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अभी जेल में ही रहेगा सीबी सीआईडी इंस्पेक्टर

Thu, 10 Sep 2015 11:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला बलिया
ब्यूरो/अमर उजाला बलिया Updated Thu, 10 Sep 2015 11:05 PM IST
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CBCID inspector who remain in jail
करीब 20 वर्ष पहले 1995 में लाकअप में हत्या के एक मामले में सीबीसीआईडी वाराणसी शाखा के इंस्पेक्टर संतोष द्विवेदी की जमानत पर सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम अश्विनी कुमार सिंह की अदालत ने अर्जी खारिज कर दी।
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वर्तमान सीबीसीआईडी के इंस्पेक्टर संतोष द्विवेदी साल 1995 में गड़वार थाने में एसओ थे। आरोप है कि उस दौरान उन्होंने गड़वार थाने के बुढ़ऊ कुरेजी निवासी देवेंद्र सिंह को घर से थाने लाकर बेरहमी से मारापीटा। इससे उसकी मृत्यु हो गई थी।
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आनन-फानन में संतोष द्विवेदी ने उसके बड़े भाई को बुलाकर उसका पोस्टमार्टम कराने के बाद जबरिया दाह संस्कार करवाया। मामले में बड़े भाई वीरेंद्र सिंह ने तत्कालीन जिलाधिकारी हरिराम को प्रार्थनापत्र दिया था। जिलाधिकारी के आदेश पर एसओ सहित पांच पुलिसकर्मियों पर मुकदमा पंजीकृत हुआ। 
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न्याय न मिलता देख वीरेंद्र ने  मानवाधिकार आयोग के पास गुहार लगाई। आयोग ने मामले की सीबीसीआईडी से जांच कराने का आदेश दिया। सीबीसीआईडी ने एसओ संतोष द्विवेदी सहित दस पुलिस कर्मियों के विरुद्ध आरोप पत्र प्रेषित किया। मामले में एसओ को छोड़ बाकी नौ ने जमानत करा ली थी।

जबकि  तत्कालीन एसओ ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर अपने विरुद्ध मामला नहीं बनने की गुहार लगाई। इस पर उच्च न्यायालय ने एसओ के  प्रार्थनापत्र पर सुनवाई करने का आदेश संबंधित कोर्ट को दिया। कोर्ट ने एसओ के प्रार्थनापत्र पर सुनवाई करते हुए प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया।

इंस्पेक्टर ने कोर्ट को धोखे में रखकर बिना जमानत कराए अपने उक्त मुकदमे में अपना आरोप समाप्त करा लिया। वादी वीरेंद्र सिंह ने अपने अधिवक्ता संजीव सिंह के माध्यम से पत्रावली का अवलोकन कराया तो इसकी जानकारी हुई।


कोर्ट ने सुनवाई करते हुए अभियुक्त संतोष द्विवेदी से स्पष्टीकरण के साथ कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया।आरोपी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। इस पर कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया। पिछले गुरुवार को अभियुक्त अदालत में आत्मसमर्पण किया। कोर्ट ने जेल भेज दिया था। गुरुवार को संतोष द्विवेदी की जमानत पर बहस सुनने के बाद कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दिया। 
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