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Ballia News: पूर्व डीआईओएस और चार लिपिक पर नियुक्ति पत्रावली गायब करने का केस दर्ज
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बलिया। जनपद के 44 स्कूलों के 179 शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति पत्रावली गायब करने के मामले में पूर्व डीआईओएस सहित पांच पर मुकदमा दर्ज हुआ है। जिला विद्यालय निरीक्षक देवेन्द्र कुमार गुप्ता की तहरीर पर सदर कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन डीआईओएस रमेश सिंह, संजय कुमार कुंवर लिपिक, लिपिक अजय सिंह, उर्दू अनुवादक मैनुद्दीन, प्रधान लिपिक शिवानन्द तिवारी पर मुकदमा दर्ज किया है।
डीआईओएस रमेश गुप्ता ने आरोप लगाया कि तत्कालीन डीआईओएस रमेश सिंह जिले में दो वर्ष के कार्यकाल में 32 इंटर काॅलेज व 12 सांस्कृतिक माध्यमिक तथा अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में चार प्रवक्ता, 80 सहायक अध्यापक, चार लिपिक, 10 सहायक लिपिक और 81 परिचारक की फर्जी एवं अनियमित नियुक्ति कर राजकोष से करोड़ों भुगतान किया जा रहा था।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को भी इसकी रिपोर्ट प्रेषित थी। उक्त की पत्रावली के संबंध में पूछताछ करने पर संंबंधित पटल सहायकों द्वारा कार्यालय में मूल पत्रावली उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी। वित्त एवं लेखाधिकारी माध्यमिक शिक्षा बलिया एवं लेखाकारों से उक्त भुगतान से संंबंध में पूछताछ करने पर वेतन अनुमन्यता आदेश अधोहस्ताक्षरी को उपलब्ध कराया गया। प्राप्त अनुमन्यता आदेश के परीक्षण में यह पाया गया कि रमेश सिंह के साथ उक्त पटल सहायकों द्वारा आदेशों पर अपना लघु हस्ताक्षर किया गया है। इन्हें बार-बार नोटिस देने पर मात्र 15 पत्रवालियां ही उपलब्ध कराई गईं। शेष अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है।
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तत्कालीन डीआईएसओ रमेश सिंह एवं उक्त कर्मचारियों ने विद्यालय के प्रबंधक और प्रधानाचार्य की मिलीभगत कर वेतन भुगतान का आदेश जारी कर कोषागार से करोड़ों रुपये का भुगतान कराया है। साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से उक्त पत्रावलियां गायब की गईं। इस स्कैंडल में रमेश सिंह के साथ उक्त सभी सम्मिलित हैं। संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ मण्डल द्वारा मूल पत्रावली उपलब्ध नहीं होने की दशा में दोषी अधिकारी और कर्मचारी के विरुद्ध सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए निर्देशित किया है। कोतवाल योगेन्द्र बहादुर सिंह ने कहा कि शिकायत पर अधिकारी व कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच की जा रही है।
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डीआईओएस रमेश गुप्ता ने आरोप लगाया कि तत्कालीन डीआईओएस रमेश सिंह जिले में दो वर्ष के कार्यकाल में 32 इंटर काॅलेज व 12 सांस्कृतिक माध्यमिक तथा अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में चार प्रवक्ता, 80 सहायक अध्यापक, चार लिपिक, 10 सहायक लिपिक और 81 परिचारक की फर्जी एवं अनियमित नियुक्ति कर राजकोष से करोड़ों भुगतान किया जा रहा था।
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माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को भी इसकी रिपोर्ट प्रेषित थी। उक्त की पत्रावली के संबंध में पूछताछ करने पर संंबंधित पटल सहायकों द्वारा कार्यालय में मूल पत्रावली उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी। वित्त एवं लेखाधिकारी माध्यमिक शिक्षा बलिया एवं लेखाकारों से उक्त भुगतान से संंबंध में पूछताछ करने पर वेतन अनुमन्यता आदेश अधोहस्ताक्षरी को उपलब्ध कराया गया। प्राप्त अनुमन्यता आदेश के परीक्षण में यह पाया गया कि रमेश सिंह के साथ उक्त पटल सहायकों द्वारा आदेशों पर अपना लघु हस्ताक्षर किया गया है। इन्हें बार-बार नोटिस देने पर मात्र 15 पत्रवालियां ही उपलब्ध कराई गईं। शेष अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है।
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तत्कालीन डीआईएसओ रमेश सिंह एवं उक्त कर्मचारियों ने विद्यालय के प्रबंधक और प्रधानाचार्य की मिलीभगत कर वेतन भुगतान का आदेश जारी कर कोषागार से करोड़ों रुपये का भुगतान कराया है। साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से उक्त पत्रावलियां गायब की गईं। इस स्कैंडल में रमेश सिंह के साथ उक्त सभी सम्मिलित हैं। संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ मण्डल द्वारा मूल पत्रावली उपलब्ध नहीं होने की दशा में दोषी अधिकारी और कर्मचारी के विरुद्ध सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए निर्देशित किया है। कोतवाल योगेन्द्र बहादुर सिंह ने कहा कि शिकायत पर अधिकारी व कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच की जा रही है।