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नदी की धारा मोड़ने को लेकर किसानों ने खोला मोर्चा, मुआवजे की मांग
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रामगढ़। सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए क्षेत्र के काश्तकारों ने रामगढ़ में एक बैठक आयोजित की। इसमें काश्तकारों ने निर्णय लिया कि बैराज खंड वाराणसी द्वारा बिना काश्तकारों को नोटिस दिए उनके जमीन से नदी की धारा को मोड़ने की जो योजना बनाई जा रही है वह तब तक धरातल पर मूर्त रूप नहीं ले पाएगी जब तक की किसानों को जमीन के बदले जमीन या मानक के अनुरूप उन्हें मुआवजा न मिल जाए।
किसानों ने कहा कि हमारे खेतों में जाकर बैराज खंड की टीम ने बिना हमें सूचना दिए आखिरकार झंडी कैसे लगा दी। काश्तकारों ने मुख्यमंत्री से लेकर बाढ़ विभाग के प्रमुख सचिव व जिलाधिकारी पत्र भेजकर मुआवजे की मांग की है। साथ ही यह चेताया है कि जब तक हम किसानों को मुआवजा नहीं मिल जाता तब तक हम किसी भी कीमत पर अपनी जमीन से नदी की धारा को नहीं मोड़ने देंगे। इस मौके पर रामजी मिश्रा, प्रेम प्रकाश मिश्रा, नरेंद्र बिहारी श्रीवास्तव, गुप्तेश्वर मिश्रा, भृगुनाथ मिश्रा, सुरेश मिश्रा, दिवाकर मिश्र, कमलाकर, संतोष मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा आदि रहे।
मुआवजे को नहीं है कोई प्रावधान:एसडीओ
रामगढ़। बैराज खंड वाराणसी के एसडीओ जीएन शुक्ला ने बताया कि मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है। हां इतना जरूर है कि ऐसा ही ड्रेजिंग का कार्य गोरखपुर में राप्ती नदी के किनारे कराया गया था तो किसानों को जमीन के बदले जमीन उपलब्ध कराया गया था। किसानों का कहना है कि जब गोरखपुर में किसानों को जमीन के बदले जमीन उपलब्ध कराया गया तो बलिया में काश्तकारों को जमीन के बदले जमीन क्यों नहीं उपलब्ध कराया जाएगा। इस पर शासन को निर्णय लेना है।
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किसानों ने कहा कि हमारे खेतों में जाकर बैराज खंड की टीम ने बिना हमें सूचना दिए आखिरकार झंडी कैसे लगा दी। काश्तकारों ने मुख्यमंत्री से लेकर बाढ़ विभाग के प्रमुख सचिव व जिलाधिकारी पत्र भेजकर मुआवजे की मांग की है। साथ ही यह चेताया है कि जब तक हम किसानों को मुआवजा नहीं मिल जाता तब तक हम किसी भी कीमत पर अपनी जमीन से नदी की धारा को नहीं मोड़ने देंगे। इस मौके पर रामजी मिश्रा, प्रेम प्रकाश मिश्रा, नरेंद्र बिहारी श्रीवास्तव, गुप्तेश्वर मिश्रा, भृगुनाथ मिश्रा, सुरेश मिश्रा, दिवाकर मिश्र, कमलाकर, संतोष मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा आदि रहे।
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मुआवजे को नहीं है कोई प्रावधान:एसडीओ
रामगढ़। बैराज खंड वाराणसी के एसडीओ जीएन शुक्ला ने बताया कि मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है। हां इतना जरूर है कि ऐसा ही ड्रेजिंग का कार्य गोरखपुर में राप्ती नदी के किनारे कराया गया था तो किसानों को जमीन के बदले जमीन उपलब्ध कराया गया था। किसानों का कहना है कि जब गोरखपुर में किसानों को जमीन के बदले जमीन उपलब्ध कराया गया तो बलिया में काश्तकारों को जमीन के बदले जमीन क्यों नहीं उपलब्ध कराया जाएगा। इस पर शासन को निर्णय लेना है।
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