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कोहरे की मार, थम गई रफ्तार
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Thu, 08 Jan 2015 10:45 PM IST
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कोहरा पड़ने से रेल और यातायात बाधित हो गया है। लोग निर्धारित समय से अपने मंजिल को पहुंच नहीं पा रहे हैं। घने कोहरे के बीच लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया।
गुरुवार को भोर में घने कोहरे और गलन की वजह से सुबह से लोग घरों में दुबके रहे। आलम यह रहा कि सड़क से लेकर रेल यातायात भी बाधित रहा। लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी परेशानियाें का सामना करना पड़ा।
गुरुवार को दोपहर बाद भगवान भास्कर का दर्शन होने से लोगों ने राहत की सांस ली। जबकि पछुआ हवा के चलते ठंड से लोग बेहाल रहे। मौसम के बदलते मिजाज से कभी कोहरा तो कभी सर्द हवाओं से लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
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मानव के साथ-साथ पशु-पक्षियाें का भी जीना दूभर हो गया है। दोपहर में भगवान भाष्कर का दीदार हुआ तो लोगों ने राहत महसूस किया। सुबह घने कोहरे के कारण सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए।
वहीं, ट्रेनें भी विलंब से अपने गंतव्य तक पहुंची। ठंड की वजह से सबसे दयनीय स्थिति स्टेशन परिसर और उसके आसपास खानाबदोश जिंदगी जीने वालाें की है। जो मात्र एक कंबल के सहारे जैसे-तैसे रहने को विवश है। फिर भी जिला प्रशासन कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर रहा है।
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गुरुवार को भोर में घने कोहरे और गलन की वजह से सुबह से लोग घरों में दुबके रहे। आलम यह रहा कि सड़क से लेकर रेल यातायात भी बाधित रहा। लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी परेशानियाें का सामना करना पड़ा।
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गुरुवार को दोपहर बाद भगवान भास्कर का दर्शन होने से लोगों ने राहत की सांस ली। जबकि पछुआ हवा के चलते ठंड से लोग बेहाल रहे। मौसम के बदलते मिजाज से कभी कोहरा तो कभी सर्द हवाओं से लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
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मानव के साथ-साथ पशु-पक्षियाें का भी जीना दूभर हो गया है। दोपहर में भगवान भाष्कर का दीदार हुआ तो लोगों ने राहत महसूस किया। सुबह घने कोहरे के कारण सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए।
वहीं, ट्रेनें भी विलंब से अपने गंतव्य तक पहुंची। ठंड की वजह से सबसे दयनीय स्थिति स्टेशन परिसर और उसके आसपास खानाबदोश जिंदगी जीने वालाें की है। जो मात्र एक कंबल के सहारे जैसे-तैसे रहने को विवश है। फिर भी जिला प्रशासन कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर रहा है।