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dadri mele ki raunak hue kam
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Tue, 06 Dec 2016 07:54 PM IST
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ददरी मेला।
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सुदिष्ट बाबा के समाधि स्थल पर लगा धनुष यज्ञ मेले में अब धीरे-धीरे रौनक बढ़ रहा है। बावजूद मेले में कहीं न कहीं नोटबंदी का असर भी दिख रहा है। लोग मेले में पहुंच जरूर रहे हैं, लेकिन खरीदारी में कंजूसी कर रहे हैं। इसका कारण नोटबंदी बताया जा रहा है। इससे मेले में बाहर से आए दूकानदारों में मायूसी है।
धनुष यज्ञ मेले में लोग सुदिष्ट बाबा की समाधि पर शीश नवा रहे हैं और मेले से सामान की खरीदारी कर रहे हैं। वहीं मेले का सुप्रसिद्घ जलेबी और सब्जी का प्रसाद के रूप खा रहे है। हालांकि बड़ी दूकानों को अभी सजाया-संवारा जा रहा है। दूकानदारों की माने तो तीन से चार दिन बाद मेला पूरी तरह से शवाब पर आ जाएगा। बिहार का सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण इस मेले में छपरा, आरा और भोजपुर जिले के लोग भी पहुंच कर खरीदारी करते हैं।
इस मेले में शादी-विवाह के सामानों जैसे पलंग, तोसक, कुर्सी, सोफा आदि की खरीदारी करने वाले भी खूब उमड़ते हैं। हालांकि इस बार मेले पर भी नोटबंदी का असर दिख रहा है। ऐसे में लोग तो खूब उमड़ रहे हैं लेकिन उनमें खरीदार कम ही हैं। मेले में हर बार विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपना-अपना मंच लगाकर मेले में आये लोगों का सहयोग किया जाता रहा है।
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लेकिन इस बार कांग्रेस और भाजपा छोड़ किसी ने मेले में अपना मंच नहीं लगाया। लोगों में यह चर्चा है कि चुनावी वर्ष होने के बावजूद कई राजनीतिक पार्टियों ने क्यों मंच नहीं लगाया? कोटवा ग्रामसभा के प्रधान प्रतिनिधि रोशन गुप्त ने बताया कि इस बार मेले में पिछली बार की अपेक्षा सुरक्षा और सुविधा की व्यवस्था काफी चुस्त-दुरुस्त की गई है। व्यापारी और मेलार्थी को यदि कोई दिक्कत होती हो तो उसकी शिकायत करें, तत्काल उसका निस्तारण कराया जाएगा।
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धनुष यज्ञ मेले में लोग सुदिष्ट बाबा की समाधि पर शीश नवा रहे हैं और मेले से सामान की खरीदारी कर रहे हैं। वहीं मेले का सुप्रसिद्घ जलेबी और सब्जी का प्रसाद के रूप खा रहे है। हालांकि बड़ी दूकानों को अभी सजाया-संवारा जा रहा है। दूकानदारों की माने तो तीन से चार दिन बाद मेला पूरी तरह से शवाब पर आ जाएगा। बिहार का सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण इस मेले में छपरा, आरा और भोजपुर जिले के लोग भी पहुंच कर खरीदारी करते हैं।
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इस मेले में शादी-विवाह के सामानों जैसे पलंग, तोसक, कुर्सी, सोफा आदि की खरीदारी करने वाले भी खूब उमड़ते हैं। हालांकि इस बार मेले पर भी नोटबंदी का असर दिख रहा है। ऐसे में लोग तो खूब उमड़ रहे हैं लेकिन उनमें खरीदार कम ही हैं। मेले में हर बार विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपना-अपना मंच लगाकर मेले में आये लोगों का सहयोग किया जाता रहा है।
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लेकिन इस बार कांग्रेस और भाजपा छोड़ किसी ने मेले में अपना मंच नहीं लगाया। लोगों में यह चर्चा है कि चुनावी वर्ष होने के बावजूद कई राजनीतिक पार्टियों ने क्यों मंच नहीं लगाया? कोटवा ग्रामसभा के प्रधान प्रतिनिधि रोशन गुप्त ने बताया कि इस बार मेले में पिछली बार की अपेक्षा सुरक्षा और सुविधा की व्यवस्था काफी चुस्त-दुरुस्त की गई है। व्यापारी और मेलार्थी को यदि कोई दिक्कत होती हो तो उसकी शिकायत करें, तत्काल उसका निस्तारण कराया जाएगा।