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खराब नतीजे प्राप्त होने पर परमात्मा को दोषी ठहराना नहीं चाहिये: अपरिमेय
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बेल्थरारोड के पलिया ग्राम में श्रीमद्भागवत सेमिनार को सम्बोधित करते इस्कॉन मंदिर लखनऊ के अध्यक?
- फोटो : BALLIA
बेल्थरारोड । मनुष्य जीवन का उद्देश्य आत्म साक्षात्कार और परमेश्वर के प्रति प्रेम है। हमें पुण्य और पाप कर्म का परिणाम अच्छे और बुरे नतीजे के रूप में प्राप्त होते हैं। खराब नतीजे मिलने पर परमात्मा को दोषी ठहराना सही नहीं है बल्कि यह हमारे गलत कर्मों का परिणाम होता है। ये बातें इस्कॉन मंदिर लखनऊ के अध्यक्ष अपरिमेय श्यामदास महाराज ने पलिया गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत गीता सेमिनार के समापन पर शनिवार को कही।
उन्होंने मानव जीवन की चुनौतियों पर कहा कि सांसारिक मोह-माया में उलझ कर मनुष्य पशुवत व्यवहार कर रहा है। सत्कर्म और परमेश्वर की आराधना मनुष्य जीवन का उद्देश्य नहीं रह गया है। इसके कारण समाज में पापाचार की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने मनुष्य जीवन में सत्संग का आध्यात्मिक विवेचन करते हुए कहा कि मनुष्य को यह समझना चाहिए कि उसके सुख और दु:ख का कारण वह स्वयं है। मनुष्य को उसके किए गए पुण्य और पाप का ही परिणाम प्राप्त होता है।
उन्होंने परमात्मा की आराधना पर जोर देते हुए कहा कि जिस तरह बगैर हाथ चलाए अपने दैनिक क्रियाकलापों को नहीं किया जा सकता, उसी प्रकार परमात्मा की आराधना के बिना मनुष्य जीवन का उद्देश्य सफल नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि परमात्मा की सेवा से मनुष्य को अशांति और क्लेश से मुक्ति मिलती है। कहा कि मनुष्य को परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए। हम सांसारिक मोह-माया में फंस कर धरती पर बोझ बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य यह निश्चय कर ले कि उसे बुरे कार्य नहीं करने हैं तो कभी भी उसके साथ कुछ भी गलत नहीं हो सकता। इसका आशय यह कदापि नहीं कि किसी अताताई को उसके कुकर्मों की सजा न दी जाए। उन्होंने कहा कि हम 84 लाख योनियों में भ्रमण करते आ रहे हैं। अपरिमेय ने मांसाहार, जुआ, नशाखोरी आदि दुर्व्यसनों से बचने का आवाहन किया। इस दौरान हरे राम हरे कृष्ण महामंत्र के जाप पर श्रद्धालु भावविभोर हो थिरक उठे। कार्यक्रम के अंत में इस्कॉन मंदिर के पदाधिकारियों का सम्मान किया गया। इसके पूर्व लालबहादुर यादव ने दीप प्रज्वलित कर सेमिनार का शुभारंभ किया। इस मौके पर अनूप कुमार हेमकर, वंशबहादुर यादव, शमशेर यादव, बनारसी यादव, अभिनय कुमार, राजेश यादव आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने मानव जीवन की चुनौतियों पर कहा कि सांसारिक मोह-माया में उलझ कर मनुष्य पशुवत व्यवहार कर रहा है। सत्कर्म और परमेश्वर की आराधना मनुष्य जीवन का उद्देश्य नहीं रह गया है। इसके कारण समाज में पापाचार की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने मनुष्य जीवन में सत्संग का आध्यात्मिक विवेचन करते हुए कहा कि मनुष्य को यह समझना चाहिए कि उसके सुख और दु:ख का कारण वह स्वयं है। मनुष्य को उसके किए गए पुण्य और पाप का ही परिणाम प्राप्त होता है।
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उन्होंने परमात्मा की आराधना पर जोर देते हुए कहा कि जिस तरह बगैर हाथ चलाए अपने दैनिक क्रियाकलापों को नहीं किया जा सकता, उसी प्रकार परमात्मा की आराधना के बिना मनुष्य जीवन का उद्देश्य सफल नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि परमात्मा की सेवा से मनुष्य को अशांति और क्लेश से मुक्ति मिलती है। कहा कि मनुष्य को परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए। हम सांसारिक मोह-माया में फंस कर धरती पर बोझ बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य यह निश्चय कर ले कि उसे बुरे कार्य नहीं करने हैं तो कभी भी उसके साथ कुछ भी गलत नहीं हो सकता। इसका आशय यह कदापि नहीं कि किसी अताताई को उसके कुकर्मों की सजा न दी जाए। उन्होंने कहा कि हम 84 लाख योनियों में भ्रमण करते आ रहे हैं। अपरिमेय ने मांसाहार, जुआ, नशाखोरी आदि दुर्व्यसनों से बचने का आवाहन किया। इस दौरान हरे राम हरे कृष्ण महामंत्र के जाप पर श्रद्धालु भावविभोर हो थिरक उठे। कार्यक्रम के अंत में इस्कॉन मंदिर के पदाधिकारियों का सम्मान किया गया। इसके पूर्व लालबहादुर यादव ने दीप प्रज्वलित कर सेमिनार का शुभारंभ किया। इस मौके पर अनूप कुमार हेमकर, वंशबहादुर यादव, शमशेर यादव, बनारसी यादव, अभिनय कुमार, राजेश यादव आदि मौजूद रहे।
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