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चीफ फार्मासिस्ट ने सीएमओ को सौंपा पत्रक, जानमाल की लगाई गुहार
Updated Wed, 23 May 2018 11:33 PM IST
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बलिया।
दवा खरीद में हुए करोड़ों रुपये घोटाले के आरोपी और केंद्रीय औषधि केंद्र के चीफ फार्मासिस्ट रामकठिन राम ने सीएमओ को बुधवार को पत्रक सौंप जानमाल की गुहार लगाई। इसमें उल्लेख किया गया है कि चीफ फार्मासिस्ट सत्यप्रकाश सिंह के साथ कार्य करने में असमर्थ हूं।
पत्रक में उल्लेख किया है कि दवा घोटाले प्रकरण में उन्होंने 21 मई को फार्मासिस्ट सत्यप्रकाश सिंह से अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा था। जिसमें चार बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी गई थी। 23 मई को फार्मासिस्ट सत्यप्रकाश ने फोन करके सुबह नौ बजे मिलने की बात कही। जब उनसे उनके आवास पर मिला तो उन्होंने समस्त अभिलेखों के सत्यापन के लिए मेरे ऊपर दबाव बनाना शुरू कर दिया। कहा कि जब तक मुझे अभिलेख और स्टाक बुक उपलब्ध नहीं करा दिया जाता है, तब तक उसका सत्यापन करने में असमर्थ हूं। केंद्रीय औषधि केंद्र पर करीब एक बजे फार्मासिस्ट सत्यप्रकाश सिंह पहुंचे और मुझसे जबरदस्ती 2015-16 की पत्रावली का सत्यापन एक सादे कागजात पर हस्ताक्षर करा लिया, जो उनके हस्तलेख में था। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो जान से मारने की धमकी देते हुए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से यह कहकर गए कि इस स्टोर की चाभी मत देना है। आरोप लगाया कि सत्यप्रकाश सिंह की धमकी से जानमाल का खतरा पैदा हो गया है। इस पत्र की प्रतिलिपि डीएम, सीएमओ सहित अन्य अधिकारियों को दी गई है।
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दवा खरीद में हुए करोड़ों रुपये घोटाले के आरोपी और केंद्रीय औषधि केंद्र के चीफ फार्मासिस्ट रामकठिन राम ने सीएमओ को बुधवार को पत्रक सौंप जानमाल की गुहार लगाई। इसमें उल्लेख किया गया है कि चीफ फार्मासिस्ट सत्यप्रकाश सिंह के साथ कार्य करने में असमर्थ हूं।
पत्रक में उल्लेख किया है कि दवा घोटाले प्रकरण में उन्होंने 21 मई को फार्मासिस्ट सत्यप्रकाश सिंह से अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा था। जिसमें चार बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी गई थी। 23 मई को फार्मासिस्ट सत्यप्रकाश ने फोन करके सुबह नौ बजे मिलने की बात कही। जब उनसे उनके आवास पर मिला तो उन्होंने समस्त अभिलेखों के सत्यापन के लिए मेरे ऊपर दबाव बनाना शुरू कर दिया। कहा कि जब तक मुझे अभिलेख और स्टाक बुक उपलब्ध नहीं करा दिया जाता है, तब तक उसका सत्यापन करने में असमर्थ हूं। केंद्रीय औषधि केंद्र पर करीब एक बजे फार्मासिस्ट सत्यप्रकाश सिंह पहुंचे और मुझसे जबरदस्ती 2015-16 की पत्रावली का सत्यापन एक सादे कागजात पर हस्ताक्षर करा लिया, जो उनके हस्तलेख में था। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो जान से मारने की धमकी देते हुए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से यह कहकर गए कि इस स्टोर की चाभी मत देना है। आरोप लगाया कि सत्यप्रकाश सिंह की धमकी से जानमाल का खतरा पैदा हो गया है। इस पत्र की प्रतिलिपि डीएम, सीएमओ सहित अन्य अधिकारियों को दी गई है।
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