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चीनी मिल के बंद होने से कर्मचारी और किसान परेशान
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
Updated Sun, 24 Apr 2016 10:38 PM IST
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रसड़ा चीनी मिल
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क्षेत्र के माधवपुर गांव स्थित दी किसान चीनी मिल रसड़ा शासन-प्रशासन की उदासीनता के कारण इन दिनों खुद पर आंसू बहाने को विवश है वहीं यहां तैनात कर्मचारियों को पिछले 32 माह से वेतन नहीं मिला है। जिसके चलते 43 परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।
शासन की उदासीनता के चलते 16 जनवरी 2013 को मिल बंद हो गई। जिस पर कर्मचारियों और क्षेत्रीय लोगों ने सड़क से सदन तक आवाज उठाई लेकिन काई फायदा नहीं हुआ।इस चीनी मिल की नींव 1974 में रखी गई थी।
जिसका उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 16 जनवरी 1975 को किया। इसमें 569 अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत थे। लेकिन शासन की उदासीनता के चलते 16 जनवरी 2013 को बंद कर दिया गया। जिसके कारण वर्तमान में 43 कर्मचारियों का परिवार भुखमरी के कगार पर चल रहा है। जबकि शेष 526 कर्मचारी एक -एक कर सेवानिवृत्त हो गए।
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चीनी मिल 2010 तक बहुत ही अच्छे ढंग से चली। इसके बाद से 2013 तक मिल कभी खुलती तो कभी बंद रहती और 16 जनवरी 2013 को इसे बंद कर दिया गया। कुछ ऐसे परिवार भी हैं जो आश्रय खो जाने से और आर्थिक तंगी के कारण सुई-दवा से लेकर भोजन तक के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।
सूबे के मुखिया अखिलेश यादव ने बलिया आगमन के दौरान चीनी मिल चालू कराने का आश्वासन दिया था। बावजूद अब तक न तो चीनी मिल ही चालू की गई और न ही कर्मचारियों का बकाया वेतन ही दिया गया।
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शासन की उदासीनता के चलते 16 जनवरी 2013 को मिल बंद हो गई। जिस पर कर्मचारियों और क्षेत्रीय लोगों ने सड़क से सदन तक आवाज उठाई लेकिन काई फायदा नहीं हुआ।इस चीनी मिल की नींव 1974 में रखी गई थी।
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जिसका उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 16 जनवरी 1975 को किया। इसमें 569 अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत थे। लेकिन शासन की उदासीनता के चलते 16 जनवरी 2013 को बंद कर दिया गया। जिसके कारण वर्तमान में 43 कर्मचारियों का परिवार भुखमरी के कगार पर चल रहा है। जबकि शेष 526 कर्मचारी एक -एक कर सेवानिवृत्त हो गए।
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चीनी मिल 2010 तक बहुत ही अच्छे ढंग से चली। इसके बाद से 2013 तक मिल कभी खुलती तो कभी बंद रहती और 16 जनवरी 2013 को इसे बंद कर दिया गया। कुछ ऐसे परिवार भी हैं जो आश्रय खो जाने से और आर्थिक तंगी के कारण सुई-दवा से लेकर भोजन तक के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।
सूबे के मुखिया अखिलेश यादव ने बलिया आगमन के दौरान चीनी मिल चालू कराने का आश्वासन दिया था। बावजूद अब तक न तो चीनी मिल ही चालू की गई और न ही कर्मचारियों का बकाया वेतन ही दिया गया।