{"_id":"5defd29a8ebc3e87a8205468","slug":"five-warmer-machines-of-sncu-unit-deteriorated-for-six-months-ballia-news-vns4990983168","type":"story","status":"publish","title_hn":"नवजातों के जीवन रक्षक एसएनसीयू पांच खराब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नवजातों के जीवन रक्षक एसएनसीयू पांच खराब
विज्ञापन
जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू के वार्मर में नवजात।
- फोटो : BALLIA
बलिया। जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू यूनिट की 12 में से पांच वार्मर मशीनें छह माह से खराब है। इसकी वजह से एक वार्मर मशीन में मानक के अधिक शिशु रखे जा रहे हैं। यही नहीं आक्सीजन की दो पाइप लाइनें भी खराब हैं। इसकी वजह से नवजातों के इलाज में काफी दिक्कतें आ रही हैं। ऐसे में गंभीर रूप से बीमार नवजातों को निजी अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ रहा है।
जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू यूनिट में 12 वार्मर उपकरण मशीन लगाई गई है। इनमें से करीब पांच उपकरण छह माह से खराब चल रहे हैं। इस बीच खराब उपकरणों का मरम्मत कार्य भी कराया गया लेकिन चंद दिनों के बाद ही उपकरण पुन: अपनी पूर्व की स्थिति में आ गए। बार-बार मरम्मत कराने के बाद भी उपकरण छह माह बाद भी सही हालत में नहीं आये। जिससे एक वार्मर में मानक से अधिक नवजातों को रखना अस्पताल प्रशासन की मजबूरी बन गई। जबकि एक उपकरण में दो या तीन नवजातों को रखने की व्यवस्था है। एक साथ अधिक बच्चों को वार्मर में रखने से उस तरह के परिणाम की उम्मीद नहीं की जा सकती है जबकि मानक के अनुरूप रखने से होगी। ऐसे में नवजातों का उपचार प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। यही नहीं यूनिट में स्थापित आक्सीजन की दो सप्लाई लाइन भी महीनों से खराब पड़ी है जिनकी मरम्मत के लिए काफी प्रयास किया गया लेकिन आज तक मरम्मत कार्य पूरा नहीं किया जा सका। ऐसे में बच्चों का उपचार प्रभावित होना असंभव नहीं है। डाक्टरों की मानें तो शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) नवजात से लेकर एक माह तक के बच्चों के लिए वरदान साबित होता है। समय से पूर्व जन्मे, कम वजन, पीलिया आदि बीमारियों से ग्रसित नवजात शिशुओं का उपचार एसएनसीयू यूनिट में किया जाता है।
कोट
एसएनसीयू में उपकरण खराब हैं। उपकरण आपूर्तिकर्ता के इंजीनियर कई बार मरम्मत कर चुके हैं। इसके बाद भी खराबी दूर नहीं हुई। कंपनी को दस पत्र भेजे गए हैं। एक वार्मर मशीन पर मानक से अधिक बच्चों को रखना मजबूरी बन गई है। अगर बच्चों को नहीं रखा जाता है तो जनता से विवाद की आशंका बनी रहती है।- डॉ. माधुरी सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, महिला अस्पताल
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू यूनिट में 12 वार्मर उपकरण मशीन लगाई गई है। इनमें से करीब पांच उपकरण छह माह से खराब चल रहे हैं। इस बीच खराब उपकरणों का मरम्मत कार्य भी कराया गया लेकिन चंद दिनों के बाद ही उपकरण पुन: अपनी पूर्व की स्थिति में आ गए। बार-बार मरम्मत कराने के बाद भी उपकरण छह माह बाद भी सही हालत में नहीं आये। जिससे एक वार्मर में मानक से अधिक नवजातों को रखना अस्पताल प्रशासन की मजबूरी बन गई। जबकि एक उपकरण में दो या तीन नवजातों को रखने की व्यवस्था है। एक साथ अधिक बच्चों को वार्मर में रखने से उस तरह के परिणाम की उम्मीद नहीं की जा सकती है जबकि मानक के अनुरूप रखने से होगी। ऐसे में नवजातों का उपचार प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। यही नहीं यूनिट में स्थापित आक्सीजन की दो सप्लाई लाइन भी महीनों से खराब पड़ी है जिनकी मरम्मत के लिए काफी प्रयास किया गया लेकिन आज तक मरम्मत कार्य पूरा नहीं किया जा सका। ऐसे में बच्चों का उपचार प्रभावित होना असंभव नहीं है। डाक्टरों की मानें तो शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) नवजात से लेकर एक माह तक के बच्चों के लिए वरदान साबित होता है। समय से पूर्व जन्मे, कम वजन, पीलिया आदि बीमारियों से ग्रसित नवजात शिशुओं का उपचार एसएनसीयू यूनिट में किया जाता है।
विज्ञापन
कोट
एसएनसीयू में उपकरण खराब हैं। उपकरण आपूर्तिकर्ता के इंजीनियर कई बार मरम्मत कर चुके हैं। इसके बाद भी खराबी दूर नहीं हुई। कंपनी को दस पत्र भेजे गए हैं। एक वार्मर मशीन पर मानक से अधिक बच्चों को रखना मजबूरी बन गई है। अगर बच्चों को नहीं रखा जाता है तो जनता से विवाद की आशंका बनी रहती है।- डॉ. माधुरी सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, महिला अस्पताल
विज्ञापन