कृषि कानून वापसी पर किसानों ने मनाया जश्न: बलिया में किसान नेताओं ने एमएसपी की गारंटी को लेकर उठाई आवाज
बलिया में भारतीय किसान यूनियन के नेता ओमप्रकाश गुप्त ने केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानून वापस लेने पर खुशी का इजहार करते हुए कहा कि यह देश के अन्नदाताओं की जीत है।
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केंद्र सरकार की ओर से तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा पर किसानों में खुशी है। यूपी के बलिया में इसे लेकर अलग-अलग दलों और किसान नेताओं ने प्रतिक्रिया भी दी है। किसान फ्रंट के तहसील अध्यक्ष दिलीप सिंह लौहवंशी ने कहा कि किसान कानून तो जरूरी है लेकिन कानून किसानों के हित में हो। किसानों का सारा अनाज खरीदने की गारंटी होना चाहिए।
भारतीय किसान यूनियन के नेता ओमप्रकाश गुप्त ने केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानून वापस लेने पर खुशी का इजहार करते हुए कहा कि यह देश के अन्नदाताओं की जीत है। उन्होंने कहा कि न्याय की लड़ाई जीत जाने से देश के किसानों के गौरव में वृद्धि होने के साथ ही उनमें आत्मविश्वास पैदा हुआ है।
सत्य और न्याय की हुई जीत
उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन ने खेती को पूंजीपतियों के हाथों में जाने से बचा लिया। हालांकि सरकार ने कई बार ताल-तिकड़म के जरिए किसान आंदोलन को दबाने की कोशिश की, लेकिन आखिर में सत्य व न्याय की ही जीत हुई है। कृषि बिल वापस लेने व किसानों की जीत से साबित हो गया है कि कोई भी सरकार किसानों के हितों से खिलवाड़ करने का दुस्साहस नहीं कर सकती।
भाकपा नेता ओमप्रकाश कुमार मुन्नू ने कहा कि कृषि कानून वापस लिए जाने पर सरकार को बधाई। लेकिन सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देनी होगी। समाजवादी चिंतक ब्रह्मेश्वरनाथ पांडेय ने कहा कि कृषि कानून चूंकि संसद द्वारा पास किया गया है। लिहाजा यह संसद के द्वारा ही रद्द किया जाना चाहिए। तभी इस कानून के रद्द किए जाने की गारंटी हो सकती है।
सपा नेता बोले- कृषि कानून किसानों का डेथ वारंट था
पहले लिया होता कानून वापस तो किसानों की नहीं होती शहादत
पीएम द्वारा तीन कृषि कानूनों वापस लिए जाने के फैसले पर क्षेत्र के भीटा भुआरी गांव के निवासी किसान नेता विनोद मानव ने किसानों, मजदूरों, गरीबों व मेहनतकश लोगों की जीत करार दिया। कहा कि सरकार को इस कानून को और पहले वापस ले लेना चाहिए था, आंदोलन में सैकडों किसानों की शहादत नहीं होती। आगामी समय में कई राज्यों में होने वाले विधानसभा के चुनाव के मद्देनजर सरकार ने किसान आंदोलन के दबाव में आकर कानून को वापस लिया है।
किसानों को अपने हितों के लिए होना पड़ेगा संगठित
प्रगतिशील भोजपुरी समाज के केंद्रीय संगठन सचिव रविंद्र यादव नेकहा कि प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान से लगभग एक साल से चल रहा किसान आंदोलन अपने विजय के पड़ाव पर पहुंच गया। किसानों को अपने हितों की रक्षा, कृषि उपज का सही मूल्य और समृद्धि आदि के लिए और अधिक जागरूक और संगठित होना होगा। ॉॉ
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार 2019 की तुलना में वर्ष 2020 में किसानों के आत्महत्या दर में 18 फीसदी की वृद्धि हुई और 10667 किसानों ने आत्महत्या की। किसान गणेश यादव ने कहा कि हम किसान महंगे दामों में खाद-बीज खरीद करके खेत बोते हैं जब फसल काटने का समय होता है तो सरकारी क्रय केंद्रों पर हमें चक्कर लगाना पड़ता है। किसान राजकुमार प्रसाद ने बताया कि गेहूं बेचने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के बाद तहसील स्तर पर सत्यापन होता है लेकिन हालात यह है कि सत्यापन के बावजूद भी गेहूं खरीद नहीं हो पाता है।