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बलिया: जिंदगी की जंग हार गए सीआरपीएफ इंस्पेक्टर अजय,  दिल्ली में ली अंतिम सांस

Thu, 29 Apr 2021 08:16 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 29 Apr 2021 08:16 PM IST
सार

बलिया में पैतृक गांव बगही पहुंचा पार्थिव शरीर, हर आंखें हुईं नम 

पुलवामा हमले में हुए थे घायल, ड्यूटी के दौरान हुआ था ब्रेन हैमरेज, कोमा में थे

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CRPF Inspector Ajay lost the battle of life, breathed his last in Delhi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बलिया के रामगढ़ में करीब छह माह पहले पुलवामा आतंकी हमले में घायल सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर और बलिया के बेटे अजय कुमार तिवारी (54) को घटना के एक सप्ताह बाद ड्यूटी के दौरान ब्रेन हैमरेज हो गया। वह कोमा में चले गए थे। दिल्ली के पर्क अस्पताल में मंगलवार को उनका निधन हो गया। बृहस्पतिवार को हल्दी थाना क्षेत्र के बगही गांव में उनका पार्थिव शरीर पहुंचा तो शोकाकुल लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। सभी उनकी अंतिम झलक पाने को बेताब दिखे। गंगा नदी के पचरुखिया हुकुम छपरा घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि हुई। बड़े पुत्र मोहित ने मुखाग्नि दी। 
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अजय सीआरपीएफ में सब इंस्पेक्टर थे। उनकी तैनाती पुलवामा में थी। बताया जाता है कि 26 अक्तूबर 2020 को आतंकी हमले में अजय घायल हो गए थे। एक सप्ताह बाद 4 नवंबर को अजय को ड्यूटी के दौरान ब्रेन हेमरेज हो गया। जिसके चलते वह कोमा में चले गए। उनके ब्रेन का ऑपरेशन पुलवामा में ही किया गया था। इसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया था। पर्क अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।
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मंगलवार को उनका निधन हो गया। पार्थिव शरीर दिल्ली से हवाई जहाज द्वारा बृहस्पतिवार को वाराणसी लाया गया। इसके बाद पहाड़िया स्थित सीआरपीएफ के 95वीं बटालियन के जवान उनका पार्थिव शरीर लेकर दोपहर में उनके पैतृक गांव बगही पहुंचे। लोगों ने माटी के लाल का अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। पत्नी निशा, पुत्री अंजली, बेटे मोहित व अंकुश का रो रोकर बुरा हाल था। हुकुम छपरा घाट पर बटालियन ने साथी को गार्ड आफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी। इस मौके पर सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट ज्ञानरंजन, एसआई बीके शर्मा, हवलदार अभिमन्यु, हवलदार राकेश कुमार, पूर्व ग्राम प्रधान संजय कुमार ओझा, समाजसेवी  नितेश कुमार सिंह, अवधेश मिश्रा, मुन्ना मिश्रा, गोपाल जी गुप्ता, विजय तिवारी आदि रहे।
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मां का दुलार देख नम हुईं आंखें 
बेटा चाहे कितना बड़ा हो जाए। वह मां का दुलारा ही होता है। बगही गांव में माहौल कुछ अलग था। 95 वर्षीय मां कौशल्या को जैसे ही पता चला कि उनके जिगर का टुकड़ा इस दुनिया में नहीं रहा तो वह टूट गईं। मां जैसे तैसे बेटे के पास पहुंची और उसे सीने से लगाने की कोशिश करने लगीं। मां का यह ममत्व देख, वहां उपस्थित हर किसी की आंखें नम हो गईं। 

1990 में भर्ती हुए थे अजय
स्व. बिंदेश्वरी तिवारी के चार पुत्रों में सबसे बड़े श्रीकृष्ण तिवारी, दूसरे विजय तिवारी व तीसरे अजय तिवारी के अलावा चौथे अभय कुमार तिवारी हैं। अजय सीआरपीएफ में सब इंस्पेक्टर के पद पर वर्ष 1990 में मध्य प्रदेश से भर्ती हुए थे। अजय के दो पुत्र एक पुत्री है। बड़े पुत्र मोहित (18), अंकुश (12) और बेटी अंजलि (19) है। 

भतीजे की शादी में आए थे गांव 
परिजनों के मुताबिक अजय फरवरी 2020 में पूरे परिवार के साथ बगही में भतीजे की शादी में आए थे। मां कौशल्या से कह गए थे कि अगली बार आऊंगा तो मोहित का यज्ञोपवीत संस्कार करूंगा। लेकिन विधाता को कुछ और ही मंजूर था। पत्नी निशा व बेटी अंजलि का तो रोकर बुरा हाल है। बड़े भाई विजय व कृष्ण कुमार को होश ही नहीं रहा। 
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