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बेटी ही है घर की आन, बान और शान...
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Mon, 20 Apr 2015 11:26 PM IST
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बेटी बचाओ अभियान के तहत रैली निकालकर आशा कार्यकर्ताओं ने नगर के लोगों को जागरूक किया। रैली का शुभारंभ मुख्य अतिथि सीएमओ डा. पीके सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कहा कि बेटी ही घर की आन, बान और शान होती है। रैली में आशा कार्यकर्ता बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे लगा रहीं थीं।
रैली सीएमओ आवास से शुरू हुई और कुंवर सिंह चौराहा होते हुए राजकीय बालिका इंटर कालेज, टीडी कालेज चौराहा पहुंची। वहां से एएनएम प्रशिक्षण केंद्र पर जाकर समाप्त हुई। इसके बाद आशा कार्यकर्ताओं ने सभा की। इसमें सीएमओ डा. पीके सिंह ने कहा कि बेटियों को बेटों के बराबर दर्जा दीजिए।
पढ़ा-लिखाकर उसे इस लायक बनाइए कि वह अपने पैरों पर खड़ा होकर समाज में पुरुषों की बराबरी कर सके। सीएमओ ने बेटी बचाओ में महिलाओं के योगदान को वर्णित करते हुए कहा कि महिलाओं में जागरूकता की कमी से ही बेटियों की संख्या कम हो रही है। गर्भ में ही उसकी हत्या कर दी जाती है।
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कहा कि लिंग परीक्षण करवाकर ऐसा नहीं करना चाहिए। यदि आप सोचते हैं कि बेटा होगा तो अधिक काम का होगा तो यह बहुत ही गलत है। कहा कि अगर मां-बाप की तबियत खराब होती है तो बेटियां बीमार मां-बाप की सेवा करने के लिए आ जाती हैं लेकिन बेटे और बहू उन्हें घर में छोड़कर शापिंग करने चले जाते हैं।
बताया कि बलिया में एक हजार के सापेक्ष 937 बेटियां हैं। एसीएमओ लल्लन प्रसाद ने कहा कि आज राशन कार्ड में महिलाएं ही मुखिया बनाई गई हैं। समाज में महिलाओं का एक अहम स्थान है। रैली में प्रधान लिपिक दयाशंकर वर्मा, नीरज कुमार राय, आनंद प्रकाश दूबे, दुर्गेश राय, राजेंद्र कुमार, सुरेश कुमार, जवाहर प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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रैली सीएमओ आवास से शुरू हुई और कुंवर सिंह चौराहा होते हुए राजकीय बालिका इंटर कालेज, टीडी कालेज चौराहा पहुंची। वहां से एएनएम प्रशिक्षण केंद्र पर जाकर समाप्त हुई। इसके बाद आशा कार्यकर्ताओं ने सभा की। इसमें सीएमओ डा. पीके सिंह ने कहा कि बेटियों को बेटों के बराबर दर्जा दीजिए।
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पढ़ा-लिखाकर उसे इस लायक बनाइए कि वह अपने पैरों पर खड़ा होकर समाज में पुरुषों की बराबरी कर सके। सीएमओ ने बेटी बचाओ में महिलाओं के योगदान को वर्णित करते हुए कहा कि महिलाओं में जागरूकता की कमी से ही बेटियों की संख्या कम हो रही है। गर्भ में ही उसकी हत्या कर दी जाती है।
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कहा कि लिंग परीक्षण करवाकर ऐसा नहीं करना चाहिए। यदि आप सोचते हैं कि बेटा होगा तो अधिक काम का होगा तो यह बहुत ही गलत है। कहा कि अगर मां-बाप की तबियत खराब होती है तो बेटियां बीमार मां-बाप की सेवा करने के लिए आ जाती हैं लेकिन बेटे और बहू उन्हें घर में छोड़कर शापिंग करने चले जाते हैं।
बताया कि बलिया में एक हजार के सापेक्ष 937 बेटियां हैं। एसीएमओ लल्लन प्रसाद ने कहा कि आज राशन कार्ड में महिलाएं ही मुखिया बनाई गई हैं। समाज में महिलाओं का एक अहम स्थान है। रैली में प्रधान लिपिक दयाशंकर वर्मा, नीरज कुमार राय, आनंद प्रकाश दूबे, दुर्गेश राय, राजेंद्र कुमार, सुरेश कुमार, जवाहर प्रसाद आदि मौजूद रहे।