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लापरवाही पर हटाए गए फेफना रेंजर
Updated Sat, 08 Jul 2017 11:11 PM IST
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बलिया। नरही थाना क्षेत्र के भरौली स्थित प्रांतीय सीमा पर बिहार प्रांत से अवैध तरीके से लाल बालू लेकर आने वाले वाहनों के खिलाफ लापरवाही बरतने में डीएफओ ने फेफना के प्रभारी रेंजर पीएन राय को हटा दिया है। डीएफओ ने प्रांतीय सीमा पर हो रहे गड़बड़झाला को लेकर 35 दिनों में यह तीसरी कार्रवाई की है और हर कार्रवाई अमर उजाला के खुलासे के बाद हुई। कयास लगाए जा रहे हैं कि सीमा पर राजस्व का बंदरबांट करने के मामले में डीएफओ की ओर से कुछ और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। उधर, अमर उजाला के खुलासे पर करोड़ों के गोलमाल की जांच वन संरक्षक आजमगढ़ कर रहे हैं।
वर्ष 2007-08 में हाईकोर्ट के निर्देश पर वन उपज से अभिवहन शुल्क वसूली को प्रांतीय सीमाओं पर चेकपोस्ट स्थापित किया गया। हालांकि वर्ष 2012 में वैट लागू होने के चलते चेकपोस्ट समाप्त होने पर वन विभाग की ओर से प्रांतीय सीमाओं पर प्रवर्तन दल की तैनाती कर बिहार से आने वाले लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि पर अभिवहन शुल्क वसूल करने का काम जारी रहा। 12 मई 2014 को भरौली-बक्सर के बीच बने गंगा पुल पर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित होने के बाद वन विभाग ने प्रवर्तन दल को समाप्त कर दिया। प्रवर्तन दल हटाने पर गैर प्रांत से आने वाले वन उपज पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है। लेकिन यह काम तीन सालों में महज आठ-नौ वाहनों पर ही किया गया। जबकि पुल बंद होने के बाद भी छोटे वाहनों से लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि लाने का काम बड़े पैमाने पर चलता रहा।
सात जून को अवैध वसूली की धनराशि के बंटवारे को लेकर वनकर्मियों में रार हुई और इसका खुलासा अमर उजाला ने किया। मामला तूल पकड़ा तो डीएफओ ने वन दरोगा आरपी मौर्या को हटाकर केके सिंह और वनकर्मी राजकिशोर को तैनात कर दिया । जिसके बाद लाल बालू लेकर आने वाले वाहनों से राजस्व की वसूली शुरु हो गई। पांच दिन बाद ही सीमा पर फिर मनमानी का खुलासा हुआ तो क्षेत्र में पहुंचे राज्यमंत्री ने अफसरों को फटकारा तो डीएफओ ने फेफना के रेंजर सत्येन्द्र सिंह जो सिद्धार्थनगर स्थानांतरण के बावजूद यहां जमे थे उन्हें कार्यमुक्त कर दिया । इसके अलावा वनकर्मी राजकिशोर को सिकंदरपुर व केके सिंह को मनियर रेंज कार्यालय से सम्बद्ध करते हुए रसड़ा के रेंजर पीएन राय को जिम्मेदारी दी।
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नए रेंजर ने डीएफओ की ओर से हटाए वन दरोगा आरपी मौर्य को फिर सीमा पर तैनात कर दिया और नए तरीके से खेल शुरु हो गया। अमर उजाला ने वाहनों की संख्या कम दिखाकर राजस्व के गोलमाल करने और पूरी रात हो रहे खेल का एकबार फिर खुलासा किया तो पांच दिन पहले डीएफओ ने रात में सीमा का जायजा लिया और लाल बालू का आवक अवैध मानते हुए वसूली पर रोक लगाते हुए वाहनों को सीज कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। लेकिन इसके बाद भी कर्मचारी मनमानी करते रहे और अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में खुलासा किया तो डीएफओ ने रेंजर पीएन राय को हटा दिया। डीएफओ की मानें तो मामले की जांच की जा रही है, अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
वर्जन=
पुल बंद होने के कारण बिहार से लाल बालू का आवक पूरी तरह अवैध है, ऐसे वाहनों को सीज कर कार्रवाई का निर्देश दिया गया था। लेकिन इसके बावजूद इसमें लापरवाही बरती गई लिहाजा रेंजर को हटा दिया गया है और जांच कर अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
= राम अवतार सिंह
डीएफओ, बलिया
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वर्ष 2007-08 में हाईकोर्ट के निर्देश पर वन उपज से अभिवहन शुल्क वसूली को प्रांतीय सीमाओं पर चेकपोस्ट स्थापित किया गया। हालांकि वर्ष 2012 में वैट लागू होने के चलते चेकपोस्ट समाप्त होने पर वन विभाग की ओर से प्रांतीय सीमाओं पर प्रवर्तन दल की तैनाती कर बिहार से आने वाले लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि पर अभिवहन शुल्क वसूल करने का काम जारी रहा। 12 मई 2014 को भरौली-बक्सर के बीच बने गंगा पुल पर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित होने के बाद वन विभाग ने प्रवर्तन दल को समाप्त कर दिया। प्रवर्तन दल हटाने पर गैर प्रांत से आने वाले वन उपज पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है। लेकिन यह काम तीन सालों में महज आठ-नौ वाहनों पर ही किया गया। जबकि पुल बंद होने के बाद भी छोटे वाहनों से लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि लाने का काम बड़े पैमाने पर चलता रहा।
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सात जून को अवैध वसूली की धनराशि के बंटवारे को लेकर वनकर्मियों में रार हुई और इसका खुलासा अमर उजाला ने किया। मामला तूल पकड़ा तो डीएफओ ने वन दरोगा आरपी मौर्या को हटाकर केके सिंह और वनकर्मी राजकिशोर को तैनात कर दिया । जिसके बाद लाल बालू लेकर आने वाले वाहनों से राजस्व की वसूली शुरु हो गई। पांच दिन बाद ही सीमा पर फिर मनमानी का खुलासा हुआ तो क्षेत्र में पहुंचे राज्यमंत्री ने अफसरों को फटकारा तो डीएफओ ने फेफना के रेंजर सत्येन्द्र सिंह जो सिद्धार्थनगर स्थानांतरण के बावजूद यहां जमे थे उन्हें कार्यमुक्त कर दिया । इसके अलावा वनकर्मी राजकिशोर को सिकंदरपुर व केके सिंह को मनियर रेंज कार्यालय से सम्बद्ध करते हुए रसड़ा के रेंजर पीएन राय को जिम्मेदारी दी।
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नए रेंजर ने डीएफओ की ओर से हटाए वन दरोगा आरपी मौर्य को फिर सीमा पर तैनात कर दिया और नए तरीके से खेल शुरु हो गया। अमर उजाला ने वाहनों की संख्या कम दिखाकर राजस्व के गोलमाल करने और पूरी रात हो रहे खेल का एकबार फिर खुलासा किया तो पांच दिन पहले डीएफओ ने रात में सीमा का जायजा लिया और लाल बालू का आवक अवैध मानते हुए वसूली पर रोक लगाते हुए वाहनों को सीज कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। लेकिन इसके बाद भी कर्मचारी मनमानी करते रहे और अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में खुलासा किया तो डीएफओ ने रेंजर पीएन राय को हटा दिया। डीएफओ की मानें तो मामले की जांच की जा रही है, अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
वर्जन=
पुल बंद होने के कारण बिहार से लाल बालू का आवक पूरी तरह अवैध है, ऐसे वाहनों को सीज कर कार्रवाई का निर्देश दिया गया था। लेकिन इसके बावजूद इसमें लापरवाही बरती गई लिहाजा रेंजर को हटा दिया गया है और जांच कर अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
= राम अवतार सिंह
डीएफओ, बलिया