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बदलते मौसम में स्वास्थ्य के प्रति रहें सचेत, लापरवाही पड़ सकती है भारी
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बलिया। मौसम बदल रहा है। वहीं प्रदूषण की मार के बीच कोरोना वायरस का प्रकोप भी है। ऐसे में अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। लगातार मौसम परिवर्तन से सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार जैसी बीमारियां लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं। ऐसे बदलते मौसम की चपेट में सबसे पहले बच्चे ही आते हैं। बच्चों को सर्दी-खांसी, जुकाम जैसे तरह-तरह के वायरल और दूसरी बीमारियों से बचाने के लिए उनका खास ख्याल रखने की आवश्यकता है। यह जानकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेवती के चिकित्साधिकारी डा. बद्री राज यादव और महिला चिकित्साधिकारी डा. अनिता यादव ने संयुक्त रुप से दी।
डॉ ब्रदी राज ने बताया कि आजकल तापमान में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया है। दिन का तापमान बढ़ जाता है तो वहीं रात में पारा कम हो जाता है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है। जिस व्यक्ति की शारीरिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उनके लिए यह मौसम बहुत घातक है। खासकर छोटे बच्चों और वृद्ध लोगों को इस मौसम में बहुत सावधान रहने की जरुरत है। जनपद में सर्दी, जुकाम व बुखार के मरीज प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। इस बदलते मौसम में दमा के रोगियों की समस्या बढ़ जाती है। यह एक एलर्जिक बीमारी है, जिसमें सांस फूलने लगती है और श्वसन मार्ग धीरे-धीरे सिकुड़ने लगता है। इसका प्रमुख कारण वायु प्रदुषण, धूल, सिरगेट का धुआं आदि है। इसलिए इन सभी चीजों से होने वाली एलर्जी से दूर रहें।
सोनबरसा और रेवती के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की महिला चिकत्साधिकारी डा. अनिता ने बताया कि एनीमिया ग्रसित महिलाओं को इस मौसम में खासा सर्तक रहने की आवश्यकता होती है। खून की कमी के कारण सांस फूलने समेत वायरल बीमारियां तेजी से उन्हें अपने आगोश में लेती है। ऐसे में लापरवाही काफी महंगी भी साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि गले में खरांश, सिरदर्द, सांस लेने में दिक्कत, हल्का बुखार आना, आंखों में जलन, शरीर में दर्द है तो समझ जाइये कि आप बदलते मौसम के शिकार हो रहें हैं और इससे सावधानी रखना शुरू करें और संक्रमण से बचने का उपाय करें। छींकते समय अपने मुंह पर रुमाल जरुर रखें। घर से बाहर निकलने पर मास्क जरुर पहनें।
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डॉ ब्रदी राज ने बताया कि आजकल तापमान में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया है। दिन का तापमान बढ़ जाता है तो वहीं रात में पारा कम हो जाता है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है। जिस व्यक्ति की शारीरिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उनके लिए यह मौसम बहुत घातक है। खासकर छोटे बच्चों और वृद्ध लोगों को इस मौसम में बहुत सावधान रहने की जरुरत है। जनपद में सर्दी, जुकाम व बुखार के मरीज प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। इस बदलते मौसम में दमा के रोगियों की समस्या बढ़ जाती है। यह एक एलर्जिक बीमारी है, जिसमें सांस फूलने लगती है और श्वसन मार्ग धीरे-धीरे सिकुड़ने लगता है। इसका प्रमुख कारण वायु प्रदुषण, धूल, सिरगेट का धुआं आदि है। इसलिए इन सभी चीजों से होने वाली एलर्जी से दूर रहें।
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सोनबरसा और रेवती के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की महिला चिकत्साधिकारी डा. अनिता ने बताया कि एनीमिया ग्रसित महिलाओं को इस मौसम में खासा सर्तक रहने की आवश्यकता होती है। खून की कमी के कारण सांस फूलने समेत वायरल बीमारियां तेजी से उन्हें अपने आगोश में लेती है। ऐसे में लापरवाही काफी महंगी भी साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि गले में खरांश, सिरदर्द, सांस लेने में दिक्कत, हल्का बुखार आना, आंखों में जलन, शरीर में दर्द है तो समझ जाइये कि आप बदलते मौसम के शिकार हो रहें हैं और इससे सावधानी रखना शुरू करें और संक्रमण से बचने का उपाय करें। छींकते समय अपने मुंह पर रुमाल जरुर रखें। घर से बाहर निकलने पर मास्क जरुर पहनें।
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