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Ballia News: तीन सेवानिवृत्त एक्सईएन, एई और जेई पर मुकदमा
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सीवर लाइन परियोजना में अनियमितता में तीन सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता, एक सेवानिवृत्त एई व एक जेई पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। आरोपी भूमिगत हो गए हैं। सीवर परियोजना के भौतिक सत्यापन के लिए जल निगम निदेशालय की ओर से आठ सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है। टीम बुधवार को देर शाम तक जिले में पहुंच गई। टीम से 25 अगस्त तक सीवर कार्यों की सत्यापन रिपोर्ट मांगी गई है।
शहर में वर्ष 2006-07 में 97.22 करोड़ की सीवर परियोजना शुरुआत हुई। इस धनराशि से सीवर व एसटीपी का निर्माण होना था। शहर को दो भागों में बांट कर सीवर लाइन निर्माण किया जाना था। सिटी जोन में 27.90 करोड़ से काम होना था। बाद में इसकी पुनरीक्षित लागत 52.2272 करोड़ हो गई। इसके लिए 49.1038 करोड़ की धनराशि अवमुक्त की गई। सिविल लाइन जोन में 44.7231 करोड़ से काम होना था। इसकी पुनरीक्षित लागत 52.2272 करोड़ हो गई। निर्माण के लिए जल निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया गया और विभाग ने मेसर्स ज्योति बिल्डर को इस कार्य का ठेका दे दिया।
परियोजना में ठेका देने से लेकर निर्माण तक में अनियमिता की बात सामने आई। इस पर वर्ष 2018 में जल निगम निदेशालय ने इसकी टीएसी जांच कराई। जांच में सामने आया कि बलिया सीवरेज योजना सिटी जोन में कुल लागत 27.90 लाख करोड़ की जगह 52 2272 करोड़ की गई है। 12 वर्ष के बाद 100 करोड़ खर्च करने के बावजूद योजना पूर्ण नहीं हो सकी।
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सीवरेज परियोजना सिविल लाइन जोन की बाबत आईआईटी बीएचयू के निर्देश के अनुसार रीइन्फोर्समेंट की स्पेसिंग सही करने के लिए समस्त एसटीपी ध्वस्त करते हुए फिर कार्य करने के लिए संबंधित फर्म ज्योति बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड को निर्देशित किया गया। लेकिन फर्म ने इस पर अमल नहीं किया। इतना ही नहीं, आईआईटी बीएचयू की रिपोर्ट के बाद भी खंड स्तर पर कार्यरत अभियंताओं द्वारा कार्य कराए गए एवं भुगतान किया गया, जो कि दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
जांच समिति के अनुसार, तत्कालीन अधिशासी अभियंता (अब सेवानिवृत्त) फणींद्र राय के कृत्यों से यूआईडीएसएस एमटी कार्यक्रम के तहत 9 करोड़ 55 लाख 39 हजार 407 रुपए 50 पैसे व राज्य सेक्टर सीवरेज योजना कार्यक्रम के तहत 91,33,850 रुपये की क्षति हुई।
इसी तरह तत्कालीन अधिशासी अभियंता (अब सेवानिवृत्त) कमलेश सिंह के कृत्यों से यूआईडीएसएस एमटी कार्यक्रम के तहत 725.33 लाख की क्षति हुई। तत्कालीन सहायक अभियंता एसएन राय (अब सेवानिवृत्त) के कृत्यों से 13.82 लाख का नुकसान हुआ। इसके अलावा तत्कालीन अधिशासी अभियंता (अब सेवानिवृत्त) अशोक कुमार श्रीवास्तव व जेई आजमगढ़ नीरज कुमार पांडेय को दोषी माना गया। मुख्य अभियंता कार्मिक जल निगम के निर्देश पर जल निगम नगरीय के अधिशासी अभियंता अंकुर श्रीवास्तव ने पांचों के खिलाफ वित्तीय अनियमितता का मुकदमा दर्ज कराया है।
छह कार्यदायी संस्थाओं पर मुकदमा
अमृत योजना में अनियमितता पर हुई कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बलिया। अमृत योजना में अनियमितता में छह कार्यदायी संस्थाओं पर भी मुकदमा दर्ज कराया गया है। इससे पहले अधिशासी अभियंता समेत 18 के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।
सीवर परियोजना के अमृत कार्यक्रम के तहत स्वीकृत जिले की नगरपालिका परिषद में सीवर लाइन हाउस कनेक्शन कार्य से संबंधित परियोजना के अंतर्गत पूर्व में कराए गए कार्यों की जांच प्रबंध निदेशक जल निगम की ओर से समिति गठित कर कराई गई। समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 6.58 करोड़ की धनराशि जारी की गई थी। इसके सापेक्ष 16 करोड़ 12 लाख 97 हजार का भुगतान फर्म को किया जा चुका है। इसके लिए 10 करोड़ 42 लाख 47 हजार का भुगतान अन्य योजनाओं से फंड डायवर्ट कर किया गया। जबकि इस मामले में किसी सक्षम से स्वीकृति के संबंध में कोई अभिलेख प्राप्त नहीं हो सका। योजना के तहत कराए गए कार्यों की गुणवत्ता नियंत्रण के लिए टेस्ट रिपोर्ट आदि भी नहीं मिल सकी। सीवर हाउस कनेक्टिंग चैंबर्स एवं अन्य कार्यों के लिए भुगतान की संख्या एवं उपलब्ध सूची में काफी अंतर मिला। स्थलीय सत्यापन के दौरान कार्यस्थल पर कार्यों को चिह्नित नहीं किया जा सका, जो अनियमितता अथवा रिकॉर्ड के रखरखाव में लापरवाही प्रदर्शित करता है। समिति द्वारा योजना के तहत कराए गए कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया गया, जिसमें कुल 4281 हाउस कनेक्शन की तुलना में 2334 हाउस कनेक्शन चैंबर मौके पर मिले। इसके अतिरिक्त 988 हाउस कनेक्टिंग चैंबर की लोकेशन चिह्नित ही नहीं की जा सकी। जांच आख्या के अनुसार योजना के कार्यों में अनियमित रूप से भुगतान किया गया तथा निर्धारित सीवर हाउस कनेक्टिंग चेंबर की तुलना में कम सीवर हाउस कनेक्शन किए गए। टीम ने योजना में अत्यधिक खर्च के लिए पांच फर्मों को दोषी मानते हुए रिपोर्ट दी। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जल निगम नगरीय के अधिशासी अभियंता ने निर्धारित फर्म मे. विद्युत कुमार जैन लखनऊ, मे. ताहिर लखनऊ, मे. कार्तिकेय कं लखनऊ, मे. श्रीराम कं. लखनऊ, मे. ताहिर कं. लखनऊ व मे.रामेश्वर सिंह बलिया पर वित्तीय अनियमितता का मुकदमा दर्ज कराया है।
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बनाई गई जांच कमेटी
बलिया। जल निगम के प्रबंध निदेशक राकेश कुमार मिश्र ने जिले में हुए सीवर घोटाला के संबंध में मुकदमा दर्ज कराने के बाद सीवर परियोजना का भौतिक सत्यापन कराने के लिए आठ सदस्य टीम गठित की है। एमडी ने टीम को 23 अगस्त को बलिया पहुंच कर सत्यापन करने व 25 अगस्त तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। टीम में जल निगम नगरीय लखनऊ के मुख्य अभियंता संजय कुमार गौतम, प्रयागराज जल निगम नगरीय के मुख्य अभियंता एसी दुबे, जल निगम ग्रामीण मेरठ क्षेत्र के मुख्य अभियंता संजय कुमार वर्मन, सिंचाई विभाग ड्रेनेज सर्किल बलिया के अधीक्षण अभियंता भानु प्रताप सिंह, जल निगम अयोध्या के अधीक्षण अभियंता पंकज यादव, जल निगम नगरीय आगरा के अधीक्षण अभियंता आरके पंकज, जल निगम नगरीय गोरखपुर के अधीक्षण अभियंता रतनसेन सिंह व नगर पालिका परिषद बलिया के प्रभारी अधिशासी अधिकारी व एसडीएम अखिलेश कुमार यादव शामिल हैं।
कोट...
उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सीवर परियोजना में हुई वित्तीय अनियमितता के संबंध में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसके अलावा अमृत योजना में हुई वित्तीय अनियमितता में फर्मों के खिलाफ भी मुकदमा कराया गया है।
- अंकुर श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता, जल निगम, नगरीय, बलिया।
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शहर में वर्ष 2006-07 में 97.22 करोड़ की सीवर परियोजना शुरुआत हुई। इस धनराशि से सीवर व एसटीपी का निर्माण होना था। शहर को दो भागों में बांट कर सीवर लाइन निर्माण किया जाना था। सिटी जोन में 27.90 करोड़ से काम होना था। बाद में इसकी पुनरीक्षित लागत 52.2272 करोड़ हो गई। इसके लिए 49.1038 करोड़ की धनराशि अवमुक्त की गई। सिविल लाइन जोन में 44.7231 करोड़ से काम होना था। इसकी पुनरीक्षित लागत 52.2272 करोड़ हो गई। निर्माण के लिए जल निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया गया और विभाग ने मेसर्स ज्योति बिल्डर को इस कार्य का ठेका दे दिया।
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परियोजना में ठेका देने से लेकर निर्माण तक में अनियमिता की बात सामने आई। इस पर वर्ष 2018 में जल निगम निदेशालय ने इसकी टीएसी जांच कराई। जांच में सामने आया कि बलिया सीवरेज योजना सिटी जोन में कुल लागत 27.90 लाख करोड़ की जगह 52 2272 करोड़ की गई है। 12 वर्ष के बाद 100 करोड़ खर्च करने के बावजूद योजना पूर्ण नहीं हो सकी।
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सीवरेज परियोजना सिविल लाइन जोन की बाबत आईआईटी बीएचयू के निर्देश के अनुसार रीइन्फोर्समेंट की स्पेसिंग सही करने के लिए समस्त एसटीपी ध्वस्त करते हुए फिर कार्य करने के लिए संबंधित फर्म ज्योति बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड को निर्देशित किया गया। लेकिन फर्म ने इस पर अमल नहीं किया। इतना ही नहीं, आईआईटी बीएचयू की रिपोर्ट के बाद भी खंड स्तर पर कार्यरत अभियंताओं द्वारा कार्य कराए गए एवं भुगतान किया गया, जो कि दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
जांच समिति के अनुसार, तत्कालीन अधिशासी अभियंता (अब सेवानिवृत्त) फणींद्र राय के कृत्यों से यूआईडीएसएस एमटी कार्यक्रम के तहत 9 करोड़ 55 लाख 39 हजार 407 रुपए 50 पैसे व राज्य सेक्टर सीवरेज योजना कार्यक्रम के तहत 91,33,850 रुपये की क्षति हुई।
इसी तरह तत्कालीन अधिशासी अभियंता (अब सेवानिवृत्त) कमलेश सिंह के कृत्यों से यूआईडीएसएस एमटी कार्यक्रम के तहत 725.33 लाख की क्षति हुई। तत्कालीन सहायक अभियंता एसएन राय (अब सेवानिवृत्त) के कृत्यों से 13.82 लाख का नुकसान हुआ। इसके अलावा तत्कालीन अधिशासी अभियंता (अब सेवानिवृत्त) अशोक कुमार श्रीवास्तव व जेई आजमगढ़ नीरज कुमार पांडेय को दोषी माना गया। मुख्य अभियंता कार्मिक जल निगम के निर्देश पर जल निगम नगरीय के अधिशासी अभियंता अंकुर श्रीवास्तव ने पांचों के खिलाफ वित्तीय अनियमितता का मुकदमा दर्ज कराया है।
छह कार्यदायी संस्थाओं पर मुकदमा
अमृत योजना में अनियमितता पर हुई कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बलिया। अमृत योजना में अनियमितता में छह कार्यदायी संस्थाओं पर भी मुकदमा दर्ज कराया गया है। इससे पहले अधिशासी अभियंता समेत 18 के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।
सीवर परियोजना के अमृत कार्यक्रम के तहत स्वीकृत जिले की नगरपालिका परिषद में सीवर लाइन हाउस कनेक्शन कार्य से संबंधित परियोजना के अंतर्गत पूर्व में कराए गए कार्यों की जांच प्रबंध निदेशक जल निगम की ओर से समिति गठित कर कराई गई। समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 6.58 करोड़ की धनराशि जारी की गई थी। इसके सापेक्ष 16 करोड़ 12 लाख 97 हजार का भुगतान फर्म को किया जा चुका है। इसके लिए 10 करोड़ 42 लाख 47 हजार का भुगतान अन्य योजनाओं से फंड डायवर्ट कर किया गया। जबकि इस मामले में किसी सक्षम से स्वीकृति के संबंध में कोई अभिलेख प्राप्त नहीं हो सका। योजना के तहत कराए गए कार्यों की गुणवत्ता नियंत्रण के लिए टेस्ट रिपोर्ट आदि भी नहीं मिल सकी। सीवर हाउस कनेक्टिंग चैंबर्स एवं अन्य कार्यों के लिए भुगतान की संख्या एवं उपलब्ध सूची में काफी अंतर मिला। स्थलीय सत्यापन के दौरान कार्यस्थल पर कार्यों को चिह्नित नहीं किया जा सका, जो अनियमितता अथवा रिकॉर्ड के रखरखाव में लापरवाही प्रदर्शित करता है। समिति द्वारा योजना के तहत कराए गए कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया गया, जिसमें कुल 4281 हाउस कनेक्शन की तुलना में 2334 हाउस कनेक्शन चैंबर मौके पर मिले। इसके अतिरिक्त 988 हाउस कनेक्टिंग चैंबर की लोकेशन चिह्नित ही नहीं की जा सकी। जांच आख्या के अनुसार योजना के कार्यों में अनियमित रूप से भुगतान किया गया तथा निर्धारित सीवर हाउस कनेक्टिंग चेंबर की तुलना में कम सीवर हाउस कनेक्शन किए गए। टीम ने योजना में अत्यधिक खर्च के लिए पांच फर्मों को दोषी मानते हुए रिपोर्ट दी। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जल निगम नगरीय के अधिशासी अभियंता ने निर्धारित फर्म मे. विद्युत कुमार जैन लखनऊ, मे. ताहिर लखनऊ, मे. कार्तिकेय कं लखनऊ, मे. श्रीराम कं. लखनऊ, मे. ताहिर कं. लखनऊ व मे.रामेश्वर सिंह बलिया पर वित्तीय अनियमितता का मुकदमा दर्ज कराया है।
बनाई गई जांच कमेटी
बलिया। जल निगम के प्रबंध निदेशक राकेश कुमार मिश्र ने जिले में हुए सीवर घोटाला के संबंध में मुकदमा दर्ज कराने के बाद सीवर परियोजना का भौतिक सत्यापन कराने के लिए आठ सदस्य टीम गठित की है। एमडी ने टीम को 23 अगस्त को बलिया पहुंच कर सत्यापन करने व 25 अगस्त तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। टीम में जल निगम नगरीय लखनऊ के मुख्य अभियंता संजय कुमार गौतम, प्रयागराज जल निगम नगरीय के मुख्य अभियंता एसी दुबे, जल निगम ग्रामीण मेरठ क्षेत्र के मुख्य अभियंता संजय कुमार वर्मन, सिंचाई विभाग ड्रेनेज सर्किल बलिया के अधीक्षण अभियंता भानु प्रताप सिंह, जल निगम अयोध्या के अधीक्षण अभियंता पंकज यादव, जल निगम नगरीय आगरा के अधीक्षण अभियंता आरके पंकज, जल निगम नगरीय गोरखपुर के अधीक्षण अभियंता रतनसेन सिंह व नगर पालिका परिषद बलिया के प्रभारी अधिशासी अधिकारी व एसडीएम अखिलेश कुमार यादव शामिल हैं।
कोट...
उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सीवर परियोजना में हुई वित्तीय अनियमितता के संबंध में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसके अलावा अमृत योजना में हुई वित्तीय अनियमितता में फर्मों के खिलाफ भी मुकदमा कराया गया है।
- अंकुर श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता, जल निगम, नगरीय, बलिया।