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Ballia News: गंगा की उतरती लहरों से कटान तेज, 12 बीघा जमीन नदी में समाई

Fri, 15 Aug 2025 12:22 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 15 Aug 2025 12:22 AM IST
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Erosion increased due to the descending waves of Ganga, 12 bighas of land submerged in the river
हुकुम छपरा डेंजर प्वाइंट पर दबाव बनाती गंगा नदी की उतरती लहरें।संवादहुकुम छपरा डेंजर प्वाइंट पर - फोटो : संवाद
मझौवां। गंगा की उतरती लहरें तबाही मचाने लगी हैं। एक सेमी प्रतिघंटे जलस्तर घट रहा है। इसके बाद भी नदी खतरे के निशान से ऊपर है। बृहस्पतिवार को कटान तेज होने से गंगा उस पार चक्की नौरंगा में लगभग 12 बीघा जमीन कटान की भेंट चढ़ गई।
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बाढ़ का पानी अब बस्तियों से तो लौट चुका है, लेकिन इलाके में लोगों की परेशानियां अब भी कम नहीं हुई हैं। खेती-बाड़ी में भारी नुकसान के कारण किसानों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। स्कूल और कालेजों में भी बाढ़ के कारण कई दिनों तक पठन-पाठन ठप है। पानी निकलने के बाद सफाई का कार्य शुरू हो गया है। बाढ़ प्रभावित लोग व किसान लगातार प्रशासन से राहत कार्यों की मांग कर रहे हैं।
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केंद्रीय जल आयोग गायघाट गेज के अनुसार बृहस्पतिवार की शाम 4 बजे गंगा नदी का जलस्तर 57.750 मीटर दर्ज किया गया। एक सेमी प्रति घंटे की दर से नदी घटाव पर है। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 57.615 से 135 सेमी व वार्निंग लेवल 56.615 मीटर से 1.135 मीटर ऊपर है।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल, बीमारी फैलने की आशंका
मझौवां। भीषण बाढ़ के विभीषिका के बाद उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य और सार्वजनिक स्वच्छता की समस्या से निजात नहीं मिल रही है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवा की स्थिति खराब है। संक्रमण, जलजनित बीमारियां और सफाई की समस्याएं हैं। इन समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए उचित स्वास्थ्य और सफाई चुनौती बनी हुई है। बाढ़ के पानी में गंदगी और कीटनाशकों की मिलावट होने से जलजनित बीमारियां जैसे दस्त, हैजा, मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड, आदि के फैलने का खतरा बढ़ गया है। पानी के कारण सड़कों और घरों में गंदगी पटी है। जिससे बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ रहा है। सफाई कर्मचारियों की कमी, अव्यवस्थित जल निकासी व्यवस्था और बुनियादी ढांचे की कमी इस समय एक बड़ी चुनौती बन गई है। स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था चरमरा गई है। सरकारी सिस्टम लाचार साबित हो रहा है। बाढ़ के एकत्रित पानी में मच्छरों का प्रजनन तेजी से हो रहा है, जिससे मलेरिया और डेंगू जैसे रोगों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। गांव की गलियों और सड़कों पर फैला गंदगी को पीड़ितों ने सफई कराने का मांग की है।

दुर्गंध व मच्छरों के प्रकोप से दुश्वारी

दयाछपरा। क्षेत्र के गोपालपुर, दयाछपरा, जगदेवा गांव में बाढ़ का पानी तो निकल गया। अब दुर्गंध और मच्छरों के प्रकोप से जीना दुश्वार हो गया है। चिन्तामणि राय के टोला निवासी धनेजर सिंह, राजेन्द्र मिश्र ने बताया कि शाम ढलते ही मच्छर का प्रकोप बढ़ जाता है। बिजली रहने पर कुछ राहत मिलती है पर प्रति दिन बिजली रात के 11 बजे तक ही रहती है। साथ ही कचरों से बदबू आती रहती हैं। डाॅ. नवीन कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण सुबह-शाम धुआं करें ताकि मच्छर न आएं। ब्लीचिंग पावडर का छिड़काव कराएं। तुलसी का काढ़ा जरूर पीएं। रोग प्रतिरोधक क्षमता इससे बढ़ेगी। संवाद

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बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर राहत व बचाव कार्य चल रहा है। साथ ही जिन इलाकों से पानी नीचे उतर गया है, वहां कीटनाशकों का छिड़काव करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। -आलोक प्रताप सिंह,एसडीएम, बैरिया।
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