{"_id":"60d604028ebc3e7cec1741d7","slug":"criminal-arrested-in-ballia-ballia-news-vns596890051","type":"story","status":"publish","title_hn":"16 वर्ष पहले पैरोल पर आकर फरार हुआ 50 हजार का इनामिया गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
16 वर्ष पहले पैरोल पर आकर फरार हुआ 50 हजार का इनामिया गिरफ्तार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्दी। थाना क्षेत्र के गायघाट निवासी 50 हजार रुपये के इनामी को पुलिस ने शुक्रवार को गायघाट डाकबंगले से गिरफ्तार कर लिया। अपराधी हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा पा चुका है। जेल से छह माह के लिए पैरोल पर 16 वर्ष पहले घर आया। तब से वाराणसी जेल में हाजिर नहीं हुआ। न्यायालय से कई बार नोटिस और वारंट जारी किया गया था। गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ और एसओजी की टीम लगाई गई थी।
हल्दी थाना क्षेत्र के गायघाट निवासी अनिल सिंह पुत्र शिवशंकर सिंह बीएसएफ में सिपाही के पद पर जम्मू-कश्मीर में तैनात था। तैनाती के दौरान छह जनवरी 1994 में अपने विंग के एचओडी की हत्या कर दी थी। न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अनिल अजीवन कारावास की 12 साल की सजा काट चुका था, उसकी सजा के दो साल ही शेष थे। अनिल ने अपने वकील के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर छह माह का पैरोल मांगा था। हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर 2005 से 13 अप्रैल 2006 तक का पैरोल स्वीकृति किया था। 12 अक्टूबर 2005 को वाराणसी स्थित सेन्ट्रल जेल से आने के बाद वह पुन: हाजिर नहीं हुआ। अप्रैल 2006 से ही उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया था। 16 साल से वह पुलिस के गिरफ्त में नहीं आ रहा था। इसी बीच शुक्रवार को मुखबिर की सूचना पर थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह, उपनिरीक्षक शैलेन्द्र पांडेय आदि ने गायघाट डाकबंगले से उसे गिरफ्तार कर लिया। थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने बताया कि इसकी गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ व एसओजी की टीम कई वर्षों से लगी थी। भगोड़े अनिल पर बलिया एसपी की तरफ से 25 हजार और वाराणसी पुलिस की ओर से 25 हजार का इनाम घोषित था।
विज्ञापन
हल्दी थाना क्षेत्र के गायघाट निवासी अनिल सिंह पुत्र शिवशंकर सिंह बीएसएफ में सिपाही के पद पर जम्मू-कश्मीर में तैनात था। तैनाती के दौरान छह जनवरी 1994 में अपने विंग के एचओडी की हत्या कर दी थी। न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अनिल अजीवन कारावास की 12 साल की सजा काट चुका था, उसकी सजा के दो साल ही शेष थे। अनिल ने अपने वकील के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर छह माह का पैरोल मांगा था। हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर 2005 से 13 अप्रैल 2006 तक का पैरोल स्वीकृति किया था। 12 अक्टूबर 2005 को वाराणसी स्थित सेन्ट्रल जेल से आने के बाद वह पुन: हाजिर नहीं हुआ। अप्रैल 2006 से ही उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया था। 16 साल से वह पुलिस के गिरफ्त में नहीं आ रहा था। इसी बीच शुक्रवार को मुखबिर की सूचना पर थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह, उपनिरीक्षक शैलेन्द्र पांडेय आदि ने गायघाट डाकबंगले से उसे गिरफ्तार कर लिया। थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने बताया कि इसकी गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ व एसओजी की टीम कई वर्षों से लगी थी। भगोड़े अनिल पर बलिया एसपी की तरफ से 25 हजार और वाराणसी पुलिस की ओर से 25 हजार का इनाम घोषित था।
विज्ञापन