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राज्यमंत्री उपेंद्र तिवारी की करारी हार, संग्राम बने विधायक

Fri, 11 Mar 2022 12:49 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 11 Mar 2022 12:49 AM IST
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bjp minister looses the seat, sangram  winner
बलिया। जनपद की फेफना विधानसभा सीट से सपा गठबंधन के प्रत्याशी संग्राम सिंह यादव प्रदेश सरकार में स्वतंत्र प्रभार के मंत्री उपेंद्र तिवारी को करारी शिकस्त दी। उपेंद्र तिवारी मतगणना के शुरुआत से ही पिछड़ते चले गए। बीच में उन्हें अंतर को पाटने की कोशिश की, लेकिन हार का अंतर लगातार बढ़ता गया। इस सीट से संग्राम सिंह यादव ने उपेंद्र तिवारी को 19354 से हराया। सपा और भाजपा प्रत्याशियों को छोड़ सीट पर सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। बसपा इस सीट पर कहीं भी लड़ाई में नहीं दिखी।
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फेफना विधानसभा से राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार उपेंद्र तिवारी हैट्रिक लगाने के लिए लगातार पांचवी बार मैदान में उतरे थे। सुभासपा के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरी सपा के संग्राम यादव ने उपेंद्र तिवारी की अच्छी घेराबंदी की थी। पिछले चुनाव में सपा से संग्राम सिंह यादव और बसपा से अंबिका चौधरी दोनों के चुनाव लड़ने से यादव मतों में काफी बिखराव हुआ था। हालांकि इस बार भी केडी सिंह यादव के रूप में बसपा ने यादव प्रत्याशी को मैदान में उतारा था, लेकिन शुरुआत से ही वो चुनाव को लेकर उदासीन थे। इसलिए यादव मतों में बिखराव नहीं हुआ। राजभर, यादव और मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण सपा के पक्ष में हुआ। अन्य बिरादरियों में भी उपेंद्र तिवारी को लेकर नाराजगी दिखी। इसका खामियाजा उन्हें चुनाव में उठाना पड़ा।
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ये सीट सपा का गढ़ मानी जाती थी। यादव बहुल इस सीट पर लगातार चार बार सपा के अंबिका चौधरी विधायक रहे। परिसीमन के बाद इस सीट का नाम बदल कर फेफना हुआ तो वर्ष 2012 और 2017 के चुनाव में लगातार दो बार इस सीट पर भाजपा से उपेंद्र तिवारी विधायक बने थे। उपेंद्र तिवारी हैट्रिक लगाने के लिए चुनाव में उतरे थे। संग्राम सिंह यादव इससे पहले 1993 में बसपा से चिलकहर सीट से विधायक बने थे। इसके बाद वो कई चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें हार मिली थी। इस बार वो सपा के टिकट पर चुनाव जीते हैं।
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दोहराया इतिहास
नरहीं। पहले कोपाचिट अब फेफना विधानसभा ने अपना इतिहास दोहराया है। इस विधानसभा में जो मंत्री बना वह चुनाव हार गया है। सिर्फ पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी ने 2007 में इस विधानसभा को जीत कर इतिहास रचा था और सक्रिय राजनीति में बने हुए हैं, जबकि अन्य नेता हाशिए पर चले गए। फिर एक बार मंत्री उपेंद्र तिवारी की हार ने यह साबित कर दिया है कि मंत्री पद अशुभ है। सबसे पहले मंत्री रामनगीना सिंह चुनाव हारे थे। दूसरी बार मंत्री गौरीशंकर भैया चुनाव हार गए। मंत्री अंबिका चौधरी भी 2012 में चुनाव हार गए, लेकिन विधानपरिषद से चुन कर दूसरी बार राजस्व मंत्री बने। उपेंद्र तिवारी दो बार चुनाव जीतने के बाद 2017 में राज्यमंत्री बने, लेकिन इस बार का चुनाव सपा के संग्राम यादव से हार गए।
सीट से अब तक नहीं खुला बसपा का खाता
जनपद की सात विधानसभा सीटों फेफना ही एकमात्र ऐसी विधानसभा सीट है, जहां से बसपा आज तक अपना खाता नहीं खोल पाई है। पहले ये विधानसभा कोपाचिट के नाम से जानी जाती थी। तभी भी यही स्थिति थी। नाम बदलने के बाद भी बसपा इस सीट से अभी अपना वो दमखम नहीं दिखा पाई है। इस सीट से पिछले विधानसभा चुनाव 2017 में सपा से नाराज होकर बसपा में शामिल हुए अंबिका चौधरी दूसरे नंबर थे। उन्होंने लगभग 52 हजार से ज्यादा मत भी हासिल किए थे। वर्ष 2007 में जब बसपा की लहर थी तब भी बसपा यहां से दूसरे नंबर पर थी। बसपा से सुधीर राय ने उस समय 35 हजार से ज्यादा मत हासिल किए थे। वर्ष 2002 में भी बसपा से सुग्रीव सिंह दूसरे नंबर पर रहे। तब उन्हें 31 हजार से ज्यादा मत मिले थे।

अंबिका और गौरी भैया चार-चार बार रहे विधायक
फेफना विधानसभा 1957 में अस्तित्व में आई थी। पहले चुनाव में इस सीटसे मान्धाता कांग्रेस से निर्वाचित घोषित हुए थे। उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया के कामता को 798 मतों से हराया था। इस सीट से सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व की बात करें तो सपा नेता अंबिका चौधरी ने चार बार इसे अपने कब्जे में किया। 1993 से 2012 तक वो इस सीट से सपा से विधायक रहे। वहीं, गौरी शंकर भैया कोपाचीट विधानसभा सीट से लगातार चार बार 1977, 1980, 1985 और 1989 मे विधायक चुने गए।
किसे मिले कितने मत
विधानसभा फेफना
कुल प्रत्याशी-14
कुल मतदाता-328592
कुल पड़े वोट-187872
प्रत्याशी-दल-मिले मत
संग्राम सिंह यादव-सपा-92516
उपेंद्र तिवारी-भाजपा-73162
कमलदेव यादव-बसपा-14154
जैनेंद्र-कांग्रेस-2229
अवधेश वर्मा-बमुपा-787
अवलेश-जदयू-621
दिनेश-रायुमोद-416
पवन प्रकाश-जन अधिकार पार्टी-152
भीम-भासपा-673
मन्नू-नैतिक पार्टी-416
विवेक-वीआईपी-2256
जनार्दन सिंह-निर्दलीय-422
शमीम-निर्दलीय-415
संतोष निर्दलीय-351
नोटा-117
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