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नमी के नाम कटौती पर अंकुश नहीं
ballia
Updated Mon, 04 Dec 2017 10:29 PM IST
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dhan ke bore
- फोटो : Amar Ujala
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जिले में बनाए गए धान क्रय केंद्रों पर किसानों से अनाज की कटौती पर अंकुश नहीं लग पा रहा। गेहूं खरीद में जहां डस्ट के नाम पर कटौती की गई थी वहीं धान खरीद में नमी के नाम पर किसानों से कटौती हो रही। विपणन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से केंद्र प्रभारियों की मनमानी जारी है।
रबी के दौरान शासन के निर्देश के बावजूद जिले में गेहूं खरीद में खूब मनमानी की गई। किसानों से गेहूं खरीद के दौरान डस्ट के नाम पर मनमानी कटौती की गई। हालांकि इसको लेकर कई केंद्रों पर किसानों ने बवाल भी काटा लेकिन अधिकारियों ने इसे अनसुना कर दिया। वर्तमान मे किसानों की सुविधा के लिए अलग-अलग एजेंसियों के कुल 89 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अधिकांश क्रय केंद्र न तो समय से खुलते हैं और न ही किसानों के धान की खरीद में रुचि ही लेते हैं।
बताया जाता है कि जिला प्रशासन की ओर से विपणन विभाग को धान क्रय केंद्रों के निर्धारण की जिम्मेदारी दी गई थी। विभागीय अधिकारियों ने मनमानी तरीके से केंद्रों को बनाने का काम किया।आलम यह है कि विपणन विभाग के अफसरों की मिलीभगत से किसानों के धान में नमी बताकर कटौती करने का खेल किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो क्रय केंद्रों पर अनाज की कटौती कर अधिकारी से लेकर क्रय केंद्र प्रभारी तक जेबें भरने का काम कर रहे। जबकि किसान बेहाल होकर धान को औने-पौने दामों पर बाजार में बेचने को विवश है। किसानों की समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
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रबी के दौरान शासन के निर्देश के बावजूद जिले में गेहूं खरीद में खूब मनमानी की गई। किसानों से गेहूं खरीद के दौरान डस्ट के नाम पर मनमानी कटौती की गई। हालांकि इसको लेकर कई केंद्रों पर किसानों ने बवाल भी काटा लेकिन अधिकारियों ने इसे अनसुना कर दिया। वर्तमान मे किसानों की सुविधा के लिए अलग-अलग एजेंसियों के कुल 89 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अधिकांश क्रय केंद्र न तो समय से खुलते हैं और न ही किसानों के धान की खरीद में रुचि ही लेते हैं।
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बताया जाता है कि जिला प्रशासन की ओर से विपणन विभाग को धान क्रय केंद्रों के निर्धारण की जिम्मेदारी दी गई थी। विभागीय अधिकारियों ने मनमानी तरीके से केंद्रों को बनाने का काम किया।आलम यह है कि विपणन विभाग के अफसरों की मिलीभगत से किसानों के धान में नमी बताकर कटौती करने का खेल किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो क्रय केंद्रों पर अनाज की कटौती कर अधिकारी से लेकर क्रय केंद्र प्रभारी तक जेबें भरने का काम कर रहे। जबकि किसान बेहाल होकर धान को औने-पौने दामों पर बाजार में बेचने को विवश है। किसानों की समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
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