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Ballia News: 26 दिन बाद भी 15 फीसदी काम नहीं, ग्रामीणों में नाराजगी
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नौरंगा गांव में चल रहे कटानरोधी कार्य में धीमी गति व मानक की अनदेखी के विरोध में जिलाधिकारी को
मझौवां। गंगा की कटान से तटवर्ती गांवों को बचाने के लिए क्षेत्र में चल रही तीन प्रमुख कटानरोधी परियोजनाओं की प्रगति धीमी है। 26 दिनों से चल रहे बचाव कार्यों में अभी तक 15 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हो सका है।
दूबे छपरा, नौरंगा भुआल और चक्की नौरंगा में लगभग 45 करोड़ रुपये की लागत से कटानरोधी कार्य कराए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजनाओं की गति बेहद धीमी है और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की जा रही है। दूबे छपरा में 9.98 करोड़ रुपये से 350 मीटर क्षेत्र में बोल्डर लांचिंग, स्लोप पीचिंग और एप्रन निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना जाली के ही बालू भरी बोरियां रखी जा रही हैं। नौरंगा भुआल में लगभग ढाई किलोमीटर लंबी परियोजना पर 24.97 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन मात्र नौ मजदूरों के सहारे काम चल रहा है। वहीं चक्की नौरंगा में 9.98 करोड़ रुपये की लागत वाली 300 मीटर परियोजना सात मजदूरों और दो पोकलेन मशीनों के भरोसे संचालित हो रही है। ग्रामीण अभिनंदन ठाकुर का कहना है कि मजदूर सुबह आते हैं और कुछ ही घंटों में लौट जाते हैं।
बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्र ने बताया कि नौरंगा भुआल परियोजना में करीब ढाई किलोमीटर क्षेत्र में बचाव कार्य चल रहा है। मौके पर 10 पोकलेन मशीनें कार्यरत हैं तथा दो अतिरिक्त मशीनें भी मंगाई गई हैं। तीनों परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि कटानरोधी कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता को लेकर जिलाधिकारी से विस्तृत चर्चा हुई है। यदि दूबे छपरा परियोजना में मानकों की अनदेखी या लापरवाही पाई गई तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए भुगतान तत्काल रोक दिया जाएगा।
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दूबे छपरा, नौरंगा भुआल और चक्की नौरंगा में लगभग 45 करोड़ रुपये की लागत से कटानरोधी कार्य कराए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजनाओं की गति बेहद धीमी है और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की जा रही है। दूबे छपरा में 9.98 करोड़ रुपये से 350 मीटर क्षेत्र में बोल्डर लांचिंग, स्लोप पीचिंग और एप्रन निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना जाली के ही बालू भरी बोरियां रखी जा रही हैं। नौरंगा भुआल में लगभग ढाई किलोमीटर लंबी परियोजना पर 24.97 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन मात्र नौ मजदूरों के सहारे काम चल रहा है। वहीं चक्की नौरंगा में 9.98 करोड़ रुपये की लागत वाली 300 मीटर परियोजना सात मजदूरों और दो पोकलेन मशीनों के भरोसे संचालित हो रही है। ग्रामीण अभिनंदन ठाकुर का कहना है कि मजदूर सुबह आते हैं और कुछ ही घंटों में लौट जाते हैं।
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बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्र ने बताया कि नौरंगा भुआल परियोजना में करीब ढाई किलोमीटर क्षेत्र में बचाव कार्य चल रहा है। मौके पर 10 पोकलेन मशीनें कार्यरत हैं तथा दो अतिरिक्त मशीनें भी मंगाई गई हैं। तीनों परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि कटानरोधी कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता को लेकर जिलाधिकारी से विस्तृत चर्चा हुई है। यदि दूबे छपरा परियोजना में मानकों की अनदेखी या लापरवाही पाई गई तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए भुगतान तत्काल रोक दिया जाएगा।
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