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स्वरूप बदलती हैं चंडी
ब्यूरो/अमर उजाला/बलिया
Updated Sun, 10 Apr 2016 11:15 PM IST
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उचेड़ा की मां चंडी भवानी
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रसड़ा में जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर उचेड़ा गांव में आदि शक्ति चंडी देवी का प्राचीन मंदिर है। मान्यता है कि आदिशक्ति दिन में तीन बार अपना रूप बदलती हैं। सुबह में बालिका, दोपहर में महिला तथा शाम को वृद्ध के रूप में लेती हैं। मान्यता है कि रसड़ा क्षेत्र के गोपालपुर निवासी ब्रह्मानंद चौबे माह के प्रत्येक पूर्णिमा को सदियों पूर्व गांव से विंध्याचल मां का दर्शन करने पैदल जाया करते थे।
वृद्धावस्था में उन्होंंने कहा कि मां शारीरिक रूप से अक्षम हो गया हूं। अब आपका दर्शन कैसे करूंगा। जब वह घर पर सोए हुए थे तो मां विन्ध्यवासिनी ने सपने में दर्शन दिया और कहा कि मैं बगल के गांव उचेड़ा में जमीन फाड़कर प्रकट होंगी। सपने के कुछ ही दिन बाद आदिशक्ति मां चंडी देवी के रूप में भोलेनाथ के साथ जमीन से प्रकट हुईं।
इसके बाद चौबे ने चंडी देवी और भोलेनाथ का पूजा करना आरंभ कर दिया। इसके बाद से क्षेत्र के लोग वहां पूजन-अर्चन कर परिवार के सुख-समृद्धि के लिए मन्नतें मांगते हैं। जिन्हें मां सहर्ष पूर्ण करती हंै।
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वृद्धावस्था में उन्होंंने कहा कि मां शारीरिक रूप से अक्षम हो गया हूं। अब आपका दर्शन कैसे करूंगा। जब वह घर पर सोए हुए थे तो मां विन्ध्यवासिनी ने सपने में दर्शन दिया और कहा कि मैं बगल के गांव उचेड़ा में जमीन फाड़कर प्रकट होंगी। सपने के कुछ ही दिन बाद आदिशक्ति मां चंडी देवी के रूप में भोलेनाथ के साथ जमीन से प्रकट हुईं।
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इसके बाद चौबे ने चंडी देवी और भोलेनाथ का पूजा करना आरंभ कर दिया। इसके बाद से क्षेत्र के लोग वहां पूजन-अर्चन कर परिवार के सुख-समृद्धि के लिए मन्नतें मांगते हैं। जिन्हें मां सहर्ष पूर्ण करती हंै।
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