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श्रमिकों का तैयार हो रहा डाटा बेस, मिलेगा घर के पास ही रोजगार-----
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बलिया। लॉकडाउन में देश के विभिन्न इलाकों में फंसे मजदूरों की घर वापसी के साथ ही उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने को लेकर भी सरकार ने पहल की है। इसके तहत अब सेवायोजन विभाग प्रवासी श्रमिकों का डाटा बेस तैयार कर रहा है। इसे लेकर विभाग की ओर से सर्वे का काम शुरू हो गया है। इसके बाद मजदूरों को उनकी क्षमता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। अब तक पांच हजार से अधिक श्रमिकों का ब्योरा विभाग ने दर्ज किया है।
लॉकडाउन लागू होने के बाद से ही देश के विभिन्न प्रांतों व प्रदेश के विभिन्न नगरों से मजदूरों का पलायन जारी है। जिले के विभिन्न गांवों के श्रमिक लॉकडाउन में बढ़ती समस्या को देख महानगरों को छोड़ वापस लौट आए हैं। गांवों में श्रमिकों के आने के कारण खासकर गरीब परिवारों की परेशानी बढ़ सकती है और आर्थिक समस्या से जूझ सकते हैं। इसको देखते हुए सरकार ने इन्हें गांव के आसपास पर रोजगार देने की कवायद तेज कर दी है। श्रम एवं सेवायोजन विभाग की ओर से प्रवासी श्रमिकों के डाटा बेस तैयार करने की प्रकिया शुरु की गई है। विभाग की ओर से गांवों व नगरीय इलाकों में आए प्रवासी श्रमिकों नाम, पता, मोबाइल नंबर, शैक्षिक योग्यता आदि का अंकन किया जा रहा है। विभाग के सहायक निदेशक के अनुसार ब्योरा तैयार करने के बाद इन श्रमिकों का पंजीकरण किया जाएगा और शासन को भेजा जाएगा। बताया कि प्रयास किया जाएगा कि खासकर कुशल श्रमिकों को गांव-नगर के आसपास ही रोजगार उपलब्ध कराया जाए ताकि वह आर्थिक परेशानी से उबर सकें।
श्रम एवं सेवायोजन विभाग के कर्मी कर रहे सर्वे
बैरिया। जिलाधिकारी के आदेश पर श्रम एवं सेवा योजना विभाग गैर प्रान्तों से आए प्रवासी मजदूरों का आंकड़े जुटाने में लगा है। मजदूरों की नाम,पता,योग्यता,गैर प्रान्त में क्या काम करते थे, काम की कितने वर्षों की अनुभव है सारा डाटा श्रम विभाग के पोर्टल पर फीड किया जा रहा है। सर्वे करने क्षेत्र में पहुंचे श्रम एवं सेवा योजना विभाग के वरिष्ठ सहायक मनोज सिंह ने बताया कि रोजगार के लिए कोई भी श्रमिक सेवायोजना पोर्टल पर पंजीकरण कर सकता है। इसके लिए आंकड़ा जुटाने का काम किया जा रहा है।
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प्रवासी श्रमिकों का ब्योरा तैयार किया जा रहा है इसके बाद सभी का पंजीकरण करने की प्रक्रिया शुरु की जाएगी। कुशल श्रमिकों को गांव-नगर के आसपास रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
पूनम रानी, सहायक निदेशक, श्रम एवं सेवायोजन, आजमगढ।
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लॉकडाउन लागू होने के बाद से ही देश के विभिन्न प्रांतों व प्रदेश के विभिन्न नगरों से मजदूरों का पलायन जारी है। जिले के विभिन्न गांवों के श्रमिक लॉकडाउन में बढ़ती समस्या को देख महानगरों को छोड़ वापस लौट आए हैं। गांवों में श्रमिकों के आने के कारण खासकर गरीब परिवारों की परेशानी बढ़ सकती है और आर्थिक समस्या से जूझ सकते हैं। इसको देखते हुए सरकार ने इन्हें गांव के आसपास पर रोजगार देने की कवायद तेज कर दी है। श्रम एवं सेवायोजन विभाग की ओर से प्रवासी श्रमिकों के डाटा बेस तैयार करने की प्रकिया शुरु की गई है। विभाग की ओर से गांवों व नगरीय इलाकों में आए प्रवासी श्रमिकों नाम, पता, मोबाइल नंबर, शैक्षिक योग्यता आदि का अंकन किया जा रहा है। विभाग के सहायक निदेशक के अनुसार ब्योरा तैयार करने के बाद इन श्रमिकों का पंजीकरण किया जाएगा और शासन को भेजा जाएगा। बताया कि प्रयास किया जाएगा कि खासकर कुशल श्रमिकों को गांव-नगर के आसपास ही रोजगार उपलब्ध कराया जाए ताकि वह आर्थिक परेशानी से उबर सकें।
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श्रम एवं सेवायोजन विभाग के कर्मी कर रहे सर्वे
बैरिया। जिलाधिकारी के आदेश पर श्रम एवं सेवा योजना विभाग गैर प्रान्तों से आए प्रवासी मजदूरों का आंकड़े जुटाने में लगा है। मजदूरों की नाम,पता,योग्यता,गैर प्रान्त में क्या काम करते थे, काम की कितने वर्षों की अनुभव है सारा डाटा श्रम विभाग के पोर्टल पर फीड किया जा रहा है। सर्वे करने क्षेत्र में पहुंचे श्रम एवं सेवा योजना विभाग के वरिष्ठ सहायक मनोज सिंह ने बताया कि रोजगार के लिए कोई भी श्रमिक सेवायोजना पोर्टल पर पंजीकरण कर सकता है। इसके लिए आंकड़ा जुटाने का काम किया जा रहा है।
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प्रवासी श्रमिकों का ब्योरा तैयार किया जा रहा है इसके बाद सभी का पंजीकरण करने की प्रक्रिया शुरु की जाएगी। कुशल श्रमिकों को गांव-नगर के आसपास रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
पूनम रानी, सहायक निदेशक, श्रम एवं सेवायोजन, आजमगढ।