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ई-फार्मेसी का जिले के दवा व्यापारियों ने किया विरोध
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बलिया। देश भर में कोरोना काल में जंग जीतने में अपना सब कुछ न्यौछावर कर देने का जज्बा रखने वाले दवा कारोबारियों को उजाड़ने के लिए केंद्र सरकार आमदा है। कारएा कि मानक विरुद्ध पूंजीपतियों के हाथों में ई-फार्मेसी के माध्यम से रिलायंस, फिलीपकार्ट और एमजोन को सरकार छूट देकर प्रदेश के करीब डेढ़ लाख दवा व्यावसायियों और उनसे जुड़े करीब तीन करोड़ परिवारों के सामने रोजी रोटी की संकट पैदा कर रही है। यदि केंद्र सरकार इस पर तत्काल रोक नहीं लगाती है तो दवा व्यापारी न्यायालय की शरण में जाने के लिए मजबूर होगें। यह बाते बलिया केमिस्ट एण्ड ड्रगिस्ट ऐसोसियेशन के अध्यक्ष आनंद सिंह ने शुक्रवार को सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए बैठक के दौरान कही।
कहा कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों के इशारे पर पहले रोजगार के अवसर समाप्त किया और अब ई-फार्मेसी के माध्यम से दवा व्यापारियों की रोजी-रोटी को प्रभावित करने पर तुली हुई है। कहा कि देश भर में व्यापक स्तर पर ई-फार्मेसी का विरोध क्यों किया जा रहा है। यह आम लोगों को सोचना होगा। अन्यथा दवा का कारोबार भी पूंजीपतियों की मनोपली का एक मजबूत हिस्सा बनकर रह जायेगा। देश भर में आठ लाख 50 हजार दवा की दुकानों पर आश्रित 50 लाख परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न होने वाला है। कहा कि हमारे राष्ट्रीय संगठन ने अपना विरोध जताते हुए भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एण्ड फेमिली वेलफेयर के राज्यमंत्री अश्वनी कुमार चौबे को पत्र लिखकर ई- फार्मेसी और आनलाईन दवा व्यवसाय पर रोक लगाये जाने की मांग किया है। संगठन एफआईसीसीआई से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि कोरोना काल और लॉकडाउन के दौरान संक्रमित मरीजों को आनलाईन दवा की होम डिलेवरी के लिए रजिस्टर्ड दवा की दुकानों को दवा की होम डिलेवरी के लिए चिन्हित कर अनुमति दी थी। बताया कि पूंजीपतियों के दखल से दूर संचार विभाग के साथ ही अन्य सरकारी औद्योगिक प्रतिष्ठानों की हालत क्या हो गयी है। यह किसी से छिपा नहीं है। यदि केंद्र की भाजपा सरकार दवा कंपनियों और उससे जुड़े हुए लोगों के पेट पर लात मारने काम करेगी तो हम लोग भी आंदोलन का मार्ग अपनाने के लिए बाध्य होंगे। इस मौके पर मनोज श्रीवास्तव, राजेश, हिरू, बिरू, सल्टू, धीरू, राजेन्द्र राय, प्रवीण, सतीश, राजकिशोर, विनोद राय, धनन्जय गुप्ता, रमेंद्र वर्मा, मनोज, संदीप अग्रवाल, वरूण तिवारी, अनिल त्रिपाठी, संजय दूबे, हसन शाहनवाज, मुमताज अहमद आदि रहे। संचालन बब्बन यादव ने किया।
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कहा कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों के इशारे पर पहले रोजगार के अवसर समाप्त किया और अब ई-फार्मेसी के माध्यम से दवा व्यापारियों की रोजी-रोटी को प्रभावित करने पर तुली हुई है। कहा कि देश भर में व्यापक स्तर पर ई-फार्मेसी का विरोध क्यों किया जा रहा है। यह आम लोगों को सोचना होगा। अन्यथा दवा का कारोबार भी पूंजीपतियों की मनोपली का एक मजबूत हिस्सा बनकर रह जायेगा। देश भर में आठ लाख 50 हजार दवा की दुकानों पर आश्रित 50 लाख परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न होने वाला है। कहा कि हमारे राष्ट्रीय संगठन ने अपना विरोध जताते हुए भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एण्ड फेमिली वेलफेयर के राज्यमंत्री अश्वनी कुमार चौबे को पत्र लिखकर ई- फार्मेसी और आनलाईन दवा व्यवसाय पर रोक लगाये जाने की मांग किया है। संगठन एफआईसीसीआई से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि कोरोना काल और लॉकडाउन के दौरान संक्रमित मरीजों को आनलाईन दवा की होम डिलेवरी के लिए रजिस्टर्ड दवा की दुकानों को दवा की होम डिलेवरी के लिए चिन्हित कर अनुमति दी थी। बताया कि पूंजीपतियों के दखल से दूर संचार विभाग के साथ ही अन्य सरकारी औद्योगिक प्रतिष्ठानों की हालत क्या हो गयी है। यह किसी से छिपा नहीं है। यदि केंद्र की भाजपा सरकार दवा कंपनियों और उससे जुड़े हुए लोगों के पेट पर लात मारने काम करेगी तो हम लोग भी आंदोलन का मार्ग अपनाने के लिए बाध्य होंगे। इस मौके पर मनोज श्रीवास्तव, राजेश, हिरू, बिरू, सल्टू, धीरू, राजेन्द्र राय, प्रवीण, सतीश, राजकिशोर, विनोद राय, धनन्जय गुप्ता, रमेंद्र वर्मा, मनोज, संदीप अग्रवाल, वरूण तिवारी, अनिल त्रिपाठी, संजय दूबे, हसन शाहनवाज, मुमताज अहमद आदि रहे। संचालन बब्बन यादव ने किया।
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