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‘इतना न सताओ’ से दिखा महिलाओं का दर्द
ब्यूरो/अमर उजाला, बलिया
Updated Tue, 23 Feb 2016 09:55 PM IST
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नगर के साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थान के तत्वावधान में सोमवार की देरशाम टाउन हाल स्थित बापू भवन में ‘इतना न सताओ’ नाटक का मंचन किया गया।
इस दौरान नवोदित कलाकारों ने नाटक के माध्यम से रूढ़िवादी, पिछडे़ परिवारों में महिला के प्रति व्यथा, घृणा एवं उपेक्षा की कुत्सित भावना को अपने जीवंत अभिनय से भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. जनार्दन राय ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज के रंगकर्मी अपनी परंपरा को बखूबी निभा रहे हैं।
संस्था की अध्यक्ष अनीता गुप्ता ने संस्थान के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह संस्था अपने गठन के समय से ही सामाजिक कुरीतियों एवं विसंगतियों को दूर करने के लिए समाज को जागृत करने का प्रयास कर रही है।
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इस दौरान ‘इतना न सताओ’ नाटक एक प्रतिभावान लड़की धरोहर की आकांक्षाओं के दमन पर आधारित रहा। धरोहर पढ़ाई के साथ समाज में कुछ कर गुजारने की जज्बा रखती है।
लेकिन उसके माता-पिता उसकी पढ़ाई समाप्त कराकर उसकी शादी कर देते है। शादी के बाद उस पर जुल्म ढाए जा रहे है। एक दिन वह अपने पति से पढ़ाई आगे शुरू करने की बात कहती है। लेकिन पति उसे डांटकर घर के कामकाज में मन लगाने को कहता है। इसी बीच धरोहर ने एक पुत्री को जन्म देती है।
इसके बाद धरोहर के सास, श्वसुर और धरोहर के पति रात में उसे मिट्टी के गड्ढे में दफन कर देते है। उसके अगले दिन जब धरोहर अपने पुत्री की मांग करती है। उसके ससुरालीजनों ने धरोहर को मृत पुत्री की बात बताते है।
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इस दौरान नवोदित कलाकारों ने नाटक के माध्यम से रूढ़िवादी, पिछडे़ परिवारों में महिला के प्रति व्यथा, घृणा एवं उपेक्षा की कुत्सित भावना को अपने जीवंत अभिनय से भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. जनार्दन राय ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज के रंगकर्मी अपनी परंपरा को बखूबी निभा रहे हैं।
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संस्था की अध्यक्ष अनीता गुप्ता ने संस्थान के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह संस्था अपने गठन के समय से ही सामाजिक कुरीतियों एवं विसंगतियों को दूर करने के लिए समाज को जागृत करने का प्रयास कर रही है।
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इस दौरान ‘इतना न सताओ’ नाटक एक प्रतिभावान लड़की धरोहर की आकांक्षाओं के दमन पर आधारित रहा। धरोहर पढ़ाई के साथ समाज में कुछ कर गुजारने की जज्बा रखती है।
लेकिन उसके माता-पिता उसकी पढ़ाई समाप्त कराकर उसकी शादी कर देते है। शादी के बाद उस पर जुल्म ढाए जा रहे है। एक दिन वह अपने पति से पढ़ाई आगे शुरू करने की बात कहती है। लेकिन पति उसे डांटकर घर के कामकाज में मन लगाने को कहता है। इसी बीच धरोहर ने एक पुत्री को जन्म देती है।
इसके बाद धरोहर के सास, श्वसुर और धरोहर के पति रात में उसे मिट्टी के गड्ढे में दफन कर देते है। उसके अगले दिन जब धरोहर अपने पुत्री की मांग करती है। उसके ससुरालीजनों ने धरोहर को मृत पुत्री की बात बताते है।