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Ballia News: जल्द शुरू होगा बलिया में मेडिकल कालेज का निर्माण, बजट में 27 करोड़ का इंतजाम

Thu, 20 Feb 2025 11:24 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 20 Feb 2025 11:24 PM IST
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Construction of medical college will start soon in Ballia, provision of Rs 27 crore in the budget
बलिया। काफी समय से जिले में मेडिकल काॅलेज खोलने की मांग को बृहस्पतिवार को आए प्रदेश सरकार के बजट से बल मिला है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सदन में बताया कि बलिया में राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए 27 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
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वित्त मंत्री की इस घोषणा से मेडिकल काॅलेज के पीपीपी माडल या राजकीय होने के संशय पर से भी बादल हट गए हैं। हालांकि मेडिकल काॅलेज को लेकर परिवहन मंत्री पहले ही आश्वासन दे चुके हैं। बलिया में पुरानी जेल, जिला और महिला अस्पताल की भूमि को मिलाकर मेडिकल काॅलेज का निर्माण किया जाना है। माना जा रहा है कि जल्द ही इसके निर्माण की घोषणा भी हो सकती है।
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जनपद में मेडिकल काॅलेज बनाने की मांग 10 वर्ष से चल रही है। वर्तमान प्रदेश सरकार में मेडिकल काॅलेज के निर्माण को लेकर संजीदगी दिखानी शुरू की गई। बलिदान दिवस पर जिले में आए सीएम और तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी ने इसको लेकर घोषणा भी की थी। निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया और शासन को भेजा गया। पहले शासन ने जिले में पीपीपी माॅडल पर मेडिकल काॅलेज बनाने का प्रस्ताव रखा था। स्थानीय जनप्रतिनिधि इसके विरोध में थे। खासतौर पर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह जिले में राजकीय मेडिकल कालेज बनवाना चाहते थे। पिछले दिनों कुंभ में हुई कैबिनेट की बैठक के दौरान परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह अपनी मांग को मनवाने में कामयाब रहे।
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टेबल बजाकर उसका जोरदार स्वागत : सदन में बृहस्पतिवार को प्रदेश सरकार का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने जब स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में बोलना शुरू किया तो उस समय परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के चेहरे की खुशी देखने लायक थी। सुरेश खन्ना ने घूम कर अपने पीछे बैठे दयाशंकर सिंह की तरफ देखकर बलिया में राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए 27 करोड़ का प्रावधान करने की बात कही तो उन्होंने टेबल बजाकर उसका जोरदार स्वागत किया।

विशेषज्ञ चिकित्सकों के न होने से होती है मौत : जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था काफी चरमराई हुई है। हादसे या गंभीर बीमारियों के पीड़ित मरीजों को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचते ही उन्हें हायर सेंटर के लिए वाराणसी रेफर कर दिया जाता है। स्थिति ये है कि मऊ और वाराणसी ले जाते समय उनकी मौत हो जाती है। आम लोगों की तो छोड़िये अर्बन पीएचसी पर तैनात डाॅ. राघवेंद्र सिंह को सही समय पर इलाज न मिलने से मऊ ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई थी। उस समय चिकित्सकों ने बताया था कि अगर आईसीयू वार्ड रहता तो डाॅ. राघवेन्द्र को बचाया जा सकता था। ट्रामा सेंटर में पांच बेड का वेंटिलेटर चालू किया गया था, लेकिन ताला बंद होने से आम मरीजों को इसका लाभ नहीं मिलता है।
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