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अतिक्रमण के मामले में राजस्व विभाग शिकायतकर्ता से ही मांग रहा प्रमाण

Thu, 14 Jan 2021 11:08 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 14 Jan 2021 11:08 PM IST
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बलिया। गांवों में स्थित तालाब, पोखरा आदि पर अगर अतिक्रमण है तो इसकी शिकायत राजस्व विभाग से करना बेमानी है क्योंकि आपको इसके लिए प्रमाण देना होगा। ऐसा ही मामला नरही थाना के सरायकोटा गांव में सामने आया है। गांव में डेढ़ दशक से तालाब और खाद के गड्ढे पर कब्जा है। इस मामले में पूर्व में कई बार जुर्माना निर्धारित करने और बेदखली का आदेश भी तहसील स्तरीय अधिकारियों का है लेकिन इसकी शिकायत ग्रामीणों ने जब जनसुनवाई पोर्टल पर की तो अधिकारियों ने शिकायतकर्ता की ओर से प्रमाण न देने की आख्या देकर मामले को निस्तारित कर दिया।
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हैरानी की बात है कि इस मामले को एक पखवारा पहले प्रदेश के खेल मंत्री की ओर पदयात्रा के दौरान ग्रामीणों ने उठाया और मंत्री की ओर से कार्रवाई करने का निर्देश मौके पर ही राजस्व विभाग के अधिकारियों को दिया। एक माह बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। अमर उजाला के खुलासा के बाद से ग्रामीण सक्रिय हैं। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि दबंगों को जिले के ही एक पुलिस अधिकारी का संरक्षण मिल रहा है और इसके चलते कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। लाख प्रयास के बावजूद राजस्व विभाग की कार्यशैली व रवैया नहीं बदला है। किसी भी मामले को लटकाने व शिकायतों को नजरअंदाज कर लीपापोती करने के कारण ही सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण करने वालों के हौसले बुलंद हैं। बता दें कि नरही थाना के सरायकोटा गांव के तालाब के भीटा, ग्रामसभा की जमीन व खाद के गड्ढे पर डेढ़ दशक से अधिक समय से दबंगों ने कब्जा कर रखा है। वर्ष 2005 में तत्कालीन एसडीएम ने मामले की जांच कराई और गांव के 21 लोगों पर 1.75 लाख का जुर्माना तय करते हुए सार्वजनिक से अवैध कब्जा हटाने का निर्देश दिया लेकिन आज भी यह आदेश तहसील के ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। इसका खुलासा होने के बाद गांव के ही दिव्यांश राय ने 16 दिसंबर को जनसुनवाई पोर्टल पर इसकी शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की लेकिन सदर तहसील के अधिकारियों ने बिना किसी पड़ताल के ही यह अंकित करते हुए मामले का निस्तारण कर दिया कि शिकायतकर्ता की ओर से कोई प्रमाण नहीं दिया गया है।
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बिना जांच किए शिकायतकर्ता की ओर से प्रमाण नहीं देने की बात कर अतिक्रमण जैसे मामले को निस्तारित नहीं किया जा सकता है। चिह्नित गांव और अराजी नंबर होते हुए भी यह निस्तारण उचित नहीं है और इस मामले में संबंधित लेखपाल से स्पष्टीकरण मांग कार्रवाई की जाएगी। - राजेश यादव, एसडीएम, सदर, बलिया
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