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लाल बगीचा मिटाने को आतुर

Mon, 08 Aug 2016 12:48 AM IST
balia
balia Updated Mon, 08 Aug 2016 12:48 AM IST
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Eager to erase red garden
चौबे छपरा के बगल में लाल बागीचा की ओर रुख करती गंगा की लहरें और कट रही खेती की भूमि।  - फोटो : balia
गंगा की उफनाती लहरों ने चौबेछपरा के साथ ही अब लाल बगीचे में धारों का खंजर चलाना शुरू कर दिया है। जिसके चलते चौबेछपरा के पीड़ित अपने दिलों पर हथौड़ा चला ही रहे थे कि लाला बगीचा में भी बसे लोग भी अपनी घरौंदों को उजाड़ना शुरू कर दिए हैं। शनिवार की शाम गंगा की लहरों ने चौबेछपरा में खाली पड़ी जमीन के साथ संपर्क मार्ग को अपने आगोश में ले लिया। इंद्र के कहर ने पीड़ितों को दोहरा झटका देने में कोई कोर कसर नही छोड़ रहे हैं। जिसके चलते पीड़ितों को अपने सामानों को एनएच 31 या रिश्तेदारों के यहां पहुंचाने में काफी कठिनाई हाे रही है।
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गंगा की प्रलयकारी लहरों ने रविवार को पचरूखिया से लेकर श्रीनगर तक आरारों का गिराना शुरू दिया है। लाल बगीचा में गंगा की लहरों ने दिनेश कुंवर, छोटे लाल कुंवर, शंभूनाथ कुंवर के कृषि योग्य पांच एकड़ जमीन निगल गईं। जिसके चलते लाल बगीचा स्थित मटलू पासवान, शंभूनाथ कुंवर, रघुनाथ पासवान, नागा पासवान के घर के बीच मात्र पांच मीटर की दूरी शेष रह गई है। जो कभी भी गंगा में विलीन हो सकता है। धारा की बैकरोलिंग का दबाव स्परों पर बढ़ता ही जा रहा है। केंद्रिय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर रविवार की शाम 56.60 मीटर दर्ज की गई। साथ ही प्रतिघंटा 2 सेमी का बढ़ाव बना हुआ है ।
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रामगढ़ प्रतिनिधि के अनुसार, चौबेछपरा के कटान पीड़ितों ने कहा कि एक माह से हम लोग गंगा की कहर झेल रहे हैं । लेकिन हमारे सांसद विधायक व हमारे जिले के आलाधिकारियों को फुर्सत नहीं है कि हम पीड़ितों की सुधि लें। जनप्रतिनिधियों की हालत तो यह है कि जहां कटान नहीं वहां चले जाते हैं। लेकिन जहां बेबस लाचार लोगों का घर गिर रहा है उनको देखने तक का फुर्सत किसी के पास नहीं है। पीड़ितों ने बताया कि जनप्रतिनिधि वहीं पहुंचते जहां उनका वोट बैंक तैयार हो। ऐसे में हम लोग कहां जाए यह परेश्‍ाानी आ खड़ी हुई है। अगर ऐसे में शासन प्रशासन की आेर से मदद मिल जाए तो राहत मिल सकेगी।
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