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विकास के नाम पर की कमाई, अब जांच में डाल रहा रोड़ा
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बलिया। हनुमानगंज ब्लॉक के वैना ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में अनियमितता के आरोपों की जांच के लिए ग्रामीणों की शिकायत पर बनी कमेटी दो साल में भी जांच पूरी नहीं कर पाई है। 15 दिन पहले जांच के दौरान विवाद भी हो चुका है। कमेटी के अध्यक्ष डीएसओ का कहना है कि टीम के गांव में पहुंचने के दौरान विवाद की स्थिति देखकर जांच रोक दी गई थी। अब एक बार फिर नए सिरे से जांच कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेज दी जाएगी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रधान ने विकास के नाम पर जमकर कमाई की है और अब जांच में रोड़ा डालने का प्रयास कर रहा है।
वैना गांव के लोगों ने दो साल पहले जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर ग्राम पंचायत के वर्ष 2016-17 से वर्ष 2019-20 के बीच कराए गए कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाया था। गांव के अभिजीत पांडेय, सुदर्शन पांडेय, ब्रजेश गिरी एडवोकेट की शिकायत पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने कमेटी गठित की लेकिन जांच नहीं हो सकी। जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही ने 17 अगस्त 2020 को पूर्व की कमेटी को बिंदुवार जांच कर आख्या देने का निर्देश दिया। डीएम के निर्देश पर, 28 अक्टूबर को जिला पूर्ति अधिकारी गांव में जांच के लिए पहुंची। इस दौरान प्रधान पति एवं उनके सहयोगियों की ओर से हंगामा किया गया। इस पर जिला पूर्ति अधिकारी बिना जांच किए गांव से लौट गए। शिकायतकर्ता बृजेश गिरी ने बताया कि इंटरनेट के माध्यम से निकाली गई सूचना में ग्राम पंचायत को पिछले पांच वर्षों में एक करोड़ से अधिक धनराशि आवंटित हुई है। इस राशि से हुए विकास कार्य जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। चौबेपुर में पुलिया निर्माण कागज पर तो है लेकिन धरातल पर कहीं नहीं है। इसी तरह ग्राम सभा में इंडिया मार्का टू हैंड पंप की मरम्मत एवं रिबोरिंग पर 13 लाख 84 हजार 996 रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन गांव में लगभग 90 प्रतिशत हैंडपंप खराब हैं। इसी प्रकार ग्राम पंचायत के सभी कार्यों में घोर अनियमितता बरती गई है। टीम डीएसओ की अध्यक्षता में बनी है, जिसके सदस्य लोनिवि के एई और आरईएस के जेई भी हैं। जांच के लिए बार-बार तिथि निर्धारित की जाती है लेकिन फिर टल जाती है। आलम यह है कि दो साल बाद भी यह जांच अधर में है।
जांच के दौरान कराई जाए वीडियो रिकार्डिंग
बलिया। शिकायतकर्ता बृजेश गिरी ने बताया कि 28 अक्टूबर को हुए हंगामे की पूरी रिकार्डिंग की गई है। उन्होंने मांग की है कि भविष्य में होने वाली जांच की भी वीडियो रिकार्डिंग कराई जाए। 28 अक्टूबर को हंगामे के दिन रिकार्डिंग में प्रधान पति ने जानमाल की धमकी देते हुए कहा है कि किसी भी कीमत पर जांच नहीं होने देंगे। इस खतरे को देखते हुए उन्होंने थाना, पुलिस अधीक्षक के साथ-साथ जनसुनवाई पोर्टल पर सुरक्षा के लिए आवेदन भी किया है।
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हम जांच से भाग नहीं रहे हैं। हमने गांव का विकास किया और अब हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं। मैंने किसी को धमकी नहीं दी है। संग्राम यादव, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि, ग्राम वैना
एक पखवाड़े पूर्व जांच के लिए टीम गई थी। दो पक्षों में विवाद के कारण जांच नहीं हो सकी। जांच के लिए कई बार तिथि निर्धारित की जाती है, लेकिन अचानक शासकीय कार्य के चलते जांच नहीं हो पाती है। जल्द ही जांच कर मामले की आख्या जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। - केजी पांडेय, डीएसओ, बलिया
जांच में लापरवाही या उसे बेवजह टालना गंभीर मामला है। डीएसओ को पत्र भेजा जाएगा। यदि उन्होंने शीघ्र जांच पूरी कर आख्या नहीं दी तो उनकी सैलरी रोकने की कार्रवाई की जाएगी। - श्रीहरि प्रताप शाही, जिलाधिकारी, बलिया
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वैना गांव के लोगों ने दो साल पहले जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर ग्राम पंचायत के वर्ष 2016-17 से वर्ष 2019-20 के बीच कराए गए कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाया था। गांव के अभिजीत पांडेय, सुदर्शन पांडेय, ब्रजेश गिरी एडवोकेट की शिकायत पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने कमेटी गठित की लेकिन जांच नहीं हो सकी। जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही ने 17 अगस्त 2020 को पूर्व की कमेटी को बिंदुवार जांच कर आख्या देने का निर्देश दिया। डीएम के निर्देश पर, 28 अक्टूबर को जिला पूर्ति अधिकारी गांव में जांच के लिए पहुंची। इस दौरान प्रधान पति एवं उनके सहयोगियों की ओर से हंगामा किया गया। इस पर जिला पूर्ति अधिकारी बिना जांच किए गांव से लौट गए। शिकायतकर्ता बृजेश गिरी ने बताया कि इंटरनेट के माध्यम से निकाली गई सूचना में ग्राम पंचायत को पिछले पांच वर्षों में एक करोड़ से अधिक धनराशि आवंटित हुई है। इस राशि से हुए विकास कार्य जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। चौबेपुर में पुलिया निर्माण कागज पर तो है लेकिन धरातल पर कहीं नहीं है। इसी तरह ग्राम सभा में इंडिया मार्का टू हैंड पंप की मरम्मत एवं रिबोरिंग पर 13 लाख 84 हजार 996 रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन गांव में लगभग 90 प्रतिशत हैंडपंप खराब हैं। इसी प्रकार ग्राम पंचायत के सभी कार्यों में घोर अनियमितता बरती गई है। टीम डीएसओ की अध्यक्षता में बनी है, जिसके सदस्य लोनिवि के एई और आरईएस के जेई भी हैं। जांच के लिए बार-बार तिथि निर्धारित की जाती है लेकिन फिर टल जाती है। आलम यह है कि दो साल बाद भी यह जांच अधर में है।
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जांच के दौरान कराई जाए वीडियो रिकार्डिंग
बलिया। शिकायतकर्ता बृजेश गिरी ने बताया कि 28 अक्टूबर को हुए हंगामे की पूरी रिकार्डिंग की गई है। उन्होंने मांग की है कि भविष्य में होने वाली जांच की भी वीडियो रिकार्डिंग कराई जाए। 28 अक्टूबर को हंगामे के दिन रिकार्डिंग में प्रधान पति ने जानमाल की धमकी देते हुए कहा है कि किसी भी कीमत पर जांच नहीं होने देंगे। इस खतरे को देखते हुए उन्होंने थाना, पुलिस अधीक्षक के साथ-साथ जनसुनवाई पोर्टल पर सुरक्षा के लिए आवेदन भी किया है।
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हम जांच से भाग नहीं रहे हैं। हमने गांव का विकास किया और अब हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं। मैंने किसी को धमकी नहीं दी है। संग्राम यादव, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि, ग्राम वैना
एक पखवाड़े पूर्व जांच के लिए टीम गई थी। दो पक्षों में विवाद के कारण जांच नहीं हो सकी। जांच के लिए कई बार तिथि निर्धारित की जाती है, लेकिन अचानक शासकीय कार्य के चलते जांच नहीं हो पाती है। जल्द ही जांच कर मामले की आख्या जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। - केजी पांडेय, डीएसओ, बलिया
जांच में लापरवाही या उसे बेवजह टालना गंभीर मामला है। डीएसओ को पत्र भेजा जाएगा। यदि उन्होंने शीघ्र जांच पूरी कर आख्या नहीं दी तो उनकी सैलरी रोकने की कार्रवाई की जाएगी। - श्रीहरि प्रताप शाही, जिलाधिकारी, बलिया