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डंठल जलाने से उत्पादकता में आती है कमी

Thu, 05 May 2016 07:46 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला,बलिया
ब्यूरो, अमर उजाला,बलिया Updated Thu, 05 May 2016 07:46 PM IST
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dantal na jalayen kisan
फसल - फोटो : अमर उजाला
मौसम का मिजाज अचानक बिगड़ने की आशंका तथा किसानी का कार्य त्वरित गति से संपादित करने के लिहाज से गेहूं की फसल की कटाई के लिए हार्वेस्टर का वलन तेजी से बढ़ा है। लेकिन इसके नुकसान से किसान बेखबर हैं।
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इस विधि से हुई कटाई से फसलों के डंठल खेत में ही रह जाते हैं। किसान डंठलों को बिना सोचे समझे जला रहे हैं जिसे कई तरह के नुकसान हो रहे हैं। इससे बड़ा नुकसान मृदा की सेहत खराब होने से हो रहा है। खेतों में डंठल जलाने से उत्पादकता में बीस से पैंतिस  प्रतिशत की कमी आ सकती है।
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इंसान को जिस प्रकार स्वस्थ्य रहने के लिए तत्वों की आवश्यकता होती है ठीक उसी तरह मिट्टी को स्वस्थ रहने के लिए भी करीब 17 तत्वों की आवश्यकता होती है। मिट्टी में मौजूद सभी 17 तत्व प्राकृतिक रूप से मृदा में मौजूद रहते हैं। डंठल जलाये जाने से उत्पादकता में कमी के साथ-साथ प्रदूषण का भी खतरा बढ़ जायेगा। क्योंकि डंठल जलाये जाने से कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता काफी ज्यादा बढ़ जाती है। कार्बन उत्सर्जन से इंसान के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है।
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