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रजिस्ट्री कार्यालय के कर्मचारी समेत 30 पर धोखाधड़ी का केस दर्ज

Fri, 01 Nov 2019 11:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 01 Nov 2019 11:45 PM IST
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Case registered for cheating 30 including employees of registry office
बलिया। सदर रजिस्ट्री कार्यालय में दस्तावेजों में फेरबदल कर जमीन नामांतरण कराने के मामले में प्रभारी उप निबंधन लक्ष्मण चौबे ने रजिस्ट्री कार्यालय के सहायक उप निबंधक, कर्मचारी, भूखंडों के क्रेता, गवाह और दस्तावेज लेखक समेत कुल 30 लोगों के खिलाफ शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। इससे पहले 21 अक्तूबर सदर रजिस्ट्री कार्यालय में 1981 से 2019 के बीच तैनात रहे तीन प्रभारी समेत कुल 13 उपनिबंधकों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया था।
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प्रभारी उपनिबंधक सदर लक्ष्मण चौबे ने तीस अक्तूबर को शहर कोतवाली में रजिस्ट्री कार्यालय के कर्मचारियों समेत 30 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। इसमें उप निबंधन कार्यालय के तत्कालीन सहायक निबंधन मेराज खान के अलावा दीपनारायण, प्रमोद कुमार तिवारी, लाइसेंस धारक महेश्वर प्रसाद व राजकुमार प्रसाद आरोपी बनाए गए हैं। इसके अलावा फर्जी व कूटरचित बैनामा तैयार करने में क्रेता और गवाह राजेश्वर ठाकुर संरक्षिका माता बाल्मिकी देेवी, सच्चिदानंद सिंह संरक्षक भुवनेश्वर सिंह, दीनानाथ, देवनाथ सिंह, कौशल कुमार सिंह, जयराम सिंह, जिलाल प्रसाद, भुवनेश्वर सिंह, हरिहर सिंह, कालिका सिंह, धीरेंद्र राय, विश्वनाथ ठाकुर, परमेश्वर, अब्दुल खान, मतीन खान, शेेख अब्दुल्ला, ओमप्रकाश तिवारी, त्रिलोकी नाथ, दूधनाथ सिंह, जितेंद्र मिश्रा, नागेश्वर, अशोक सिंह संरक्षक राजदेव सिंह पुत्र स्व. धर्मदेव सिंह, अमिका यादव, केंदार यादव आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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क्या था मामला : बलिया। दस्तावेजों में फेरबदल कर जमीन का नामांतरण करने का मामला सामने आने पर जिलाधिकारी की ओर से गठित तीन सदस्यीय टीम ने जांच की तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ी उजागर हुई। यह सामने आया कि पिछले कई महीनों में वर्ष 1981 के दस्तावेज देकर सदर तहसील कार्यालय में नामांतरण कराया गया। एसडीएम सदर अश्वनी कुमार श्रीवास्तव ने मामले की गहन जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद डीएम ने संयुक्त मजिस्ट्रेट व एसडीएम रसड़ा विपिन कुमार जैन, सहायक महानिरीक्षक स्टांप महेंद्र प्रताप यादव और एसटीओ प्रकाश सिंह की टीम बनाकर जांच की जिम्मेदारी दी। जांच में पीड़ितों ने भी सहयोग दिया। जांच में यह बात सामने आई कि कई दस्तावेजों के पेज पुराने हैं लेकिन स्याही नई है, लिखावट अलग है, जाली हस्ताक्षर किए गए हैं, पृष्ठ पर किसी अन्य का नाम मिटा कर नया नाम लिखा गया है और निरक्षर व्यक्ति का हस्ताक्षर किया गया है। टीम ने रिपोर्ट में फर्जी क्रय विक्रय में संलिप्त व्यक्तियों तथा कार्यालय में कार्यरत अधिकारी व समस्त कर्मचारियों के खिलाफ सरकारी अभिलेखों से छेड़छाड़, फर्जी दस्तावेज निर्माण आदि से संबंधित आपराधिक कार्रवाई के लिए प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने की संस्तुति की। डीएम के आदेश पर प्रभारी उपनिबंधक सदर लक्ष्मण चौबे ने 21 अक्तूबर को 1981 से 2019 के बीच प्रभारी निबंधक रहे तीन लोगों समेत कुल 13 उपनिबंधकों पर धोखाधड़ी आदि का मुकदमा दर्ज कराया था।
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