिकारियों को दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। नाराज कटान पीडि़तएनएच 31 के रामगढ़ ढाले पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान कटान पीडि़तों ने जिला प्रसाशन व बाढ़ विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जनप्रतिनिधियों को भी जमकर कोसा। मौके पर पहुंचे सदर एसडीएम अश्वनी कुमार श्रीवास्तव ने बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता को तत्काल कटान रोकने का निर्देश दिया तब जाकर कटान पीडि़त शांत हुए।
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बताते चलें कि सोनरा टोला गंगापुर के कटान पीडि़त जवाहर सोनी, लालबाबू सोनी, रिंकू गुप्ता, वीरेंद्र गुप्ता, चनुलाल गुप्ता, विजय सोनी, दूधनाथ गुप्ता, बाबूराम गुप्ता आदि लोगो ने अपने गांवों को गंगा की गोद में जाने से बचाने के लिए जिलाधिकारी से लेकर सांसद, मंत्री तक का दरवाजा खटखटाया। लेकिन सबका आश्वासन कोरा साबित हुआ। इस बीच बुधवार को अचानक गंगा की विकराल धारा जमीनों को निगलते हुए बस्ती के पास पहुंच गयी तो कटान पीडि़तों में अफरा तफरी मच गई। मौके पहुंचे सदर एसडीएम ने बताया कि बाढ़ विभाग के अधिकारियों को तत्काल मौके पर जाकर हर हाल में कटान को रोकने का निर्देश दिया गया है। बताया कि यह लोगों से अपील किया गया है कि वह अपने परिवार व सामानों को सुरक्षित ठौर पर पंहुचा दें। बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता बीपी सिंह ने बताया कि यहां बंबूक्रेट विधि से कटान रोकने का कार्य करने निर्देश दिया गया है। बताया कि तत्कालीन व्यवस्था में यही विधि कारगर साबित होती है।
बैरिया थाना क्षेत्र के शुभनथही गांव निवासी आशीष वर्मा (18) पुत्र उमेश वर्मा की बुधवार को बीएसटी बंधा के बाहर गांव के सामने ही गंगा के बाढ़ के पानी में डूबने से मौत हो गई। ग्रामीणों ने काफी मसक्कत के बाद मृतक का शव गंगा के बाढ़ के पानी से निकाला।
ग्रामीणों ने बताया कि आशीष पशु चारा काटने के लिए बाढ़ का पानी पार कर खेत में जा रहा था कि वह डूब गया। घटना की जानकारी होते ही परिजनों में कोहराम मच गया। ग्रामीणों ने घंटों प्रयास के बाद आशीष को बाढ़ के पानी से निकाला और सोनबरसा अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची बैरिया पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पपोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
गंगा की तेज धारा से मंगलवार को क्षेत्र के शिवपुर घाट के पास बहुआरा व टीका सेमरिया मौजे की करीब 10 बीघे कृषि योग्य भूमि गंगा में समाहित हो गई। बता दें कि हर साल गंगा की कटान का दंश क्षेत्र के विभिन्न गांवों के किसान झेलते हैं। बीते एक दशक में क्षेत्र के मुरारपट्टी, टीका सेमरिया, बहुआरा, श्रीपालपुर आदि गांवों के सैकड़ों एकड़ भूमि गंगा में समाहित हो चुका है और इसके लिए सरकार द्वारा किसी प्रकार का मुआवजा भी नहीं दिया गया है। मुरार पट्टी के किसान जय नारायण तिवारी, बहुआरा के लक्ष्मण तिवारी, श्रीपालपुर गांव के ब्रह्मानंद यादव आदि ने बताया कि इन क्षेत्रों में कटान से किसान बर्बाद होते जा रहे हैं।
सिकंदरपुर। क्षेत्र में घाघरा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के साथ विभिन्न दियारों में तेज कटान भी शुरू हो गया है। उपजाऊ भूमि प्रत्येक दिन कट-कट कर नदी में विलीन होती जा रही है। सर्वाधिक तेज कटान क्षेत्र के दियारा खरीद एवं सीसोटार के मगही में हो रही है। जहां नदी उपजाऊं भूमि को पल पल काटती हुई क्रमश: दक्षिण की ओर बढ़ती जा रही है। जिससे दियारे के किसान चिंतित हो उठे हैं। अब तक करीब 15 बीघा उपजाऊ जमीन घाघरा अपने आगोश में ले चुकी है। उधर, जलस्तर में वृद्धि के चलते नदी के सभी पुराने छाड़नों में बाढ़ का पानी भरता जा रहा है। जिससे दियारे में आवागमन में कठिनाई हो रही है।
मालूूम हो कि घाघरा के पानी की चपेट में दियारा खरीद स्थित साधु बाबा की कुटी कटान की चपेट में आ गया है। आलम यह है कि कुटी का आधा भाग कटकर नदी में विलीन हो चुका है। नदी का पानी शेखपुर कांटा और खरीद गांव से मात्र डेढ़ किमी दूर बह रही है। कटान की जो स्थिति है अगर यही रहा तो कुटी का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। करीब एक दशक में अब तक घाघरा नदी से करीब हजारों बीघा उपजाऊ भूमि नदी में समाहित कर चुकी है। कटान से दर्जनों किसान भूमिहीन हो चुके है।
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पिछले दिनों से लगातार बढ़ते गंगा के जलस्तर से बाढ़ का पानी अब गांवों पर कहर बरपाने लगा है। सड़क से दक्षिण की ओर से बसे चौबे छपरा, लाला बगीचा, गंगापुर, सुघर छपरा, केहरपुर, मझौवा, गरया, बादिलपुर आदि गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिर गए हैं। बाढ़ से घिरे गांव के लोगों में प्रशासनिक तैयारियों को लेकर काफी आक्रोश है। गंगा की उफनती लहरों ने अवशेष बचे चौबे छपरा में भी कहर बरपाना शुरु कर दिया है। गांव के अशोक चौबे, नर्वदेश्वर चौबे, नन्द जी यादव, लल्लू यादव के मकान गंगा में समाहित हो गए। इस गांव का अब अस्तित्व मिटने के कगार पर पहुंच गया है। गांव के लोग कटान को रोकने के लिए हरे पेड़ों व बांस बल्लियों केे सहारे लहरों का वेग रोकने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन स्थिति भयानक बनी हुई है। प्रशासनिक अधिकारी भी बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा ले रहे हैं लेकिन कटान रोकने को लेकर की गई कवायद नाकाफी साबित हो रही है।
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सोनरा टोला गंगापुर के कटान पीडि़तों में बुधवार की सुबह उस समय अफरातफरी मच गई जब गंगा की धार बस्ती के समीप पहुंच कर कहर बरपाने लगी। कटान पीडि़तों ने इसकी सूचना बाढ़ विभाग के अधिकारियों को दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। नाराज कटान पीडि़तएनएच 31 के रामगढ़ ढाले पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान कटान पीडि़तों ने जिला प्रसाशन व बाढ़ विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जनप्रतिनिधियों को भी जमकर कोसा। मौके पर पहुंचे सदर एसडीएम अश्वनी कुमार श्रीवास्तव ने बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता को तत्काल कटान रोकने का निर्देश दिया तब जाकर कटान पीडि़त शांत हुए।
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बताते चलें कि सोनरा टोला गंगापुर के कटान पीडि़त जवाहर सोनी, लालबाबू सोनी, रिंकू गुप्ता, वीरेंद्र गुप्ता, चनुलाल गुप्ता, विजय सोनी, दूधनाथ गुप्ता, बाबूराम गुप्ता आदि लोगो ने अपने गांवों को गंगा की गोद में जाने से बचाने के लिए जिलाधिकारी से लेकर सांसद, मंत्री तक का दरवाजा खटखटाया। लेकिन सबका आश्वासन कोरा साबित हुआ। इस बीच बुधवार को अचानक गंगा की विकराल धारा जमीनों को निगलते हुए बस्ती के पास पहुंच गयी तो कटान पीडि़तों में अफरा तफरी मच गई। मौके पहुंचे सदर एसडीएम ने बताया कि बाढ़ विभाग के अधिकारियों को तत्काल मौके पर जाकर हर हाल में कटान को रोकने का निर्देश दिया गया है। बताया कि यह लोगों से अपील किया गया है कि वह अपने परिवार व सामानों को सुरक्षित ठौर पर पंहुचा दें। बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता बीपी सिंह ने बताया कि यहां बंबूक्रेट विधि से कटान रोकने का कार्य करने निर्देश दिया गया है। बताया कि तत्कालीन व्यवस्था में यही विधि कारगर साबित होती है।
बैरिया थाना क्षेत्र के शुभनथही गांव निवासी आशीष वर्मा (18) पुत्र उमेश वर्मा की बुधवार को बीएसटी बंधा के बाहर गांव के सामने ही गंगा के बाढ़ के पानी में डूबने से मौत हो गई। ग्रामीणों ने काफी मसक्कत के बाद मृतक का शव गंगा के बाढ़ के पानी से निकाला।
ग्रामीणों ने बताया कि आशीष पशु चारा काटने के लिए बाढ़ का पानी पार कर खेत में जा रहा था कि वह डूब गया। घटना की जानकारी होते ही परिजनों में कोहराम मच गया। ग्रामीणों ने घंटों प्रयास के बाद आशीष को बाढ़ के पानी से निकाला और सोनबरसा अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची बैरिया पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पपोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
गंगा की तेज धारा से मंगलवार को क्षेत्र के शिवपुर घाट के पास बहुआरा व टीका सेमरिया मौजे की करीब 10 बीघे कृषि योग्य भूमि गंगा में समाहित हो गई। बता दें कि हर साल गंगा की कटान का दंश क्षेत्र के विभिन्न गांवों के किसान झेलते हैं। बीते एक दशक में क्षेत्र के मुरारपट्टी, टीका सेमरिया, बहुआरा, श्रीपालपुर आदि गांवों के सैकड़ों एकड़ भूमि गंगा में समाहित हो चुका है और इसके लिए सरकार द्वारा किसी प्रकार का मुआवजा भी नहीं दिया गया है। मुरार पट्टी के किसान जय नारायण तिवारी, बहुआरा के लक्ष्मण तिवारी, श्रीपालपुर गांव के ब्रह्मानंद यादव आदि ने बताया कि इन क्षेत्रों में कटान से किसान बर्बाद होते जा रहे हैं।
सिकंदरपुर। क्षेत्र में घाघरा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के साथ विभिन्न दियारों में तेज कटान भी शुरू हो गया है। उपजाऊ भूमि प्रत्येक दिन कट-कट कर नदी में विलीन होती जा रही है। सर्वाधिक तेज कटान क्षेत्र के दियारा खरीद एवं सीसोटार के मगही में हो रही है। जहां नदी उपजाऊं भूमि को पल पल काटती हुई क्रमश: दक्षिण की ओर बढ़ती जा रही है। जिससे दियारे के किसान चिंतित हो उठे हैं। अब तक करीब 15 बीघा उपजाऊ जमीन घाघरा अपने आगोश में ले चुकी है। उधर, जलस्तर में वृद्धि के चलते नदी के सभी पुराने छाड़नों में बाढ़ का पानी भरता जा रहा है। जिससे दियारे में आवागमन में कठिनाई हो रही है।
मालूूम हो कि घाघरा के पानी की चपेट में दियारा खरीद स्थित साधु बाबा की कुटी कटान की चपेट में आ गया है। आलम यह है कि कुटी का आधा भाग कटकर नदी में विलीन हो चुका है। नदी का पानी शेखपुर कांटा और खरीद गांव से मात्र डेढ़ किमी दूर बह रही है। कटान की जो स्थिति है अगर यही रहा तो कुटी का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। करीब एक दशक में अब तक घाघरा नदी से करीब हजारों बीघा उपजाऊ भूमि नदी में समाहित कर चुकी है। कटान से दर्जनों किसान भूमिहीन हो चुके है।