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21 वर्ष बाद आया फैसला
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Wed, 17 Dec 2014 10:53 PM IST
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जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गालीगलौज, मारपीट करने और आग लगाने के मामले में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए दो भाइयों को पांच-पांच वर्ष सश्रम कारावास तथा पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया है।
मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय विजेंद्र सिंह की अदालत में हुई। अभियोजन के अनुसार सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के मुड़ेरा गांव निवासी सुदर्शन राम ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि चार फरवरी 1993 को रात में दस बजे उसके सुअर बाड़ा में गांव के ही अशोक सिंह और प्रेम सिंह ने आग लगा दिया।
इससे उसका एक सुअर जल कर मर गया। पूछताछ करने पर उन लोगों ने धमकी दी कि मामले की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराओगे तो तुम्हें भी जलाकर मार डालेेंगे।
जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली देकर अपमानित किया। घटना की रिपोर्ट छह फरवरी 1993 को सिकंदरपुर थाने में दर्ज हुई। आरोप पत्र प्रेषित होने के बाद कोर्ट ने सुनवाई करते हुए 21 वर्ष बाद उक्त मामले के आरोपी अशोक सिंह और प्रेम सिंह को दोष साबित पाकर पांच- पांच वर्ष के सश्रम कारावास व पांच हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
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मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय विजेंद्र सिंह की अदालत में हुई। अभियोजन के अनुसार सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के मुड़ेरा गांव निवासी सुदर्शन राम ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि चार फरवरी 1993 को रात में दस बजे उसके सुअर बाड़ा में गांव के ही अशोक सिंह और प्रेम सिंह ने आग लगा दिया।
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इससे उसका एक सुअर जल कर मर गया। पूछताछ करने पर उन लोगों ने धमकी दी कि मामले की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराओगे तो तुम्हें भी जलाकर मार डालेेंगे।
जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली देकर अपमानित किया। घटना की रिपोर्ट छह फरवरी 1993 को सिकंदरपुर थाने में दर्ज हुई। आरोप पत्र प्रेषित होने के बाद कोर्ट ने सुनवाई करते हुए 21 वर्ष बाद उक्त मामले के आरोपी अशोक सिंह और प्रेम सिंह को दोष साबित पाकर पांच- पांच वर्ष के सश्रम कारावास व पांच हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
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