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जेब ढीली करें, 24 घंटे में डीएल लें
ब्यूरो/अमर उजाला, बलिया
Updated Fri, 17 Jun 2016 11:45 PM IST
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एआरटीओ कार्यालय बना दलालों का अड्डा
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ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना हो या कोई और काम, सिर्फ पैसे खर्च करने की जरूरत है। एआरटीओ कार्यालय में लर्निंग से लेकर हर तरह के लाइसेंस आसानी से बन जाएंगे। दाम फिक्स है, कोई भागदौड़ नहीं करनी होगी। कुछ ही दिनों में आपके हाथ में लाइसेंस मिल जाएगा। शुक्रवार को एआरटीओ कार्यालय परिसर का हाल देखने के बाद कुल मिलाकर यही बातें सामने आईं।
कार्यालय के कर्मचारियों की तुलना में दलाल ज्यादा सक्रिय दिखे। उनकी हर आने जाने वालों पर नजर थी। विभाग में दलालों की सक्रियता इतनी है कि थोड़ा ज्यादा रुपये खर्च करने पर 24 घंटे में भी लाइसेंस बनवाकर देने की गारंटी है।
सूत्रों की माने तो एआरटीओ परिसर में दलालों की अधिकारी से लेकर कर्मचारियों तक से अच्छी खासी सेटिंग हैं। हर टेबल पर बधी बधाई फीस है। जितनी जल्दी लाइसेंस चाहिए, उतनी ही राशि बढ़ती जाएगी। लर्निंग हो या लाइट अथवा हैवी, सभी की फीस दलालों ने फिक्स कर रखी है।
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एआरटीओ परिसर में दलालों का मकड़जाल इतना फैला है कि उनके माध्यम से जाने वाले लोगों के दिए गए दस्तावेजों की जांच भी नहीं होती है। सब कुछ फिक्स रहने की वजह से जो कागज इनके द्वारा अधिकारियों को दे देते हैं वे उसे आंखें मूंदकर लगा देते हैं। अधिकारी अधिकारी बिना जांच के ही अपनी हरी झंडी दे देते हैं।
कार्यालय के मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही दलाल एक टक देखने लगे। अंदर घुसते ही एक दलाल ने तुरंत सवाल किया। रजिस्ट्रेशन कराना हो या लाइसेंस बनवाना है तो इधर आइये। आपको भाग दौड़ करने की जरूरत नहीं है। जिस तरह से पैसा खर्च करेंगे, उतनी ही जल्दी आपका काम हो जाएगा।
एआरटीओ कार्यालय के अंदर जाने पर नजारा भी कुछ कम नहीं रहा। अंदर विभागीय कर्मचारियों से लाइसेंस बनवाने के बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने पूरी लंबी शृंखला बता दी। पूरे दस्तावेज लेकर आइए तब लाइसेंस बनेगा। कार्यालय में देखने से प्रतीत हो रहा था विभागीय कर्मचारियों से ज्यादा बाहरी लोग काम करने में लगे हैं।
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कार्यालय के कर्मचारियों की तुलना में दलाल ज्यादा सक्रिय दिखे। उनकी हर आने जाने वालों पर नजर थी। विभाग में दलालों की सक्रियता इतनी है कि थोड़ा ज्यादा रुपये खर्च करने पर 24 घंटे में भी लाइसेंस बनवाकर देने की गारंटी है।
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सूत्रों की माने तो एआरटीओ परिसर में दलालों की अधिकारी से लेकर कर्मचारियों तक से अच्छी खासी सेटिंग हैं। हर टेबल पर बधी बधाई फीस है। जितनी जल्दी लाइसेंस चाहिए, उतनी ही राशि बढ़ती जाएगी। लर्निंग हो या लाइट अथवा हैवी, सभी की फीस दलालों ने फिक्स कर रखी है।
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एआरटीओ परिसर में दलालों का मकड़जाल इतना फैला है कि उनके माध्यम से जाने वाले लोगों के दिए गए दस्तावेजों की जांच भी नहीं होती है। सब कुछ फिक्स रहने की वजह से जो कागज इनके द्वारा अधिकारियों को दे देते हैं वे उसे आंखें मूंदकर लगा देते हैं। अधिकारी अधिकारी बिना जांच के ही अपनी हरी झंडी दे देते हैं।
कार्यालय के मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही दलाल एक टक देखने लगे। अंदर घुसते ही एक दलाल ने तुरंत सवाल किया। रजिस्ट्रेशन कराना हो या लाइसेंस बनवाना है तो इधर आइये। आपको भाग दौड़ करने की जरूरत नहीं है। जिस तरह से पैसा खर्च करेंगे, उतनी ही जल्दी आपका काम हो जाएगा।
एआरटीओ कार्यालय के अंदर जाने पर नजारा भी कुछ कम नहीं रहा। अंदर विभागीय कर्मचारियों से लाइसेंस बनवाने के बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने पूरी लंबी शृंखला बता दी। पूरे दस्तावेज लेकर आइए तब लाइसेंस बनेगा। कार्यालय में देखने से प्रतीत हो रहा था विभागीय कर्मचारियों से ज्यादा बाहरी लोग काम करने में लगे हैं।