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रबी की बुआई के लिए भटक रहे दर-दर

Tue, 15 Nov 2016 08:13 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया Updated Tue, 15 Nov 2016 08:13 PM IST
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bhatak rahe kisan
नोटबंदी की असर
तहसील क्षेत्र में रबी की फसल बोने के लिए किसान दर-दर भटक रहे हैं। पांच सौ और एक हजार रुपये के नोटबंदी से उनकी हालत और बदतर हो गई है। लोग फुटकर पैसे के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं लेकिन उन्हें चारों तरफ से निराशा ही हाथ लग रही है। उनके पास फुटकर पैसे नहीं हैं कि वे बीज खरीद सके। ऐसे में किसान अपने घर में रखा अनाज औने-पौने दाम में बीज विक्रेताओं को ही बेच दे रहे हैं। 
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तहसील क्षेत्र में एक भी एटीएम काम नहीं कर रहा है, जबकि बैंकों में जबरदस्त भीड़ उमड़ रही है। उतरी दियरांचल या फिर गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों के लोगों को बैंक जाने के लिए करीब 15 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। सुबह बैंक पहुंचने के बाद भी पांच सौ या एक हजार के नोट के बदले फुटकर मिलेेंगे, इसका भरोसा नहीं है।
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गोपालनगर निवासी जयकिसुन यादव का कहना है कि 14 रुपये किलो के भाव में गेहूं बेचकर सौ रुपये के भाव में सरसों का बीज खरीदा हूं। वहीं मानगढ़ निवासी पूर्व प्रधान राजेंद्र यादव ने कहा कि बैंकों से रुपयों की निकासी नहीं हो रही है, जिससे औने-पौने दामों में अनाज बेचकर बीज और खाद खरीदना पड़ रहा है। खेती करने के लिए ऐसा करना मजबूरी है।
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बैंकों के बाहर पैसा निकालने के लिए लंबी लाइन लग रही है, जिसमें पूरा दिन लग जा रहा है। 
सिकंदरपुर संवाददाता के अनुसार, 1000 व 500 के नोट बंद होने से सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को काफी कठिनाई का सामना उठाना पड़ रहा है। एक तरफ सरकार द्वारा बैंकों में पर्याप्त धन होने की बात की जा रही है, लेकिन ये दावे बैंक में हवा-हवाई साबित हो रहे है, सरकारी बैंक पैसा नहीं होने का बहाना बनाकर एटीएम तो दूर काउंटर से भी पैसे देने में हीलाहवाली कर रहे हैं, जिसको लेकर लोगों में आक्रोश भी दिखाई दे रहा है।


किसानों का कहना है कि खाद व बीज लेने के लिए जब दुकानों पर जा रहे हैं तो कुछ दुकानदार तो पुराने नोट ले रहे हैं, लेकिन कुछ इससे इंकार कर रहे हैं। जिससे उनको खेतीबारी करने में भी दिक्कत आ रही हैं।
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