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UP: गांव में जश्न...दो सगे भाइयों के कंधों पर चमके भारतीय सेना के सितारे, गया और चेन्नई से मिला कमीशन; खुशी

Sat, 07 Mar 2026 07:39 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, बलिया।
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sat, 07 Mar 2026 07:39 PM IST
सार

Ballia News: बलिया के अगउर गांव में रहने वाले पूर्व सूबेदार मेजर लल्लन मिश्र का परिवार तीन पीढ़ियों से भारतीय सेना में सेवा दे रहा है। पोते को जब ये सम्मान मिला तो दादा खुशी से फूले नहीं समा रहे थे। वहीं गांव में जश्न का माहाैल बन गया।

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Celebration Indian Army stars shine on shoulders of two brothers commissioned Gaya and Chennai
दीपक और कृष्ण कुमार को मिला सम्मान। - फोटो : संवाद

विस्तार

UP News: बांसडीह क्षेत्र के अगउर गांव के लिए शनिवार का दिन गर्व और इतिहास का साक्षी बन गया। गांव निवासी पूर्व सूबेदार मेजर लल्लन मिश्र के दो पोते एक ही दिन अलग-अलग सैन्य अकादमियों की पासिंग आउट परेड में शामिल होकर भारतीय सेना में अधिकारी बन गए। बड़े भाई दीपक कुमार मिश्र को ओटीए गया से, जबकि छोटे भाई कृष्ण कुमार मिश्र को ओटीए चेन्नई से कमीशन मिला। एक ही दिन दो सगे भाइयों के सेना में अफसर बनने की यह उपलब्धि पूरे जिले के लिए गौरव का विषय बन गई है।

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इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए परिवार के सदस्य भी दो अलग-अलग शहरों में मौजूद रहे। ओटीए गया में प्रशिक्षण ले रहे दीपक की पासिंग आउट परेड में शामिल होने उनके पिता तारकेश्वर मिश्र और दादी मानमती मिश्रा पहुंचे। वहीं चेन्नई स्थित ओटीए में प्रशिक्षण ले रहे कृष्ण कुमार मिश्र को कंधे पर स्टार लगाने के लिए उनकी मां शकुंतला मिश्रा, छोटी बहन नंदिनी मिश्रा वहां मौजूद रहीं।

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सिकंदराबाद में रहता है परिवार
मूल रूप से बांसडीह तहसील के अगउर गांव के निवासी तारकेश्वर मिश्र का परिवार फिलहाल सिकंदराबाद में रहता है। तारकेश्वर मिश्र भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (ईएमई) में कैप्टन पद से सेवानिवृत्त हैं। वहीं उनके पिता लल्लन मिश्र भी सेना में सूबेदार मेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इस प्रकार यह परिवार की तीसरी पीढ़ी है, जिसने देश सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सेना में अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया है।

दीपक मिश्र ने कंप्यूटर साइंस में की एमएससी
बड़े भाई दीपक कुमार मिश्र ने कंप्यूटर साइंस में एमएससी की पढ़ाई की है। सेना में जाने से पहले वह एक आईटी कंपनी में कार्यरत थे। असफलताओं के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और लगातार प्रयास करते रहे। आखिरकार सफलता पाकर उन्होंने सेना में अफसर बनने का सपना साकार कर लिया।

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निजी कंपनी में नौकरी की
छोटे भाई कृष्ण कुमार मिश्र ने बीटेक करने के बाद एक निजी कंपनी में नौकरी की, लेकिन सेना में सेवा देने की चाह ने उन्हें लगातार प्रेरित किया। उन्होंने चौथे प्रयास में सफलता हासिल कर अधिकारी बनने का गौरव पाया।

गांव में जश्न का माहौल
दोनों भाइयों की इस उपलब्धि से गांव और क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल है। गांव में रह रहे उनके चाचा नीरज मिश्रा, चाची उत्तम मिश्रा, छोटी चाची ज्योति मिश्रा, चचेरे भाई और बहन शुभम मिश्रा व शिवानी मिश्रा ने बताया कि दोनों भाइयों की सफलता से पूरे गांव के लोग बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक ही परिवार के दो सगे भाइयों का एक ही दिन अलग-अलग सैन्य अकादमियों से अधिकारी बनना युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है। एक ही दिन दो बेटों के कंधों पर चमके सितारे ने न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का मान बढ़ा दिया है।

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