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एक दशक बीता नहीं जर्जर हुआ जयप्रभा सेतु
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Wed, 28 Sep 2016 08:16 PM IST
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मांझी घांट स्थित जयप्रभा सेतु का जर्जर हाल।
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यूपी-बिहार को जोडने वाला मांझीघाट स्थित जयप्रभा सेतु पर जगह-जगह गड्ढा बना गया है। जिससे लोगों को यूपी-बिहार आने-जाने वाले राहगीरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि रात के समय लोग सेतु पर गड्ढे में गिरकर चुटहिल हो जा रहे है। इससे नाराज लोगों ने तत्काल सेतु निर्माण की मांग की है।
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर एवं तत्कालीन बलिया के सांसद चंद्रशेखर ने 1977 में जनता पार्टी के सरकार के दौरान मांझी के पास यूपी-बिहार को जोडने के लिए घाघरा नदी पर पुल का शिलान्यास किया था। इस दौरान यूपी-बिहार के सरकारों के बीच तय हुआ था कि अपने-अपने हिस्से के पुल के पायों का निर्माण कराएंगे।
इसके बाद यूपी की जनता पार्टी की सरकार ने अपने हिस्से के पुल के पायों का निर्माण कर दिया। लेकिन बिहार सरकार ने मात्र दो पायों का निर्माण कर छोड़ दिया। काफी प्रयास के बाद भी 1994 तक पुल निर्माणाधीन रहा। लेकिन जब 1994-95 में गाजीपुर से हाजीपुर तक की सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित हुआ तो तत्कालीन वित्तमंत्री मनमोहन ङ्क्षसह ने इस जयप्रभा सेतु सहित इस मार्ग को बनवाने के लिए चार सौ करोड़ रुपये स्वीकृत किया था।
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इसके बाद केंद्र सरकार के अधीन पुल निर्माण का कार्य हुआ जो लगभग नौ वर्ष बाद 2003-04 में बनकर तैयार हुआ। करीब चार साल तक यह पुल उद्घाटन की बांट जोहता रहा। लेकिन जब इसका उद्घाटन नहीं हुआ तो 2007-08 में भूतल एवं परिवहन विभाग भारत सरकार द्वारा जयप्रभा सेतु को टोल बूथ लगाकर चालू कर दिया गया।
पुल को चालू हुए अभी एक दशक भी पुरा नहीं हुआ कि पुल में लगा सरिया दिखाई देना शुरू हो गया और जगह-जगह गड्ढ़े बन गया है। जिससे इस पुल पर आवागन करने वाले आए दिन गिर कर चुटहिल हो रहे हैं। इसको लेकर क्षेत्र के लोगों में नाराजगी है। उन्होंने जगह-जगह पुल पर बने गड्ढ़े को बनवाने की मांग की है।
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पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर एवं तत्कालीन बलिया के सांसद चंद्रशेखर ने 1977 में जनता पार्टी के सरकार के दौरान मांझी के पास यूपी-बिहार को जोडने के लिए घाघरा नदी पर पुल का शिलान्यास किया था। इस दौरान यूपी-बिहार के सरकारों के बीच तय हुआ था कि अपने-अपने हिस्से के पुल के पायों का निर्माण कराएंगे।
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इसके बाद यूपी की जनता पार्टी की सरकार ने अपने हिस्से के पुल के पायों का निर्माण कर दिया। लेकिन बिहार सरकार ने मात्र दो पायों का निर्माण कर छोड़ दिया। काफी प्रयास के बाद भी 1994 तक पुल निर्माणाधीन रहा। लेकिन जब 1994-95 में गाजीपुर से हाजीपुर तक की सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित हुआ तो तत्कालीन वित्तमंत्री मनमोहन ङ्क्षसह ने इस जयप्रभा सेतु सहित इस मार्ग को बनवाने के लिए चार सौ करोड़ रुपये स्वीकृत किया था।
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इसके बाद केंद्र सरकार के अधीन पुल निर्माण का कार्य हुआ जो लगभग नौ वर्ष बाद 2003-04 में बनकर तैयार हुआ। करीब चार साल तक यह पुल उद्घाटन की बांट जोहता रहा। लेकिन जब इसका उद्घाटन नहीं हुआ तो 2007-08 में भूतल एवं परिवहन विभाग भारत सरकार द्वारा जयप्रभा सेतु को टोल बूथ लगाकर चालू कर दिया गया।
पुल को चालू हुए अभी एक दशक भी पुरा नहीं हुआ कि पुल में लगा सरिया दिखाई देना शुरू हो गया और जगह-जगह गड्ढ़े बन गया है। जिससे इस पुल पर आवागन करने वाले आए दिन गिर कर चुटहिल हो रहे हैं। इसको लेकर क्षेत्र के लोगों में नाराजगी है। उन्होंने जगह-जगह पुल पर बने गड्ढ़े को बनवाने की मांग की है।