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बेखौफ फर्राटा भर रहे डग्गामार वाहन
ballia
Updated Fri, 17 Nov 2017 10:37 PM IST
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नगर के टीडी काॅलेज-कुंवर सिंह चौराहा के मध्य में लगी वाहनों की लंबी कतार।
- फोटो : ballia
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जनपद में डग्गामार वाहन बेखौफ होकर फर्राटा भर रहे हैं। परिवहन विभाग की उदासीनता इस पर भारी पड़ रही है। नतीजतन, पुलिस और विभगीय लोगों की मुट्ठी गर्म कर वाहनों को दौड़ाया जा रहा है। ऐसे डग्गामार वाहनों की संख्या 35 से 40 प्रतिशत तक है। सहायक संभागीय परिवहन विभाग के आकड़ों पर गौर करें तो जनपद में छोटे-बड़े लगभग दो हजार वाहन पंजीकृत हैं। जिसमें ई-रिक्शा लगभग 400, आटो 400, जीप 400 तथा छोटी-बड़ी बस लगभग 800 पंजीकृत है। जिसमें प्रत्येक मार्ग पर करीब 50 बसें संचालित हैं। जबकि अन्य बसें स्कूलों में संचालित है। 35 से 40 फीसदी वाहन डग्गामार हैं।
डग्गामार वाहनों से कहीं भी हादसा हो सकता है। बावजूद यात्री दहशत में रह कर मजबूरी में यात्रा करते हैं। अगर विभाग द्वारा प्रत्येक वाहन स्टैंडों पर गहनता से जांच की जाय तो अधिकांश वाहन सीज हो जाएंगे। लेकिन डग्गामार वाहन संचालक यातायात, संभागीय परिवहन विभाग और पुलिस की मुट्ठिया गरम कर फराटे से चल रहे हैं। यात्री किशन कुमार का कहना है कि अगर यातायात, संभागीय परिवहन विभाग और पुलिस सक्रियता से जांच कर कार्रवाई करें तो निश्चित ही डग्गामार वाहनों पर नकेेल कसेगी। वृद्घ यात्री रामलखन प्रसाद का कहना है कि सभी स्टैंडों पर गैर जनपदों से निष्कासित वाहन जिले में प्रशासन की उदासीनता के कारण धड़ल्ले से चल रहे है।
इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए। इसके चलते जाम आम बात है। आटो चालक राजू कुमार का कहना है कि पूंजी के अभाव में गैर जनपदों से वाहन कम दाम में खरीदकर लाते है और यहां यातायात, पुलिस व संभागीय परिवहन के लोगों को सुविधा शुल्क देकर चलते है। आटो संचालक महेश राम ने बताया कि सड़क पर कागज पूूरा करके चलना किसी भी वाहन संचालक के बस की बात नहीं है। कारण कि कभी इंश्योरेंश फेल तो कभी रोड टैैक्स फेल रहता है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि डग्गामार वाहनों के विरूद्घ अभियान चलाया जा रहा है और वाहनों को सीज भी किया जा रहा है।
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डग्गामार वाहनों से कहीं भी हादसा हो सकता है। बावजूद यात्री दहशत में रह कर मजबूरी में यात्रा करते हैं। अगर विभाग द्वारा प्रत्येक वाहन स्टैंडों पर गहनता से जांच की जाय तो अधिकांश वाहन सीज हो जाएंगे। लेकिन डग्गामार वाहन संचालक यातायात, संभागीय परिवहन विभाग और पुलिस की मुट्ठिया गरम कर फराटे से चल रहे हैं। यात्री किशन कुमार का कहना है कि अगर यातायात, संभागीय परिवहन विभाग और पुलिस सक्रियता से जांच कर कार्रवाई करें तो निश्चित ही डग्गामार वाहनों पर नकेेल कसेगी। वृद्घ यात्री रामलखन प्रसाद का कहना है कि सभी स्टैंडों पर गैर जनपदों से निष्कासित वाहन जिले में प्रशासन की उदासीनता के कारण धड़ल्ले से चल रहे है।
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इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए। इसके चलते जाम आम बात है। आटो चालक राजू कुमार का कहना है कि पूंजी के अभाव में गैर जनपदों से वाहन कम दाम में खरीदकर लाते है और यहां यातायात, पुलिस व संभागीय परिवहन के लोगों को सुविधा शुल्क देकर चलते है। आटो संचालक महेश राम ने बताया कि सड़क पर कागज पूूरा करके चलना किसी भी वाहन संचालक के बस की बात नहीं है। कारण कि कभी इंश्योरेंश फेल तो कभी रोड टैैक्स फेल रहता है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि डग्गामार वाहनों के विरूद्घ अभियान चलाया जा रहा है और वाहनों को सीज भी किया जा रहा है।
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