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दयाशंकर स्वतंत्र प्रभार, दानिश आजाद राज्यमंत्री बने
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को शाम चार बजे लखनऊ के इकाना स्टेडियम में लगातार दूसरे कार्यालय के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। भाजपा ने लगातार दूसरी बार अपनी सरकार में बलिया जनपद का मान बरकरार रखा है। यहां से इस बार भी दयाशंकर सिंह के साथ ही भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश महामंत्री दानिश आजाद को मंत्री बनाया गया है। दयाशंकर सिंह के मंत्री बनने की संभावना पहले से जताई जा रही थी, लेकिन दानिश आजाद का नाम जनपदवासियों के साथ ही उनके परिजनों के लिए भी काफी चौंकाने वाला रहा है। दयाशंकर सिंह को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और दानिश आजाद को राज्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई है।
भाजपा की वर्ष 2017 में भी बनी सरकार में जनपद से दो मंत्री थे। पहले सिर्फ उपेंद्र तिवारी को मंत्री बनाया गया था। बाद में मंत्रिमंडल के विस्तार में आनंद स्वरूप शुक्ला को भी मंत्री बनाया गया था। इस बार मंत्रिमंडल गठन में ही दो मंत्रियों को स्थान दिया गया है। जनपद से लखनऊ गए लगभग पांच हजार से ज्यादा लोग शपथ ग्रहण समारोह के साक्षी बने तो जनपद में भी लोग शपथ ग्रहण देखने के लिए टीवी और मोबाइल से चिपके रहे। कलक्ट्रेट परिसर के साथ ही मनयिर नगर पंचायत में एलईडी स्क्रीन के माध्यम से शपथ ग्रहण समारोह का सीधा प्रसारण किया गया। प्रदेश सरकार के शपथ ग्रहण के साथ ही भाजपा समर्थकों की ओर से जनपद में खुशियां मनाई गई। कई स्थानों पर आतिशबाजी भी की।
दयाशंकर ने छात्र राजनीति से की थी शुरुआत
बलिया। दयाशंकर सिंह मूल रूप से बिहार के बक्सर के रहने वाले हैं। उनकी पढ़ाई-लिखाई और शुरुआती राजनीति बलिया की ही रही है। 27 जून 1972 को जन्मे दयाशंकर सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत छात्र राजनीति से की थी। लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी के सदस्य थे। 1997 से 1998 तक दयाशंकर लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के महासचिव रहे। 1998 से 1999 तक अध्यक्ष रहे। 2000 में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेश सचिव बनाया गया। भाजयुमो में कई पदों पर रहने के बाद 2007 में दयाशंकर को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। 2007 में दयाशंकर ने पहली बार बलिया नगर सीट से चुनाव लड़ा। यहां उनकी बुरी तरह हार हुई थी, सात हजार वोट भी नहीं मिले थे। 2010 और 2012 में वे दो बार भाजपा के प्रदेश मंत्री बनाए गए। 2015 में उन्हें यूपी बीजेपी का उपाध्यक्ष बनाया गया। मार्च 2016 में यूपी में विधान परिषद का चुनाव हुआ, जिसमें बीजेपी ने उन्हें टिकट दिया, लेकिन दयाशंकर सिंह चुनाव हार गए। जुलाई 2016 में मायावती पर अभ्रद टिप्पणी के बाद उन्हें पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिया गया। तब लगा कि दयाशंकर के राजनीतिक करियर पर अब लंबा ब्रेक लग जाएगा। 2017 में सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने उनका निलंबन वापस ले लिया। एक बार फिर दयाशंकर यूपी बीजेपी के उपाध्यक्ष बनाए गए। इस बीच बसपा पदाधिकारियों ने भी दयाशंकर सिंह को लेकर निशाना साधा था, जिस पर उनकी पत्नी स्वाती सिंह ने कमान संभाल ली थी। इसका नतीजा रहा था कि स्वाती सिंह को लखनऊ से विधानसभा चुनाव लड़ाया गया और वो प्रदेश सरकार में मंत्री भी बनी थीं। दयाशंकर सिंह का कद इसके बाद पार्टी में बढ़ता गया। इस बार स्वाती सिंह का टिकट काटकर दयाशंकर सिंह को बलिया नगर से चुनाव लड़ाया गया था। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधायक दयाशंकर सिंह के चुनाव लड़ने के दौरान से ही भाजपा की सरकार बनने पर मंत्री बनने की संभावना जताई जा रही थी। जनपद की प्रतिष्ठापरक बलिया नगर विधानसभा सीट से प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने सपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री नारद राय को 26239 वोटों से मात दी है।
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चौंका गया दानिश आजाद का नाम
बलिया। मंत्रिमंडल का दूसरा नाम सिर्फ जनपदवासियों के लिए ही नहीं बल्कि दो मंत्री बना उनके परिजनों के लिए भी सबसे चौकाने वाला रहा। ये जनपद के अपायल गांव के निवासी युवा नेता एवं भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश महामंत्री दानिश आजाद का है। 32 साल के दानिश आजाद समीउल्लाह अंसारी के इकलौते पुत्र हैं। एक बहन है जिसकी शादी हो चुकी है। समीउल्लाह अंसारी समाजसेवी हैं। माता नूरजहां बानो प्रधानाध्यापक हैं। दोनों इस समय बेटी के पास गल्फ कंट्री में हैं।
दानिश ने 2006 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से बीकॉम की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद यहीं से मास्टर ऑफ क्वालिटी मैनेजमेंट, फिर मास्टर ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की है। भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से राजनीति की शुरुआत की। दानिश ने एबीवीपी के साथ-साथ भाजपा और आरएसएस के लिए युवाओं के बीच माहौल बनाया। खासतौर पर मुस्लिम युवाओं के बीच। यही कारण रहा कि इस बार उनके गांव से भी मुस्लिम मतदाताओं के अच्छे खासे वोट भाजपा को मिले। चुनाव के दौरान उनके चचा के लड़के की शादी थी। वो घर पर ही रहे और चुनाव में अच्छा कार्य किया। उन्होंने उप्र में भाजपा सरकार आने के बाद भाषा समिति का सदस्य भी बनाया गया था। आजाद लगातार अल्पसंख्यक समाज व युवाओं में अपनी सक्रियता बनाए हुए थे।
घर से ननिहाल तक छाईं खुशियां
बैरिया। भाजपा सरकार में बलिया नगर के विधायक दयाशंकर सिंह को मंत्री बनाये जाने पर उनके ननिहाल करमानपुर में उत्सव का माहौल रहा।मामा के घर लोग एक दूसरे को खुशी का मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार कर रहे थे। बड़े-बुजुर्ग उनके बचपन के संस्मरणों को सुनाकर उनकी यादों को ताजा करने में लगे हुए थे। द्वाबा के मालवीय कहे जाने वाले चार बार विधायक रह चुके स्व. मैनेजर सिंह के बहन के पुत्र दयाशंकर सिंह हैं। दयाशंकर सिंह मूलरूप से बिहार के बक्सर जनपद अंतर्गत राजपुर के मूल निवासी है। इनका बचपन करमानपुर में बीता। इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई सुदिष्ट बाबा इंटर कालेज रानीगंज में हुई। बाद में उच्च शिक्षा के लिए दयाशंकर सिंह लखनऊ चले गए। अपने मामा तत्कालीन विधायक स्व. मैनेजर सिंह के आवास में रहने लगे। करमानपुर स्थित स्व. मैनेजर सिंह की पुत्र वधू एवं स्व. नागेंद्र सिंह की पत्नी राजकुमारी सिंह ने जब यह खबर सुनी तो घर मे खुशी का माहौल छा गया। उन्होंने कहा कि बहुत दिनों से इन शुभदिनों का इंतजार था। घर का भांजा मंत्री बना है। मैनेजर सिंह के पौत्र सतीश सिंह ने लोगों के बीच मिठाइयों का वितरण किया। कहा कि मेरे दादाजी के भांजे योगी सरकार में मंत्री बने हैं। ऐसे में घर मे उत्सव का माहौल होना स्वभाविक है। सतीश सिंह की पत्नी अनीता सिंह खुशी से झूम रही थीं। दयाशंकर सिंह के मंत्री बनने पर पूरा गांव प्रफुल्लित है।
घर से लेकर गांव तक फैली खुशियां
बलिया। दानिश आजाद के मंत्री बनने से घर से लेकर गांव और आसपास के गांव के लोगों में खुशियां फैल गईं। उनके बड़े पिता अमिरुल्लाह अंसारी ने कहा कि बहुत खुशी है कि भतीजा मंत्री बन गया। इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। शुरू से ही एबीवीपी से जुड़ा रहा। शादी में आया था। सबका वोट दिलवाकर गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद। बड़ी मां अफरोज बानो ने कहा कि भतीजा मंत्री बन गया बहुत खुशी है। 28 मार्च को शादी में आया था। 10 दिनों तक रहा। खुशी है कि मंत्री बना है। दानिश की चचेरी बहन गजाला की खुशियां छिप ही नहीं रही थीं। साथ में खेलकूद कर बड़ा होने वाला भाई आज मंत्री बन गया तो खुशियां उनके चेहरे पर ही बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि दानिश मेरा भाई है। बचपन से एक साथ रहे। हम लोगों के लिए बहुत खुशी की बात हैै। सभी सेलीब्रेट कर रहे हैं।
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भाजपा की वर्ष 2017 में भी बनी सरकार में जनपद से दो मंत्री थे। पहले सिर्फ उपेंद्र तिवारी को मंत्री बनाया गया था। बाद में मंत्रिमंडल के विस्तार में आनंद स्वरूप शुक्ला को भी मंत्री बनाया गया था। इस बार मंत्रिमंडल गठन में ही दो मंत्रियों को स्थान दिया गया है। जनपद से लखनऊ गए लगभग पांच हजार से ज्यादा लोग शपथ ग्रहण समारोह के साक्षी बने तो जनपद में भी लोग शपथ ग्रहण देखने के लिए टीवी और मोबाइल से चिपके रहे। कलक्ट्रेट परिसर के साथ ही मनयिर नगर पंचायत में एलईडी स्क्रीन के माध्यम से शपथ ग्रहण समारोह का सीधा प्रसारण किया गया। प्रदेश सरकार के शपथ ग्रहण के साथ ही भाजपा समर्थकों की ओर से जनपद में खुशियां मनाई गई। कई स्थानों पर आतिशबाजी भी की।
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दयाशंकर ने छात्र राजनीति से की थी शुरुआत
बलिया। दयाशंकर सिंह मूल रूप से बिहार के बक्सर के रहने वाले हैं। उनकी पढ़ाई-लिखाई और शुरुआती राजनीति बलिया की ही रही है। 27 जून 1972 को जन्मे दयाशंकर सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत छात्र राजनीति से की थी। लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी के सदस्य थे। 1997 से 1998 तक दयाशंकर लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के महासचिव रहे। 1998 से 1999 तक अध्यक्ष रहे। 2000 में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेश सचिव बनाया गया। भाजयुमो में कई पदों पर रहने के बाद 2007 में दयाशंकर को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। 2007 में दयाशंकर ने पहली बार बलिया नगर सीट से चुनाव लड़ा। यहां उनकी बुरी तरह हार हुई थी, सात हजार वोट भी नहीं मिले थे। 2010 और 2012 में वे दो बार भाजपा के प्रदेश मंत्री बनाए गए। 2015 में उन्हें यूपी बीजेपी का उपाध्यक्ष बनाया गया। मार्च 2016 में यूपी में विधान परिषद का चुनाव हुआ, जिसमें बीजेपी ने उन्हें टिकट दिया, लेकिन दयाशंकर सिंह चुनाव हार गए। जुलाई 2016 में मायावती पर अभ्रद टिप्पणी के बाद उन्हें पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिया गया। तब लगा कि दयाशंकर के राजनीतिक करियर पर अब लंबा ब्रेक लग जाएगा। 2017 में सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने उनका निलंबन वापस ले लिया। एक बार फिर दयाशंकर यूपी बीजेपी के उपाध्यक्ष बनाए गए। इस बीच बसपा पदाधिकारियों ने भी दयाशंकर सिंह को लेकर निशाना साधा था, जिस पर उनकी पत्नी स्वाती सिंह ने कमान संभाल ली थी। इसका नतीजा रहा था कि स्वाती सिंह को लखनऊ से विधानसभा चुनाव लड़ाया गया और वो प्रदेश सरकार में मंत्री भी बनी थीं। दयाशंकर सिंह का कद इसके बाद पार्टी में बढ़ता गया। इस बार स्वाती सिंह का टिकट काटकर दयाशंकर सिंह को बलिया नगर से चुनाव लड़ाया गया था। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधायक दयाशंकर सिंह के चुनाव लड़ने के दौरान से ही भाजपा की सरकार बनने पर मंत्री बनने की संभावना जताई जा रही थी। जनपद की प्रतिष्ठापरक बलिया नगर विधानसभा सीट से प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने सपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री नारद राय को 26239 वोटों से मात दी है।
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चौंका गया दानिश आजाद का नाम
बलिया। मंत्रिमंडल का दूसरा नाम सिर्फ जनपदवासियों के लिए ही नहीं बल्कि दो मंत्री बना उनके परिजनों के लिए भी सबसे चौकाने वाला रहा। ये जनपद के अपायल गांव के निवासी युवा नेता एवं भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश महामंत्री दानिश आजाद का है। 32 साल के दानिश आजाद समीउल्लाह अंसारी के इकलौते पुत्र हैं। एक बहन है जिसकी शादी हो चुकी है। समीउल्लाह अंसारी समाजसेवी हैं। माता नूरजहां बानो प्रधानाध्यापक हैं। दोनों इस समय बेटी के पास गल्फ कंट्री में हैं।
दानिश ने 2006 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से बीकॉम की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद यहीं से मास्टर ऑफ क्वालिटी मैनेजमेंट, फिर मास्टर ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की है। भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से राजनीति की शुरुआत की। दानिश ने एबीवीपी के साथ-साथ भाजपा और आरएसएस के लिए युवाओं के बीच माहौल बनाया। खासतौर पर मुस्लिम युवाओं के बीच। यही कारण रहा कि इस बार उनके गांव से भी मुस्लिम मतदाताओं के अच्छे खासे वोट भाजपा को मिले। चुनाव के दौरान उनके चचा के लड़के की शादी थी। वो घर पर ही रहे और चुनाव में अच्छा कार्य किया। उन्होंने उप्र में भाजपा सरकार आने के बाद भाषा समिति का सदस्य भी बनाया गया था। आजाद लगातार अल्पसंख्यक समाज व युवाओं में अपनी सक्रियता बनाए हुए थे।
घर से ननिहाल तक छाईं खुशियां
बैरिया। भाजपा सरकार में बलिया नगर के विधायक दयाशंकर सिंह को मंत्री बनाये जाने पर उनके ननिहाल करमानपुर में उत्सव का माहौल रहा।मामा के घर लोग एक दूसरे को खुशी का मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार कर रहे थे। बड़े-बुजुर्ग उनके बचपन के संस्मरणों को सुनाकर उनकी यादों को ताजा करने में लगे हुए थे। द्वाबा के मालवीय कहे जाने वाले चार बार विधायक रह चुके स्व. मैनेजर सिंह के बहन के पुत्र दयाशंकर सिंह हैं। दयाशंकर सिंह मूलरूप से बिहार के बक्सर जनपद अंतर्गत राजपुर के मूल निवासी है। इनका बचपन करमानपुर में बीता। इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई सुदिष्ट बाबा इंटर कालेज रानीगंज में हुई। बाद में उच्च शिक्षा के लिए दयाशंकर सिंह लखनऊ चले गए। अपने मामा तत्कालीन विधायक स्व. मैनेजर सिंह के आवास में रहने लगे। करमानपुर स्थित स्व. मैनेजर सिंह की पुत्र वधू एवं स्व. नागेंद्र सिंह की पत्नी राजकुमारी सिंह ने जब यह खबर सुनी तो घर मे खुशी का माहौल छा गया। उन्होंने कहा कि बहुत दिनों से इन शुभदिनों का इंतजार था। घर का भांजा मंत्री बना है। मैनेजर सिंह के पौत्र सतीश सिंह ने लोगों के बीच मिठाइयों का वितरण किया। कहा कि मेरे दादाजी के भांजे योगी सरकार में मंत्री बने हैं। ऐसे में घर मे उत्सव का माहौल होना स्वभाविक है। सतीश सिंह की पत्नी अनीता सिंह खुशी से झूम रही थीं। दयाशंकर सिंह के मंत्री बनने पर पूरा गांव प्रफुल्लित है।
घर से लेकर गांव तक फैली खुशियां
बलिया। दानिश आजाद के मंत्री बनने से घर से लेकर गांव और आसपास के गांव के लोगों में खुशियां फैल गईं। उनके बड़े पिता अमिरुल्लाह अंसारी ने कहा कि बहुत खुशी है कि भतीजा मंत्री बन गया। इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। शुरू से ही एबीवीपी से जुड़ा रहा। शादी में आया था। सबका वोट दिलवाकर गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद। बड़ी मां अफरोज बानो ने कहा कि भतीजा मंत्री बन गया बहुत खुशी है। 28 मार्च को शादी में आया था। 10 दिनों तक रहा। खुशी है कि मंत्री बना है। दानिश की चचेरी बहन गजाला की खुशियां छिप ही नहीं रही थीं। साथ में खेलकूद कर बड़ा होने वाला भाई आज मंत्री बन गया तो खुशियां उनके चेहरे पर ही बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि दानिश मेरा भाई है। बचपन से एक साथ रहे। हम लोगों के लिए बहुत खुशी की बात हैै। सभी सेलीब्रेट कर रहे हैं।