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अंदेशा था फिर भी लापरवाही
ब्यूरो/अमर उजाला बलिया
Updated Thu, 06 Aug 2015 10:35 PM IST
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अफसरों के निर्देश के बाद भी समय से पुलिस के न पहुंचने की वजह से बेल्थरारोड नगर पंचायत में इतना बड़ा बवाल हुआ। नीरज की हत्या के बाद मंगलवार की रात को जिस तरह आक्रोशित भीड़ ने पुलिस चौकी पर पथराव किया तथा पुलिस को निशाना बनाया था। इसके बाद पुलिस अधिकारियों को हालात के असामान्य होने का अंदेशा हो गया था।
इसे लेकर आलाधिकारियों ने नगर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की रणनीति रात में ही तैयार कर ली थी। साथ ही पुलिस कर्मियों को सुबह सात बजे ही तैनाती स्थल पर पहुंचने का निर्देश दिया था। बावजूद अधिकारियों के निर्देश की अवहेलना की।
अधिकांश पुलिसकर्मी मौके पर तब पहुंचे, जब बुधवार को बवाल हो गया और हालात भयावह रूप ले चुके थे। जिस समय जुलूस जामा मस्जिद पहुंचा, उस समय मात्र एक थानाध्यक्ष अपने सहयोगी पुलिसकर्मियों के साथ मौजूद थे। यही हालत रामलीला मैदान की भी थी।
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उपद्रवियों के हुजूम के सामने खुद को असहाय पाकर पुलिसकर्मी मुकदर्शक बने रहे। जिस तरह से एक वर्ग विशेष के प्रतिष्ठान और संपति को निशाना बनाया जा रहा था, उस समय दूसरा वर्ग शांत रहा वर्ना हालात और बदतर नजर आते।
इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है। दलित युवक की पिटाई के मामले में शिकायत के बावजूद इलाकाई पुलिस ने उचित कार्रवाई की होती तो यह बड़ी वारदात रुक सकती थी।
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इसे लेकर आलाधिकारियों ने नगर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की रणनीति रात में ही तैयार कर ली थी। साथ ही पुलिस कर्मियों को सुबह सात बजे ही तैनाती स्थल पर पहुंचने का निर्देश दिया था। बावजूद अधिकारियों के निर्देश की अवहेलना की।
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अधिकांश पुलिसकर्मी मौके पर तब पहुंचे, जब बुधवार को बवाल हो गया और हालात भयावह रूप ले चुके थे। जिस समय जुलूस जामा मस्जिद पहुंचा, उस समय मात्र एक थानाध्यक्ष अपने सहयोगी पुलिसकर्मियों के साथ मौजूद थे। यही हालत रामलीला मैदान की भी थी।
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उपद्रवियों के हुजूम के सामने खुद को असहाय पाकर पुलिसकर्मी मुकदर्शक बने रहे। जिस तरह से एक वर्ग विशेष के प्रतिष्ठान और संपति को निशाना बनाया जा रहा था, उस समय दूसरा वर्ग शांत रहा वर्ना हालात और बदतर नजर आते।
इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है। दलित युवक की पिटाई के मामले में शिकायत के बावजूद इलाकाई पुलिस ने उचित कार्रवाई की होती तो यह बड़ी वारदात रुक सकती थी।