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दो बंदीरक्षक निलंबित, कारागार में प्रवेश पर रोक
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
Updated Wed, 18 May 2016 09:24 PM IST
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जेल मे हिंसा
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जिला कारागार में दो बंदीरक्षक ऐसे थे जिनके आतंक से कारागार में तैनात अन्य बंदीरक्षक ही नहीं कारागार के अधिकारी भयभीत रहते थे। इन दो बंदियों के कारण कारागार में कब कोई अप्रिय घटना घटित हो जाय इसका अंदेशा हमेशा बना रहता था। ऐसे दोनों बंदीरक्षकों धनंजय सिंह और चित्रसेन चौहान को सस्पेंड कर दिया गया है।
दोनों बंदी रक्षकों की शिकायत लंबे समय से होती रही है। शिकायतों की लंबी जांच में आरोप पुष्ट होने पर उनके खिलाफ कारवाई की गई। डीएम एवं कारागार अधीक्षक की संतुति पर अपर पुलिस महानिदेशक /महानिरीक्षक कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं डीएस चौहान के निर्देश पर इन्हें सस्पेंड किया गया।
सस्पेंशन की कार्रवाई वरिष्ठ अधीक्षक नियुक्ति एवं दंडन अधिकारी मंडल आजमगढ़ ने 14 मई को किया, जिसका आदेश दो दिन पूर्व मिला। सस्पेंड किए गए दोनों बंदीरक्षकों को बिना आदेश कारागार में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है। दोनों बंदी रक्षकों पर कारागार में निरुद्ध कुख्यात अपराधियों से सांठ गांठ रखने, बंदियों को निषिद्ध वस्तुएं जेल में उपलब्ध कराने, अधिकारियों के साथ अनुशासनहीनता एवं उद्दंडता करने व कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही करने का आरोप है।
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कारागार अधीक्षक एके मिश्र ने बताया कि पूर्व में ये बंदी रक्षक इटावा जेल में तैनात रहे हैं। वहां भी इनका आचरण ऐसा ही था। दोनों को वहां से दंडित किया जा चुका है। फिलहाल दोनों निलंबित बंदी रक्षकों के खिलाफ मऊ के जेलर को जांच सौंप दी गई है। बंदी रक्षकों को मऊ के जेलर एम के पंाडेय के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
इन आरोपी बंदी रक्षकों से जेल परिसर में मिले सरकारी आवास को भी खाली कराने का आदेश दिया गया है। जिला कारागार प्रभारी अधीक्षक/जेलर एके मिश्रा ने बताया कि दोनों बंदीरक्षक शातिर प्रवृति के हैं। दोनों के ऊपर उदंडता, अनुशासनहीनता, बंदियों से सांठ-गांठ, प्रशासनिक व्यवस्था को अस्थिर करना, ड्यूटी के दौरान अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित के आरोप में निलंबन की कार्रवाई उच्चाधिकारियों द्वारा की गई है।
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दोनों बंदी रक्षकों की शिकायत लंबे समय से होती रही है। शिकायतों की लंबी जांच में आरोप पुष्ट होने पर उनके खिलाफ कारवाई की गई। डीएम एवं कारागार अधीक्षक की संतुति पर अपर पुलिस महानिदेशक /महानिरीक्षक कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं डीएस चौहान के निर्देश पर इन्हें सस्पेंड किया गया।
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सस्पेंशन की कार्रवाई वरिष्ठ अधीक्षक नियुक्ति एवं दंडन अधिकारी मंडल आजमगढ़ ने 14 मई को किया, जिसका आदेश दो दिन पूर्व मिला। सस्पेंड किए गए दोनों बंदीरक्षकों को बिना आदेश कारागार में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है। दोनों बंदी रक्षकों पर कारागार में निरुद्ध कुख्यात अपराधियों से सांठ गांठ रखने, बंदियों को निषिद्ध वस्तुएं जेल में उपलब्ध कराने, अधिकारियों के साथ अनुशासनहीनता एवं उद्दंडता करने व कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही करने का आरोप है।
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कारागार अधीक्षक एके मिश्र ने बताया कि पूर्व में ये बंदी रक्षक इटावा जेल में तैनात रहे हैं। वहां भी इनका आचरण ऐसा ही था। दोनों को वहां से दंडित किया जा चुका है। फिलहाल दोनों निलंबित बंदी रक्षकों के खिलाफ मऊ के जेलर को जांच सौंप दी गई है। बंदी रक्षकों को मऊ के जेलर एम के पंाडेय के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
इन आरोपी बंदी रक्षकों से जेल परिसर में मिले सरकारी आवास को भी खाली कराने का आदेश दिया गया है। जिला कारागार प्रभारी अधीक्षक/जेलर एके मिश्रा ने बताया कि दोनों बंदीरक्षक शातिर प्रवृति के हैं। दोनों के ऊपर उदंडता, अनुशासनहीनता, बंदियों से सांठ-गांठ, प्रशासनिक व्यवस्था को अस्थिर करना, ड्यूटी के दौरान अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित के आरोप में निलंबन की कार्रवाई उच्चाधिकारियों द्वारा की गई है।