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Ballia News: बेल्थरारोड के तत्कालीन चकबंदी सीओ समेत छह के खिलाफ प्राथमिकी
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बलिया। बेल्थरारोड तहसील में 2019 में तैनात रहे तत्कालीन चकबंदी सीओ शिवशंकर सिंह समेत 6 नामजद और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ उभांव थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह कार्रवाई बलिया एससी-एसटी कोर्ट के आदेश पर की गई है।
मामले में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिनियम समेत कुल 22 धाराएं लगाई गई हैं। एफआईआर में तत्कालीन चकबंदी सीओ शिवशंकर सिंह, संदीप मिश्र, संपूर्णानंद मिश्र, परमानंद मिश्र, प्रवीण मिश्र, बच्ची देवी तथा दो अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। शिवशंकर सिंह वर्तमान में चौरीचौरा गोरखपुर में तैनात हैं। चंदाडीह निवासी विनोद कुमार ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2019 में अपनी पत्नी के नाम खेती योग्य भूमि खरीदी थी। बैनामा के बाद दाखिल-खारिज भी हो गया और वह खेती कर रहे थे।
इसी दौरान गांव में चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई, जिसके बाद विपक्षियों ने जमीन को लेकर विवाद खड़ा कर दिया। विपक्षी भूमि विक्रेता ने ही उनका पंपिंग सेट बंद कर दिया। पीड़ित ने आरोप लगाया कि चकबंदी विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों ने विपक्षियों का साथ देते हुए जमीन को खेती योग्य होने के बावजूद गड्ढा दर्शाते हुए गलत रिपोर्ट लगा दी। इसके बाद विपक्षी ने दबंगई कर उन्हें खेत से बेदखल कर दिया।
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विनोद कुमार का कहना है कि उन्होंने महीनों तक चकबंदी विभाग और थाना पुलिस के चक्कर लगाए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार उन्होंने न्यायालय की शरण ली, जहां से आदेश मिलने के बाद उभांव थाना में प्राथमिकी दर्ज की।
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मामले में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिनियम समेत कुल 22 धाराएं लगाई गई हैं। एफआईआर में तत्कालीन चकबंदी सीओ शिवशंकर सिंह, संदीप मिश्र, संपूर्णानंद मिश्र, परमानंद मिश्र, प्रवीण मिश्र, बच्ची देवी तथा दो अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। शिवशंकर सिंह वर्तमान में चौरीचौरा गोरखपुर में तैनात हैं। चंदाडीह निवासी विनोद कुमार ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2019 में अपनी पत्नी के नाम खेती योग्य भूमि खरीदी थी। बैनामा के बाद दाखिल-खारिज भी हो गया और वह खेती कर रहे थे।
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इसी दौरान गांव में चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई, जिसके बाद विपक्षियों ने जमीन को लेकर विवाद खड़ा कर दिया। विपक्षी भूमि विक्रेता ने ही उनका पंपिंग सेट बंद कर दिया। पीड़ित ने आरोप लगाया कि चकबंदी विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों ने विपक्षियों का साथ देते हुए जमीन को खेती योग्य होने के बावजूद गड्ढा दर्शाते हुए गलत रिपोर्ट लगा दी। इसके बाद विपक्षी ने दबंगई कर उन्हें खेत से बेदखल कर दिया।
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विनोद कुमार का कहना है कि उन्होंने महीनों तक चकबंदी विभाग और थाना पुलिस के चक्कर लगाए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार उन्होंने न्यायालय की शरण ली, जहां से आदेश मिलने के बाद उभांव थाना में प्राथमिकी दर्ज की।