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बलिया बलिदान दिवस: सांसद निरहुआ ने छेड़ा देशभक्ति का राग तो झूम उठे लोग, मंच पर मौजूद मंत्री बजाते रहे ताली

Sat, 19 Aug 2023 07:55 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 19 Aug 2023 07:55 PM IST
सार

आजमगढ़ से सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ ने 'माई हो ललनवा दे दी' गीत के जरिए वहां मौजूद लोगों में देशभक्ति का उत्साह भर दिया। अपने संबोधन में कहा कि बलिया के बागीपन को सुनता आया हूं। असंख्य वीरों में अपनी जान दी थी, तब जाकर हम सबको आजादी मिली है। 

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Ballia balidan diwas bjp MP Nirhua song melody of patriotism people cheered
बलिया बलिदान दिवस में सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के बलिया जिले में क्रांतिवीरों के सम्मान में शनिवार को बलिया बलिदान दिवस धूमधाम से मनाया गया। पुलिस लाइन के ग्राउंड में आयोजित जनसभा में आजमगढ़ से सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ ने 'माई हो ललनवा दे दी' गीत के जरिए वहां मौजूद लोगों में देशभक्ति का उत्साह भर दिया। देशभक्ति गाने पर भीड़ झूम उठी। मंच पर मौजूद तमाम मंत्री, विधायक और भाजपा नेता भी ताली बजाते रहे। ॉ

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अपने संबोधन में आजमगढ़ सासंद ने कहा कि बचपन से ही बलिया के बागीपन को सुनता आया हूं। असंख्य वीरों में अपनी जान दी थी, तब जाकर हम सबको आजादी मिली है। इसमें बलिया के क्रांतिकारी वीरों का अभूतपूर्व योगदान रहा है। उन्होंने बलिया की क्रांति पर आधारित फिल्म बनाने की भी बात कही।

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बलिया का बागी तेवर हमेशा सलामत रहे

बलिया बलिदान दिवस पर आयोजित जनसभा में कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने देश की आजादी में शहीद वीरों को नमन किया। कहा कि  आजादी की लड़ाई में जो योगदान बलिया का रहा है, उसे भुलाया नहीं जा सकता। बलिया के खून में आज भी वही बागी तासीर देखने को मिलती है। वह तेवर हमेशा सलामत रहे, यही मेरी शुभकामना है।

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संग्राम का महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु रहा बलिया

Ballia balidan diwas bjp MP Nirhua song melody of patriotism people cheered
बलिया बलिदान दिवस - फोटो : अमर उजाला

सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने कहा कि 1857 में स्वतंत्रता संग्राम के नायक बलिया जिले के मंगल पांडेय थे। तो, 1942 क्रांति के नायक चित्तू पांडेय। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का भी कार्यक्षेत्र बलिया रहा था। उनके एक हाथ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की गीता, तो दूसरे हाथ में पिस्तौल थी। इसी का परिणाम था कि 1942 में ही बलिया को आजादी मिल गई थी। इस प्रकार आजादी की लड़ाई का बलिया महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु रहा है।

अपने इतिहास को जानें युवा

राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने खासकर स्कूली बच्चों से आह्वान किया कि हमारे महान सेनानियों की कहानियों को सुनें। अपने इतिहास को जानें और देश के विकास में सकारात्मक योगदान देने की दिशा में कदम बढ़ाने की प्रेरणा मिलेगी। कहा कि क्रांति में अहम योगदान के कारण ही बलिया को बागी कहा गया, जिसे सुनकर हर बलियावासी को गर्व होता है। इस अवसर पर पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी, पूर्व विधायक संजय यादव, राजधारी सिंह, सहकारी बैंक के चेयरमैन विनोदशंकर दूबे सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। 

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